Dr Amrita ki vasna bhari kahani:- अमृता और रितेश की कार अब घर के सामने थी। घर नहीं पूरी हवेली थी। दो बड़ी-बड़ी इमारतें, बड़ा सा गार्डन। हवेली के सामने सिक्योरिटी गार्ड्स और पॉलिटिशियन होने के कारण हवेली के सामने हमेशा सिक्योरिटी ऑफिसर की 2-3 जीप होती थीं। गेट पर सिक्योरिटी गार्ड्स।
रितेश अपनी कार को अंदर ले जाता है। जाते वक्त सिक्योरिटी गार्ड्स उसे सलाम करते हैं। अंदर पार्किंग के यहाँ वो अपनी कार लगा देता है।
Part 1 yaha padhen ==> डॉक्टर मैडम की कामवासना -1
Dr Amrita ki vasna bhari kahani
अमृता कार के नीचे उतरती है। वहाँ कई सारे लोग थे। सिक्योरिटी गार्ड्स, घर के नौकर और गार्डन में काम करने वाले।
अमृता के नीचे उतरने से उसके पैरों की पायल छन-छन करके बजती है।
लेकिन वहाँ मौजूद किसी की भी गर्दन न अमृता को देखती है न ही कोई सर ऊपर करके अमृता को देखने की कोशिश करता है। सबकी नजरें एकदम नीचे।
और ऐसा होने का सबसे बड़ा कारण था प्रताप महाजन यानी कि अमृता के ससुर। भले ही हॉस्पिटल में अमृता और रितेश खुल के जीते हैं पर इस हवेली में और शहर में सिर्फ और सिर्फ प्रताप महाजन का खौफ चलता है। कोई उनके घर की औरत को आँख उठा के भी नहीं देख सकता। ऐसा खौफ है प्रताप महाजन का। रितेश हमेशा कॉलेज में, बाद में कॉलेज में कभी किसी को नहीं बताया कि उसका बाप क्या करता है। फिर लोग भी उससे डर के रहते।
अमृता को भी रिलेशनशिप के काफी बाद में पता चला कि रितेश का बैकग्राउंड क्या है।
अब दोनों भी उस हवेली में एंट्री करते हैं। हवेली में शाम की पार्टी की तैयारी चालू थी। कुछ ही वक्त था मेहमानों को आने में। तभी अमृता को सामने सीढ़ियों से उसके ससुर आते हुए दिखते हैं।
चाल में एक अलग अंदाज था। सफेद कपड़े, नीचे धोती, हाथ में एक कड़क लाठी और बड़ी-बड़ी मूँछें। एक अलग स्वाग था प्रताप महाजन का।
ससुर के सामने आते ही अमृता आगे जाके नीचे झुक जाती है और प्रणाम करती है। प्रताप उसके सर पे हाथ रखकर प्रणाम स्वीकार करता है। उसके बाद रितेश भी झुक कर प्रणाम करता है।
प्रताप: जाओ बेटा तैयारी कर लो। मेहमान आते होंगे।
रितेश: हाँ जाता हूँ पापा।
दोनों भी अपने कमरे की ओर चल देते हैं।
तभी प्रताप की कड़क आवाज दोनों को रोक देती है।
प्रताप: बहू…
वो आवाज सुन अमृता ठम के पीछे मुड़ती है।
अमृता: जी पापाजी क्या हुआ?
प्रताप: तुम इस घर की बहू हो। इस हवेली की होने वाली मालकिन और हमारे लिए तुम वही हो जो इस घर में है।
अमृता: जी पर समझी नहीं मैं पापाजी ठीक से।
प्रताप: मुझे ये कहना है कि तुम एक डॉक्टर हो वो अस्पताल में। यहाँ तुम हमारी बहू हो तो तुम्हें एक बहू जैसा रहना पड़ेगा।
तभी रितेश बीच में बोलता है।
रितेश: जी पापा मैं समझ गया। मैं इसे समझाता हूँ ठीक से।
अमृता को अभी भी कुछ नहीं समझा था पर वो हाँ में हाँ मिला देती है।
प्रताप: और हाँ बहू आप हमारे लिए बेटी समान हो तो मैं समझ सकता हूँ आपको यहाँ थोड़ा एडजस्ट करने में तकलीफ हो रही होगी पर आपको इसकी आदत डालनी होगी। आज इस शहर के बहुत बड़े-बड़े लोग यहाँ आ रहे हैं आप दोनों से मिलने। तो आपके पेशे के साथ जरा इस चीज पे भी ध्यान देना।
दोनों भी हाँ कहते हुए वहाँ से अपने रूम में जाते हैं।
अमृता: क्या हुआ रितेश? क्या कह रहे थे पापाजी?
