Bivi ki madad se sali ki chudai ki kahani:- सभी लंडधारियों और चूत मालकिनों को मेरे खड़े लंड से नमस्कार। यह कहानी है मेरी और मेरी साली के बीच हुई जबर्दस्त चुदाई की। मैं अपने बारे में बता दूँ, दिखने में हैंडसम हूँ और लंड 6.5 इंच है जो किसी के भी छेद को फाड़ने का दम रखता है।
Bivi ki madad se sali ki chudai ki hindi kahani
मेरी बीवी का नाम प्रिया है और साली का नाम अंजलि।
मेरी साली का जिस्म एकदम कड़क है। उसकी चुचियाँ 34 की हैं, कमर 30 की और गाँड आआआह्ह्ह 36 की। अंजलि भी मैरिड है।
तो अब मैं सीधा स्टोरी पर आता हूँ दोस्तों। मेरी पहले की कहानी में आपने पढ़ा होगा कि मैं बहुत सी रिलेटिव की चूत चोद चुका हूँ तो मैं अपनी साली को कैसे छोड़ दूँ। मैं अपनी बीवी को हमेशा चुदाई के समय गालियाँ दिया करता था।
मेरी बीवी प्रिया वही है जिसे पहले की स्टोरी में आप पढ़ सकते हैं। मेरी बीवी प्रिया को पता है कि मैं उसके अलावा कितनी चूत चोद चुका हूँ। बहुत बार तो प्रिया के सामने या उसके साथ मिलके ही चुदाई की है।
और इस चुदाई में मैं हमेशा प्रिया को माँ-बहन की गालियाँ देता था।
प्रिया समझ चुकी थी कि मैं उसकी बहन अंजलि को चोदना चाहता हूँ और एक दिन उसने मुझसे पूछ लिया।
प्रिया: क्या तुम मेरी बहन को भी चोदना चाहते हो जो रात में मुझे सबसे ज्यादा गालियाँ उसी की सुनाते हो?
मैं: (प्रिया को अपनी तरफ खींचते हुए) हाँ मेरी जान, तेरी बहन भी तेरी तरह ही उछलके मजा देगी। साली की चूत में मेरा लौड़ा फँसाना है मुझे। उसका पति तो शक्ल से ही गांडू लगता है।
प्रिया: तुम बहुत बड़े हरामी हो। मैं कम पड़ रही हूँ क्या जो अब मेरी बहन को भी चोदोगे? खुद की बहन, भाभी और मौसी को तो चोदते हो, अब अंजलि भी?
मैं: हाँ मेरी जान, अंजलि की चूत का मजा लेना है। बता कब दिलवा रही है साली कुतिया? प्लीज दिलवा दे, तेरी बहन की चूत का भोसड़ा कर दूँगा।
प्रिया: ठीक है, मैं उसे कल बुलाती हूँ।
अगले दिन जब मैं ऑफिस से आया तो अंजलि मेरे घर पर थी।
आते ही अंजलि ने डोर ओपन किया।
अंजलि: हेलो जीजू।
मैं: हेलो अंजलि, तुम कब आई?
अंजलि: दीदी का फोन आया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है तो मैं उनके पास 2-3 दिन के लिए आ गई। आप तो ऑफिस में रहते हो ना।
मैं: अच्छा किया तुम आ गई। प्रिया की तो तबीयत खराब है, अब तुमसे ही दिल लगा रहेगा।
अंजलि: क्या जीजू, आप भी अच्छा मजाक करते हो।
मैं: हाँ साली, आधी घरवाली जो होती है। मेरा बस चले तो पूरी घरवाली बनाके रखूँ।
अंजलि: अच्छा जी। चलो अब आप बैठो और मैं चाय ले आती हूँ।
मैं अपनी बीवी प्रिया के पास बैठ गया।
मैं: थैंक्स जानमन, जो अंजलि को बुलाया। अब सब कुछ मुझ पर छोड़ दो। इसी बेड पर तुम्हारे सामने तुम्हारी बहन चुदेगी अब तो।
प्रिया: हाँ, मैं भी देखती हूँ कि खुद की बहन को चोदने वाला मेरा बहनचोद पति अब मेरी बहन को कैसे अपने लंड के नीचे लेकर आता है।
इतने में अंजलि चाय ले आई।
अंजलि: क्या बातें हो रही हैं दीदी-जीजू? चाय पियो और मुझे भी बताओ।
मैं: कुछ नहीं, बस तुम्हारी ही बातें हो रही थीं।
अंजलि: मेरी क्या बातें?
