Bhabhi ki help se mummy ki chudai:- आपके लिए इस सेक्सी स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर आई हूँ। पढ़िए और मुझे मेल करना मत भूलना। शाम को मैं मार्केट निकल गया। और सारा अपना काम करके रात को वापस आया। तब तक भाई आ चुके थे। मगर माहौल शांत था। यानी मम्मी ने हमें बचा लिया था। और भाई को कुछ नहीं बताया था। भाभी खाना बना रही थीं। और मम्मी, भाई और मैं नीचे बैठे थे।
भाभी मेरी तरफ देख भी नहीं रही थीं। मम्मी की नजर भी हम दोनों के ऊपर ही थी।
Part 1 ==> भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 1
Bhabhi ki help se mummy ki chudai
खाना खाने के बाद भाई और भाभी अपने कमरे में चले गए।
और मैं अपनी तकिया लेकर बैठक में सोने जाने लगा। तभी मम्मी ने मुझे रोक दिया।
मम्मी: तू यहीं सोएगा मेरे साथ। और अगर बाहर गया तो तेरी टाँगें तोड़ दूँगी।
मैं वहीं लेट गया। और अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया।
मम्मी: बेटा तुझे शर्म नहीं आई। अपनी भाभी के साथ ऐसा रिश्ता बनाके। मेरा तो मन कर रहा था कि कपिल को सब बता दूँ। मगर फिर इस घर का सोचके नहीं बताया।
मैं: मम्मी मैं दिल से कह रहा हूँ। आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा। और ना ही मैं अब भाभी से बात करूँगा।
मम्मी: मैंने तुझे बातें करने से मना नहीं किया है। और ना ही कभी तुम पर शक किया था। मगर शायद मुझे ही बहू को इतनी आजादी नहीं देनी चाहिए थी।
मैं: मम्मी अब बस भी करो। मैं माफी माँग तो चुका हूँ।
मम्मी: माफी माँगके कौनसा अहसान किया है। तभी मैं कहूँ बहू ऊपर जाती है तो इतनी देर से क्यों आती है। अब पता चला ऊपर तो देवर-भाभी रासलीला खेल रहे होते हैं।
मैं कुछ नहीं बोल रहा था। बस मम्मी की बातें सुन रहा था।
मम्मी: बेटा तुम दोनों के बीच ये सब कब से चल रहा था?
मैंने कोई जवाब नहीं दिया। तो मम्मी जोर से बोलीं।
मम्मी: बेटा मैंने कुछ पूछा है? जवाब दो मुझे।
मैं: सात महीने से चल रहा है मम्मी।
मम्मी: यानी बाबू के होने के बाद से तू बहू की च…… मेरा मतलब है ये सब कर रहा है।
मम्मी चुदाई बोलते-बोलते रुक गईं। शायद मम्मी ये जानना चाहती थीं कि कहीं ये बच्चा मेरा तो नहीं है। मगर ये जानकर वो शांत हो गईं कि बच्चा मेरे भाई का ही है।
फिर मैं और मम्मी सो गए। समय बीतता रहा और मम्मी की नाराजगी हल्के-हल्के कम होने लगी। घर का माहौल सही होने लगा।
तीन महीने तक मैंने भाभी से बात नहीं की थी। ना ही वो मुझे देखती थीं। मम्मी ये सब देख रही थीं। इसलिए अब उनको यकीन हो गया था कि हम दोनों वाकई पछता रहे हैं।
इस बात को तीन महीने बीत गए। मगर इन तीन महीनों में मेरे लंड को चूत नहीं मिली। मेरा हाल बुरा हो रहा था। ऊपर से रात को मम्मी की जवानी को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था।