रितेश: अरे जान वो ये कह रहे थे कि आज हमारे घर में बड़े लोग आने वाले हैं तो तुम्हें वैसा ही रहना होगा जैसे माँ रहती हैं।
अमृता: ओह अच्छा…
रितेश: मतलब अभी जो तुमने पहन रखा है वैसा नहीं चलेगा। ऐसा कहना था पापाजी को।
अमृता: हम्म समझ गई। ये बैकलेस साड़ी तो मैंने तुम्हारे लिए पहनी थी जान।
रितेश: आई नो पर पापाजी ने कहा ना घर में बहू और अस्पताल में डॉक्टर हो तुम।
अमृता थोड़ी मुस्कुराती है और दोनों अपनी-अपनी तैयारी में लग जाते हैं।
कुछ ही देर बाद शाम हो जाती है। रितेश अपनी तैयारी करके नीचे आ जाता है और अपने बाप के साथ बैठ जाता है।
धीरे-धीरे अँधेरा होने लगता है और सब लोग आ जाते हैं।
हॉल में एक राउंड टेबल था जहाँ सारे लोग बैठे हुए थे। गिन के 7-8 लोग थे पर इस शहर के बड़े लोग जिनके मदद से प्रताप शहर पर कंट्रोल करता था।
प्रताप महाजन के राइट साइड में बैठा था—
गफूर लाला…
उम्र: 60
गफूर काफी समय से प्रताप के लिए ब्लैक काम करता था जैसे किसी को धमकाना, किसी को रास्ते से हटाना और भी बहुत काम जो ऑफिशियल नहीं थे। गफूर के नाम शहर का एक बड़ा इलाका था जो गफूर प्रताप के अंडर कंट्रोल करता था और गफूर खुद एक स्लम से आया हुआ नाम था जो अब उसी स्लम को अपना किला बना चुका था। गफूर के पास एक हुकुम का इक्का था जिसका नाम था रागा।
प्रताप के लेफ्ट साइड में बैठा था इस शहर का डीसीपी। सब उसे डीसीपी मिश्रा के नाम से जानते थे।
डीसीपी मिश्रा: उम्र: 55
मिश्रा काफी हरामी था और वो प्रताप के सारे ब्लैक केसेस हैंडल करता था और गफूर के किए गए क्रिमिनल एक्टिविटीज को हैंडल करने का काम करता था।
ये दोनों आदमी प्रताप महाजन के एम्पायर के 2 पिलर थे। इन दोनों के मदद से प्रताप पूरे शहर को कंट्रोल करता था और अब वो ये सब अपने बेटे यानी रितेश महाजन को भी सिखाना शुरू कर चुका था। भले ही रितेश डॉक्टर था पर प्रताप उसे शुरू से पॉलिटिक्स का नॉलेज और उसकी गंदगी को सिखाना चालू कर दिया था।
और बचे 2 पिलर तो प्रताप महाजन के बाकी 2 पिलर थे उसका परिवार और घर की इज्जत। पॉलिटिक्स में इज्जत बहुत इंपॉर्टेंट होती है। प्रताप अपने घर की औरतों को काफी छूट देता था पर उतना ही कायदे में रखता था। अपनी पत्नी के देहांत के बाद घर में दो ही औरतें बची थीं और उनमें से एक शायद इस एम्पायर की अगली मालकिन यानी अमृता महाजन।
और दूसरी प्रताप महाजन की बेटी शनाया महाजन जिसकी शादी यहाँ के बड़े बिजनेसमैन अग्रवाल के घर उसके बेटे से की थी।
अग्रवाल प्रताप महाजन को फंड प्रोवाइड करता था जो अभी टेबल पर मौजूद था।
और आखिरी पिलर यानी खुद प्रताप महाजन। अगर ये गिरा तो पूरा एम्पायर गिर जाएगा। भले ही वो रितेश को सब सिखा रहा है पर अभी ब्लैक कामों के बारे में रितेश को भनक तक नहीं है।
तो ये था महाजन एम्पायर की एक झलक…