मैं: यही कि तुम अब पहले से ज्यादा सुंदर लगने लगी हो शादी के बाद से।
अंजलि: ऐसा कुछ नहीं है जीजू, आपको ऐसा लगता होगा।
मैं: अरे नहीं नहीं, तुम तो अपनी बहन से भी ज्यादा सुंदर हो कसम से।
बातों में समय कब निकला पता ही नहीं चला। रात को 9 बजे के टाइम पर अंजलि किचन में खाना बना रही थी।
अंजलि ने मेरी बीवी प्रिया की साड़ी पहनी हुई थी।
मैं किचन में गया और अंजलि को पीछे से धीरे से कमर पर हाथ रखकर जकड़ लिया और नेक पर किस किया।
अंजलि: (थोड़ा चौंक गई और शर्माते हुए बोली) जीजू ये क्या कर रहे हो?
मैं: ओह सॉरी, मुझे लगा प्रिया है। तुमने उसका ड्रेस पहना है तो ऐसा लगा जैसे वही है। सॉरी।
(मेरे हाथ उसकी कमर पर ही थे।)
अंजलि: इट्स ओके, लेकिन अब हाथ तो हटाओ।
मैं: हाथ हटाने का मन तो बिल्कुल भी नहीं है। प्लीज रखे रहने दो ना।
अंजलि: अगर दीदी ने देख लिया तो आपकी खैर नहीं है।
मैं: तुम्हारी दीदी से मैं सब समझ लूँगा। उसकी चिंता मत करो।
अंजलि: अच्छा, आप तो ऐसे बोल रहे हो जैसे दीदी हमें ऐसे देखके कुछ बोलेगी ही नहीं। प्लीज जीजू छोड़ो ना, दीदी देख लेगी हमें।
मैं: प्लीज साली साहिबा, रखने दो ना। प्रिया से ज्यादा सेक्सी हो तुम।
अंजलि: दम है तो दीदी के सामने बोलके बताओ, तब मान जाऊँगी कि आप में मर्दों वाली बात है।
मैं: अगर बोल दिया तो क्या मिलेगा?
अंजलि: (मुस्कुराते हुए बोली) वही जो आप चाहते हो, मिलेगा।
मैं: ठीक है फिर। मैं तुम्हें तुम्हारी बहन के सामने लिप्स पर किस करूँगा। बुलाओ अपनी बहन को।
अंजलि: दम है इतना?
मैं: प्रिया को बुला लो, दम दिखा देता हूँ। तुम्हारे पति से ज्यादा दम है मुझमें।
अंजलि: (प्रिया को आवाज लगाती है) दीदी यहाँ आना।
मेरी बीवी किचन में आ जाती है। मेरा हाथ अभी भी अंजलि की कमर पर था।
प्रिया: क्या हुआ, बोलो।
अंजलि: ये देखो जीजू को, ये क्या कर रहे हैं।
मैं: कुछ नहीं बस जान, बस आज अंजलि के लिप्स बहुत सेक्सी हैं। इन पर किस कर रहा हूँ।
और मैं अपने होंठ अंजलि के होंठों पर रखकर उन्हें चूसने लगा, अंजलि की कमर पकड़ते हुए।
अंजलि अब तक थोड़ी गरम हो चुकी थी लेकिन घबरा रही थी।
प्रिया हमें देखके पलटकर वापस चली गई।
मैंने किस करना जारी रखा।
और अपना एक हाथ अंजलि के बूब्स पर रखकर हल्के से प्रेस किया।
अंजलि: आआआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… क्या कर रहे हो आप?