अब मम्मी भी मुझसे पहले की तरह रहने लगी थीं। वो पुरानी सारी बातें भूल गई थीं। मैंने बहुत सोचने के बाद मम्मी के ऊपर ट्राई करने का सोचा।
मैं मम्मी को घूर-घूर के देखने लगा था। खासकर जब भी उनकी नाभि सामने होती थी। मेरी नजर उनकी नाभि पर ही रहती थी। मम्मी का फिगर साड़ी में एकदम कातिल हसीना की तरह लगता है।
मैं कुछ दिन मम्मी के दूध और गहरी नाभि को घूरता रहा। और जल्दी ही मम्मी ने भी ये नोटिस कर लिया कि अब मेरी नजर उनकी नाभि और उनके बड़े-बड़े दूध पर है।
कई बार मैंने उनकी नाभि और दूध को घूरते हुए अपने होंठों पर जीभ भी फेर दी थी। और मम्मी पल्लू से अपनी नाभि को छुपा लेती थीं।
जब हमारी नजर मिलती थी तो मैं उनके सामने मुस्कुरा देता था। और कई बार मम्मी के दूध और नाभि को घूरते हुए अपना लंड दबा देता था।
एक औरत हमेशा ये बात जानती है कि सामने वाला मर्द उसे कैसे देख रहा है। मैं अब मम्मी को पटाने का प्लान बनाने लगा था। अब मुझे फिर से उन्हें अपना लंड दिखाना था।
मुझे याद है उस दिन भी मम्मी मेरे लटके हुए लंड को देख रही थीं। रात को जब मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज में सोती हैं, तब सबसे सही टाइम था।
मम्मी के कमरे में डबल बेड पड़ा है। जिस पर सिर्फ मैं और मम्मी ही सोते हैं। और हमारे बीच काफी गैप होता है। मगर आज मैं उस दूरी को कम करने वाला था।
रात को मैं और मम्मी सोने लगे। और कुछ ही देर में मम्मी गहरी नींद में चली गईं। मैं मम्मी के पास खिसक गया। और उनके बिल्कुल करीब लेट गया।
मम्मी बिल्कुल सीधी लेटी हुई थीं। और उन्होंने पेटीकोट नाभि से चिपका के बाँधा हुआ था। मैंने हल्के से अपनी उंगली मम्मी की नाभि में डाल दी।
मेरी बड़ी उंगली आधी से ज्यादा मम्मी की नाभि में घुस गई। मम्मी की नाभि की गहराई वाकई काफी ज्यादा थी। आज से पहले मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं किया था।
मगर आज अपने लंड के लिए मजबूर होकर मुझे मम्मी की चुदाई करनी थी। नाभि में उंगली करते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।
मैं उंगली कर रहा था। तभी मम्मी हिलीं। और मेरी तरफ करवट लेकर लेट गईं। मैं भी उनके बगल में लेट गया। मेरी मम्मी मुझसे लंबाई में छोटी हैं। इसलिए मैं थोड़ा नीचे हुआ।
और अपना लंड बाहर निकाल लिया। मेरे लंड का सुपाड़ा फूला हुआ था। और मम्मी की नाभि से खेलने की वजह से मेरा प्री-कम निकल आया था।
मैंने अपना लंड मम्मी की नाभि में हल्के से लगा दिया। मेरे लंड का सुपाड़ा मम्मी की गहरी नाभि से भी छोटा लग रहा था। और अगर मैं धक्का लगाता तो शायद मेरा पूरा सुपाड़ा मम्मी की नाभि में घुस जाता।
मैं हल्के-हल्के अपना लंड मम्मी की नाभि में डाल रहा था। मेरे सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा मम्मी की नाभि के अंदर तक जा रहा था। और मेरा लंड इतना टाइट हो गया था जितना भाभी की चुदाई में भी कभी नहीं हुआ।
मम्मी के जिस्म की कशिश भाभी से ज्यादा थी। मैं थोड़ी देर खेलता रहा। और फिर सो गया। मैं जानता था सुबह मम्मी 6 बजे उठ जाती हैं। इसलिए मैंने अपनी स्मार्ट वॉच में 6 बजे से पहले का अलार्म लगाया था।
और उसे वाइब्रेटर मोड पर रखा था। ताकि अलार्म की आवाज से मम्मी न उठ जाएँ। जब अलार्म का वाइब्रेशन हुआ तब मैं उठ गया। और मम्मी को देखने लगा।
मगर मेरा लंड तो मुझसे भी पहले से जाग चुका था। मम्मी बेखबर सो रही थीं। मैं जानता था 6 बजते ही मम्मी के मोबाइल का अलार्म बज जाएगा।
तब तक मैं मम्मी की जवानी को घूरता रहा। ताकि मेरा लंड ढीला न पड़ जाए।
मगर मम्मी की ऐसी कयामत जवानी को देखकर तो किसी का भी लंड ढीला नहीं हो सकता था।
मैं बिल्कुल मम्मी के बगल में लेटा हुआ था। और अपना लंड अंडरवियर के छेद से बाहर निकाल लिया था। ताकि मम्मी को लगे गलती से बाहर निकल गया है। 6 बजते ही मम्मी की घड़ी का अलार्म बजने लगा।
और मैंने अपने माथे पर हाथ रख लिया। जैसे लोग सोते हुए रख लेते हैं। मम्मी उठ गईं। और हाथ जोड़के भगवान को याद करने लगीं। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा।
और मेरी तरफ देखते ही उनकी आँखें बड़ी हो गईं। मेरा 7 इंच का लंड अपना फन फैलाए मम्मी का स्वागत कर रहा था। मैं जानबूझकर अपने लंड को झटके मार रहा था।
और ऐसा करने से मम्मी की नजर मेरे लंड से हट ही नहीं रही थी। कुछ देर तक वो बस बैठकर मेरे लंड को घूरती रहीं। और पास में पड़ी चादर को मेरे ऊपर डालके बाथरूम चली गईं।
नीचे वाले कमरे का बाथरूम कमरे के साइड में गैलरी में बना हुआ है। हम लोग वहीं से फ्रेश होकर सीधा कमरे में आ जाते हैं।
और मम्मी की नंगी जवानी मैंने इसी कमरे में देखी थी। जब पापा थे तो मैं कभी मम्मी को नंगा नहीं देख पाया था। मगर उनके मरने के बाद मैं मम्मी के साथ सोता था।
और रोज मम्मी को कपड़े बदलते देखता था। मम्मी जब नहाके वापस आईं तब तक मैं अपने ऊपर पड़ी चादर को हटा चुका था। और मेरा लंड फिर से खड़ा होकर मम्मी की जवानी को ललचा रहा था।
मम्मी मेरी तरफ पीठ करके कपड़े पहनने लगीं। मम्मी की नंगी पीठ मेरी तरफ थी। और साइड से लटके हुए बड़े-बड़े दूध दिख रहे थे।
मेरा लंड इसे देखकर और ज्यादा टाइट हो गया था। और फिर मम्मी ने चादर डालके कमरे से बाहर पूजा करने चली गईं।
7 बजे भाभी चाय बनाके मम्मी और मुझे देती हैं।
मगर आज मम्मी ने भाभी को चाय देने से मना कर दिया। क्योंकि वो जानती थीं अंदर मेरा नाग फन फैलाए खड़ा है। और फिर भाभी पता नहीं क्या सोचतीं।