मैं: (किस करते हुए अंजलि के बूब्स मसल रहा था) उम्मम्म… अंजलिआआह्ह… तुम बहुत सेक्सी हो… आआह्ह्ह अंजलिआह्ह…
अंजलि: ओह्ह्ह्ह जीजू प्लीज… उम्मम्म… आआह्ह्ह जीजू…
मैं: आआह्ह्ह अंजलि मत रोको मुझे। मैं तुम्हारे जिस्म का मजा लेना चाहता हूँ पूरी तरह से। आआह्ह्ह…
अंजलि: उफ्फफ जीजू, प्यासी तो मैं भी बहुत हूँ। मेरा तो पति किसी काम का नहीं है। आआह्ह्ह… उम्मम्म…
मैं: तेरा जीजू है ना जानमन। आज तुझे चुदाई का असली मजा आएगा।
मैंने अंजलि को गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाने लगा।
अंजलि: वहाँ तो दीदी है ना।
मैं: तो क्या हुआ जानमन। उसके सामने ही चोद दूँगा तुझे। तू देखती जा।
और मैं अंजलि को बेडरूम में लेकर बेड पर पटक दिया। पास में ही प्रिया भी लेटी थी।
प्रिया: मैं आती हूँ किचन से।
मैं: अरे मेरी जान, कहाँ जा रही है? तेरी बहन को तो चुदते हुए देख ले।
प्रिया: तेरी बहन को चुदते हुए देखा, वही बहुत है।
अंजलि ये सब सुनके दंग रह गई कि ये सब क्या बातें हो रही हैं।
अंजलि: जीजू क्या ये सब सच है?
मैं: हाँ साली साहिबा, ये सब सच है।
और ऐसा बोलते हुए मैंने अंजलि की साड़ी निकाल दी।
और अंजलि की कमर और पेट को मसलने लगा।
उफ्फफ… क्या गोरा और चिकना जिस्म था। आआह्ह्ह बहुत मजा आ रहा था।
प्रिया पास में सोफे पर बैठके देखने लगी।
अंजलि: उफ्फफ जीजू आआह्ह्ह… उम्मम्म… ये क्या कर रहे हो… आआह्ह्ह…
अंजलि सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। मैं उसके पेट पर हाथ फेरते हुए उसके बूब्स तक आ गया और उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा।
जैसे ही मेरा हाथ अंजलि के बूब्स तक पहुँचा और मैंने उसे हल्के से प्रेस किया, अंजलि के मुँह से एक अलग ही आआह्ह्ह की आवाज निकली।
अंजलि: आआआह्ह्ह्ह जीजू… उम्मम्म…
मैंने अंजलि के बूब्स को थोड़ा टाइट पकड़के दबाना शुरू किया।
उफ्फफ… क्या बूब्स थे अंजलि के।
आआह्ह्ह मैं बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगा और एक हाथ पेटीकोट ऊपर करके उसकी जाँघ को मसलने लगा।
उफ्फफ… उसकी जाँघ बहुत चिकनी थी।
मैं उन्हें एक हाथ से मसलने लगा।
और दूसरे हाथ से उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए।
अंजलि: जीजू बस मेरे ही कपड़े निकलवाओगे क्या? अपने भी निकालो, अपना औजार तो दिखाओ मुझे।
प्रिया उठके बाहर चली गई।
मैं: हाँ जानमन, मेरा औजार भी दिखा दूँगा तुझे साली।
और मैंने अपनी शर्ट और जीन्स उतारके अंडरवियर में आ गया। अंजलि मुझे अंडरवियर में देखके शॉक हो गई। मेरा लंड फुल टाइट था जो कि अलग ही दिख रहा था।
अंजलि: जीजू इतना हार्ड… उफ्फफ… मेरा पति का तो इसका आधा भी नहीं है।
मैं: वो नामर्द होगा लेकिन तेरा जीजू नहीं। चल अब आजा मेरी जान।
और मैंने अंजलि की पेटीकोट और ब्लाउज को निकाल दिया।
अब अंजलि और मेरे जिस्म पर सिर्फ अंडरवियर के अलावा और कुछ नहीं था।
मैंने अंजलि के बूब्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
उफ्फफ… क्या बूब्स थे अंजलि के। बहुत मजा आ रहा था चूसने में। एकदम गोरे-गोरे चूचे थे।
अंजलि भी मेरे सर के बालों में हाथ घुमाती और बूब्स को चूसवाने का आनंद ले रही थी।
अंजलि: आआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… आआह्ह्ह चूसो और चूसो… आआह्ह्ह मजा आ रहा है… उम्मम्म जीजू आआह्ह्ह…
मैं बूब्स को जोर-जोर से चूसने लगा और अपना एक हाथ अंजलि की पैंटी में डाल दिया।
उफ्फफ… चूत पूरी तरह से आग की भट्ठी की तरह गरम हो चुकी थी और गीली भी।
अंजलि: आआआह्ह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… आआह्ह्ह…
मैं: आआह्ह्ह मेरी रांडी, तेरी चूत बहुत लाजवाब है। आज तो मजा आ जाएगा।
अंजलि: आआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… तो लूट लो मजा। मेरा पति तो नामर्द है, साला हिजड़ा।
मैंने अंजलि की पैंटी निकाली और उसकी चूत के ऊपर अपना मुँह रख दिया।
और चूत को चाटने लगा।
जैसे ही मैं चूत को चाटना शुरू किया, अंजलि तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई। वो जोर-जोर से आहें भरने लगी।
अंजलि: आआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… आआह्ह्ह… ओह्ह्ह जीजू… ओह्ह्ह येस… आआह्ह्ह चाटो मेरी चूत… उम्मम्म…
अंजलि को इतनी जोर-जोर से आहें लेते देख मुझे जोश और चढ़ गया।
मैंने भी चूत को लप-लप-लप चाटने लगा और दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगा।
जब भी मैं चूत की फाँकों पर दाँतों से बाइट करता, अंजलि की आवाज जोर से चीखते हुए निकलती—
अंजलि: आआह्ह्ह जीजूऊऊह्ह…
मैं अंजलि की चूत को चाट-चाटके पूरा गीला कर चुका था। अब मैंने अंजलि की चूत में अपनी दो उंगलियाँ अंदर डालीं और चूत में फिंगरिंग करने लगा। और मेरे दूसरे हाथ की पाँचों उंगलियाँ अंजलि के मुँह में डाल दीं।
अंजलि फिंगरिंग का पूरी तरह से मजा ले रही थी।
अंजलि: ओह्ह्ह ये… आआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… चोद दो मुझे… आज मेरी चूत बहुत प्यासी है… आआह्ह्ह चोदो मुझे… आआह्ह्ह…
और ऐसा बोलते हुए अंजलि ने मुझे कसके पकड़ लिया।
उसकी चूत से पानी आ चुका था। मैं भी उसके ऊपर लेट गया और उसे कसके पकड़ लिया।
कुछ देर बाद जब उसकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई तो मैं उठा और अपनी अंडरवियर निकाल दी।
जैसे ही मैंने अपनी अंडरवियर निकाली, मेरा 6.5 इंच का लंड उछलके बाहर आ गया।
अंजलि उसे फटी आँखों से देखने लगी।
मैंने अंजलि का हाथ उठाके मेरे लंड पर रख दिया।
अंजलि ने उसे हल्के हाथों से हिलाना शुरू किया।
मैं: तैयार हो मेरी जान इसे चूत में लेने को?