इसलिए थोड़ी देर में मम्मी कमरे में आईं। मैंने चादर फिर से हटा दी थी। मम्मी के हाथ में चाय का कप था। मगर चाय से ज्यादा गरम उनकी चूत हो गई होगी।
मम्मी कुछ देर मेरे लंड को देखती रहीं। फिर उन्होंने चादर डाल दी। और मुझे हिलाके उठा दिया। मैं उठके बैठ गया। और मम्मी तुरंत बाहर चली गईं।
मगर आज उन्हें लंड दिखाके मुझे बहुत मजा आया। अब मुझे मम्मी से थोड़ा खुलके बातें करनी थीं। इसलिए मैंने एक आइडिया लगाया।
दोपहर को खाना खाने के बाद मैं ऊपर कमरे में आ गया। मैं जानता था मम्मी चेक करने जरूर आएंगी। उससे पहले ही मैंने एक मम्मी की फोटो अपने कंप्यूटर पर लगा दी।
ये फोटो मैंने कुछ दिन पहले ही खींची थी। जब मम्मी कमरे में अंगड़ाई ले रही थीं। जब मम्मी ने अंगड़ाई ली थी तो उनके हाथ खुल गए थे। और साड़ी का पल्लू साइड हो गया था।
जिससे मम्मी की नाभि बिल्कुल खुलके सामने दिख रही थी। जिसे मम्मी हमेशा अपने पल्लू से छुपाके रखती थीं। इस फोटो में मम्मी के दूध की घुंडियाँ भी दिख रही थीं।
मैं जानता था कोई भी औरत अपनी ऐसी फोटो देखकर उसे हटाने के लिए बोलेगी। मम्मी ऊपर आईं। और मेरे सामने खड़ी हो गईं। मेरी नजर मम्मी के पेट के ऊपर थी।
और मेरा लंड कच्छे में खड़ा हो गया था। मैंने जानबूझकर अपना एक हाथ लंड के ऊपर रखा हुआ था। आज सुबह के हादसे के बाद मम्मी की पहली नजर मेरे लंड पर ही पड़ी।
और फिर मम्मी की नजर जैसे ही कंप्यूटर के स्क्रीन पर गई, वो चौंक गईं।
मम्मी: बेटा ये मेरी कैसे फोटो लगा रखी है?
मैं: क्या हुआ मम्मी? फोटो तो बहुत अच्छी लग रही है। इसमें बुरा क्या है?
मम्मी: बेटा ये फोटो बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही है। कोई देखेगा तो क्या कहेगा?
मैं: मम्मी पता नहीं आपको इस फोटो में गंदा क्या लग रहा है। इतनी तो अच्छी है। बस आपका थोड़ा पेट खुला हुआ दिख रहा है।
मम्मी: बेटा उसी की तो बात कर रही हूँ। मेरा पेट मोटा हो गया। और इस फोटो में साफ दिख रहा है। हटा दे बेटा, अच्छी नहीं लग रही है।
मैंने मम्मी के कहने पर उनकी फोटो हटा दी। मम्मी मेरे गाल पर हाथ फेरकर नीचे चली गईं।
रात को खाना खाने के बाद जब हम लोग रूम में थे। तब मैंने जानबूझकर वही फोटो अपने मोबाइल पर लगा रखी थी। और मैं अपना मोबाइल ऑन करके बाहर पानी लेने चला गया।
मम्मी ने वो फोटो देख ली। और जब मैं वापस आया तब बोलीं—
मम्मी: बेटा ये तूने फोटो अपने कंप्यूटर से हटाई। तो अपने मोबाइल में लगा ली?
मैं: मम्मी आपकी ही तो फोटो है। और मुझे आपकी ही फोटो लगाना पसंद है।
मम्मी: बेटा तो कोई अच्छी सी फोटो लगा। पता नहीं तू यही फोटो क्यों लगा रहा है।
मैं: ठीक है मम्मी, मैं फोटो हटा देता हूँ। मगर चलो एक अच्छी सी फोटो खींच लेता हूँ।
मम्मी: बेटा ये सोने का समय है। और तू इतनी रात को मेरी फोटो लेना चाहता है?