अंजलि: हाँ जीजू, जल्दी डालो मेरी चूत में।
मैंने अंजलि को लिटा दिया और उसके दोनों पैरों के बीच में बैठ गया।
अंजलि के दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को अंजलि की चूत पर रगड़ने लगा।
अंजलि: आआआह्ह्ह्ह जीजू डाल दो ना मेरी चूत में… उफ्फफ… प्लीज डाल दो।
मैं अपना लंड चूत के ऊपर रगड़ता रहा।
अंजलि: उफ्फफ… प्लीज जीजू मत तड़पाओ… अब डाल भी दो… आआह्ह्ह…
मैं: हाँ मेरी रांड, ये ले।
और मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और चूत में प्रेस करना शुरू किया।
अंजलि: आआआह्ह्ह जीजू आराम से… आआह्ह्ह… आआह्ह्ह आराम से…
मैंने थोड़ा और जोर लगाया और मेरा आधा लंड अंजलि की चूत में घुस गया।
मैं: उफ्फफ मेरी रांड, तेरी चूत तो अभी तक बहुत टाइट है कुतिया।
अंजलि: आआआह्ह्ह हाँ जीजू… क्या करूँ मेरा पति नामर्द है साला हिजड़ा… उफ्फफ…
मैंने अपने लंड को थोड़ा बाहर की तरफ निकाला और एक जोर का झटका लगाया।
मेरा पूरा लंड अंजलि की चूत को चीरता हुआ अंदर तक चला गया।
अंजलि: आआआह्ह्ह दीदी मर गई… मम्मू… आआह्ह्ह बचाओ… उईईई माँ…
आआह्ह्ह जीजू प्लीज बाहर निकालो इसे… बहुत दर्द हो रहा है… आआह्ह्ह प्लीज…
मैं ऐसे ही रुक गया और अंजलि के लिप्स को चूसने लगा। कुछ देर बाद जब अंजलि लिप्स चूसने में मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे चूत में रगड़ना स्टार्ट किया।
अंजलि: आआह्ह्ह जीजू… उम्मम्म… आआह्ह्ह… उफ्फफ… ओह येस… आआह्ह्ह रगड़ो मेरी चूत को… आआह्ह्ह फाड़ दो… आआह्ह्ह…
मैंने अपने लंड की स्पीड को थोड़ा तेज कर दिया।
अंजलि: आआह्ह्ह येस… उफ्फफ जीजू… आआह्ह्ह चोदो मुझे… आआह्ह्ह चोदो अपनी साली को… ओह्ह येह्ह… आआह्ह्ह…
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी क्योंकि अब मेरा भी पानी निकलने वाला था।
मैं: आआह्ह्ह कुतिया रांड साली… बहुत दिन से तेरी चूत का प्यासा था… आज प्यास बुझेगी मेरे लंड की… आआह्ह्ह ये ले रांडी…
अंजलि: हाँ मैं रांडी हूँ आपकी… आआआह्ह्ह चोदो… आआह्ह्ह फक… आई एम यूर बिच… ओह्ह्ह येस…
मैं: आआह्ह्ह रांडी कुतिया चिनाल… आआह्ह्ह फक…
मैं अंजलि को गालियाँ देते हुए अपना लंड एक झटके से बाहर निकाला और बूब्स की तरफ कर दिया।
जैसे ही मेरा लंड चूत से बाहर निकला, मेरा मूत अंजलि के बूब्स पर तेज धार के साथ जा गिरा।
अंजलि मेरा मूत अपने जिस्म पर देख बहुत खुश हुई।
अंजलि: ये तो बहुत सारा माल है जीजू।
मैं: हाँ मेरी जान।
और मैं अंजलि से चिपकके लेट गया।
थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और तौलिया से अपना-अपना जिस्म साफ किया।
इतने में प्रिया चाय लेकर आ गई।
प्रिया: लो चाय पी लो, बहुत हो गई चुदाई।
अंजलि अपनी निगाहें झुकाके नीचे की तरफ देख रही थी। वो अपनी बहन से आँख नहीं मिला पा रही थी।
मैंने प्रिया को हग करते हुए उसे थैंक यू कहा और लिप्स पर किस किया।
तो फ्रेंड्स, कैसी लगी आपको मेरी ये स्टोरी? प्लीज अपना फीडबैक मुझे जरूर दें ताकि मेरी तरफ से आपके लिए सच्ची कहानियों का दौर चलता रहे।