मैं: अरे मम्मी फोटो तो है। बस 2 मिनट ही लगेंगे।
मम्मी: चल ठीक है, खींच ले जल्दी से।
मैं: मम्मी बैठे होने से अच्छी नहीं आएगी। आप खड़े हो जाओ।
मम्मी मेरे सामने खड़ी हो गईं। मगर उन्होंने अपनी नाभि को पल्लू से छुपा लिया। मैंने एक फोटो ऐसी ही ले ली। मगर फिर मैं मम्मी के पास गया।
और नीचे बैठके मम्मी की साड़ी का पल्लू उनकी नाभि से हटा दिया।
मम्मी: ये क्या कर रहा है बेटा? मेरा पल्लू ऐसी ही रहने दे।
मैं: मम्मी वैसे ही रखा है। बस आपकी नाभि से हल्का सा हटाया है।
मम्मी: बेटा वही तो कह रही हूँ। उस फोटो में भी मेरी नाभि दिख रही थी। और तू ये फोटो भी ऐसी ही ले रहा है। मुझे नाभि दिखाना पसंद नहीं है।
मैं: अरे मम्मी नाभि ही तो है। इसमें कौनसी बड़ी बात हो गई। इससे तो आपकी फोटो और भी अच्छी हो जाएगी।
मम्मी: बेटा जिद मत कर। मुझे ऐसी फोटो पसंद नहीं है।
मैं: मम्मी सिर्फ एक फोटो अपने बेटे के प्लीज।
मेरे कहने पर मम्मी मान गईं। और मैंने एक फोटो की जगह 3-4 फोटो ले लीं।
मैं बेड पर आकर लेट गया। और मैंने सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहना था। मम्मी ने अपनी साड़ी निकालके साइड में रख दी। और मेरे बगल में आकर लेट गईं।
मैं: मम्मी एक बात पूछूँ अगर आप बुरा न मानो तो?
मम्मी: हाँ बेटा, पूछो क्या बात है।
मैं: मम्मी आजकल सब औरतें नाभि दिखाती हैं। तो आप अपनी नाभि को क्यों छुपाके रखते हो? मैंने देखा है आप हमेशा उसे पल्लू से छुपा लेते हो।
मम्मी: बेटा ऐसी कोई बात नहीं है।
मैं: मम्मी मैं आपका बेटा हूँ। और इतना तो मैं आपको जानता ही हूँ। क्या पापा आपको ऐसा करने से मना करते थे?
मम्मी: बेटा तू पूछ रहा है इसलिए बता रही हूँ। वरना आज से पहले जिसने भी मेरी नाभि देखी है, उसने सिर्फ मेरा मजाक उड़ाया है। तेरे पापा भी मेरा मजाक उड़ाते थे।
मैं: मम्मी ऐसा क्या मजाक उड़ाते थे?
मम्मी: बेटा मेरी नाभि शुरू से बड़ी और गहरी है। जो भी मेरी सहेली इसे देखती थी, वो यही कहती थी कि तेरी नाभि है या कुआँ। शुरू में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। मगर बाद में हर कोई यही कहता था। और शादी के बाद तेरे पापा ने भी यही कहा।
मैं: मगर मम्मी इसमें आपका क्या दोष है। ये तो भगवान ने ही ऐसी बनाई है।
मम्मी: बेटा वो सब तेरी तरह समझदार नहीं थे। शादी के बाद जब मैं यहाँ आई तब मैं साड़ी नाभि से नीचे ही पहनती थी। मगर तेरे पापा ने मुझे मना कर दिया। तब से मैं अपनी नाभि को किसी को नहीं दिखाती हूँ।
मैं: मगर मम्मी आपकी नाभि तो बहुत अच्छी है। मैंने आज तक ऐसी नाभि नहीं देखी है।
मम्मी: बेटा तू ऐसा इसलिए कह रहा है ताकि मुझे बुरा न लगे। इसे छूके देख, तू भी इसे कुआँ ही कहेगा।
मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी नाभि पर रख दिया। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई हो। मैंने अपनी बीच वाली उंगली मम्मी की नाभि में डाल दी।
और मम्मी की नाभि से खेलने लगा। मम्मी को गुदगुदी होने लगी। और वो हँसने लगीं।
मम्मी: हाहाहा… अरे बेटा ऐसा मत। तेरा भाई-भाभी समझेंगे मैं पागल हो गई हूँ। मत कर बेटा, गुदगुदी हो रही है।
मैं: देखा मम्मी, मुझे आपकी नाभि पसंद है। और आज से आप मेरे सामने अपनी नाभि कभी मत छुपाना। और आगे से अगर मेरी मम्मी की नाभि का किसी ने मजाक उड़ाया तो मैं उसकी ग तोड़ दूँगा।
मम्मी: हाहाहा… मेरी नाभि के लिए झगड़ा करेगा? वैसे ये ग का क्या मतलब है?
मैंने अपनी गाँड पर हाथ रखकर मम्मी को मतलब समझा दिया। मम्मी ग का मतलब जानके हँसने लगीं।
मम्मी: हाहाहा… बेटा तुम आजकल के लड़के भी पता नहीं कैसे-कैसे नाम रखते हो। ग अरे ये भी छुपाने की बात है। खुलके बोल दो गाँड तोड़ दूँगा। वैसे मैंने बचपन में तेरी ग पर बहुत सांती मारी है।
मम्मी मुझसे मजाक करते हुए हँस रही थीं।
मैं: हाँ मम्मी मुझे याद है। जब मैं दोपहर को खेलके आता था तो आप मेरी गाँड पर सांती मारती थीं। और मेरी गाँड को बंदर की तरह लाल कर देती थीं।
मम्मी: अब क्या करती, तू था भी तो बहुत शैतान। मगर तुझे प्यार भी तो बहुत करती थी।
मैं: प्यार करती थी? मतलब अब प्यार नहीं करती हो?
मम्मी ने मुझे लेटे-लेटे ही गले लगा लिया। मम्मी के बड़े-बड़े दूध मेरे सीने से दब गए। और मेरा लंड अंडरवियर के ऊपर से मम्मी के पेट पर लग रहा था।
मैंने भी मौके का फायदा उठाया। और मम्मी की कमर को पीछे से पकड़के अपना लंड मम्मी के पेट पर रगड़ दिया। मम्मी को मेरा लंड जरूर फील हुआ होगा।
मगर फिर भी वो मेरे गले लगी रहीं। और कुछ देर बाद उन्होंने मुझे हटा दिया। मेरे लंड का उभार साफ-साफ मेरे अंडरवियर में दिख रहा था।
आज मम्मी से थोड़ा खुलके बातें करके मजा आया। अब मैं बिल्कुल उनके बगल में लेटा था। और मैंने अपना हाथ मम्मी की नाभि पर रख दिया।
और हल्के-हल्के मम्मी की नाभि में उंगली करने लगा।
मम्मी: राजा ये क्या कर रहा है तू? मैंने तुझे अपनी नाभि छूने दी। इसका मतलब ये नहीं है कि तू अब मुझे सोने भी नहीं देगा।
मैं: मम्मी मैं तो आपको ये एहसास दिला रहा हूँ कि आपकी नाभि किसी को पसंद हो या न हो, मगर मुझे तो बहुत पसंद है।
मम्मी: बेटा वो तो ठीक है। मगर अब मुझे सोने तो देगा। अगर तू ऐसी ही उंगली करेगा तो मुझे नींद कैसे आएगी?
मैं: सॉरी मम्मी, मुझसे गलती हो गई। मैं भी कितना पागल हूँ।
मम्मी: बेटा माफी मत माँग। मैंने तुझे डाँटा थोड़ी है। और तू तो मेरा प्यारा बच्चा है। चल अब सो जा, रात बहुत हो गई है।
अब मम्मी दूसरी तरफ करवट लेकर सोने लगीं। और मैं उनके सोने का इंतजार करने लगा। मगर ज्यादा थके होने की वजह से मुझे भी नींद आ गई।