फिलहाल हवेली में बहुत खुशी का माहौल था। हवेली के गेट के बाहर बहुत गाड़ियाँ थीं और गाड़ियों में कुछ लोग थे। ये सब गफूर के आदमी थे। गफूर हमेशा अपने साथ बहुत सारा बैकअप लेकर घूमता था।
प्रताप सबको अपने बेटे के शादी के बारे में बता रहा था तभी गफूर कहता है।
गफूर: आरे साहब वो सब तो ठीक है पर है कहाँ हमारी बहू।
प्रताप: रितेश जरा देखना बहू का हुआ या नहीं और हाँ उन्हें रसोई घर में एक बार देखने को कहो सब ठीक चल रहा है या नहीं।
रितेश: जी पापाजी…
तभी गफूर कहता है।
गफूर: आरे बैठो रितेश। बेटा आ जाएगी बहू रानी और रसोई का टेंशन न लो। खास हमने भेजा है आज कारीगर को जो कड़क बकरे की बिरयानी बनाता है…
गफूर की ये बात सुन के जमा हुए सब लोग हँसने लगते हैं।
तभी उन सभी लोगों को हल्की सी पायल की आवाज सुनाई देती है।
ऊपर सीढ़ियों से इस घर की बहू यानी अमृता आ रही थी।
प्रताप और रितेश को छोड़ के सबको अमृता को देखने की उत्सुकता थी। बड़ी मालकिन यानी प्रताप की बीवी के मरने के बाद अब अमृता ही इस घर की मालकिन होने वाली थी।
खास कर गफूर और डीसीपी मिश्रा अमृता की ओर आँखें लगा के देख रहे थे।
पैरों में चाँदी की पायल, एक गोल्डन कलर की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज, कानों में सोने के झुमके, होंठों पे गुलाबी लिपस्टिक, माथे पे गुलाबी बिंदी, गले में सोने का मंगलसूत्र जो अमृता की शादी की गवाही दे रहा था। हाथों की उंगलियों में सोने की अंगूठी जो उसकी खूबसूरती को बढ़ा रही थी और चेहरे पर कातिलानी मुस्कान।
अमृता को देख सभी के होश उड़ गए थे। महाजन खानदान को जंचे उससे भी ज्यादा खूबसूरती की मालकिन थी अमृता।
अमृता के ये रूप को देख गफूर के मुँह से हल्के से कुछ शब्द निकलते हैं जो कोई नहीं सुनता।
गफूर: अह लाजवाब… क्या खूबसूरती है… इसके सामने तो अप्सरा भी फीकी पड़ जाए।
सभी की नजरें अब अमृता पे टिकी हुई थीं। उसके आने से माहौल गरम हो चुका था। वातावरण में अमृता की खुशबू फैल चुकी थी जो सबको अमृता की खूबसूरती पर आकर्षित कर रही थी।
तभी रितेश खड़ा होता है और अमृता को कहता है।
रितेश: अह्म अमृता आओ तुम्हें सबसे इंट्रोड्यूस करवाता हूँ।
अमृता रितेश के बाजू में खड़ी हो जाती है।
रितेश बारी-बारी सबको इंट्रोड्यूस करवाता है। वहाँ कुल 6 लोग थे।
फिर अमृता सबको प्रणाम करती है और फिर रितेश और अमृता सबका आशीर्वाद लेती हैं।
प्रताप सबको खाने के लिए बैठने को कहता है।
नौकर और काम पे रखे सभी लोग उस टेबल पर दावत को सजाना चालू कर देते हैं। अमृता सब चीजों को अच्छे से मैनेज करने में मदद करती है।
कुछ ही देर में सब दावत का मजा लेते हैं।
दावत होने के बाद बाकी लोग अमृता और रितेश को बधाई दे कर निकल जाते हैं।
अब वहाँ सिर्फ गफूर और डीसीपी मिश्रा बचे थे जो प्रताप से कुछ डिस्कशन कर रहे थे।
पर गफूर की नजरें सिर्फ अमृता की खूबसूरती टटोलने में लगी थीं और उसकी खूबसूरती को देख गफूर की हालत खराब हो रही थी। उससे वहाँ रहा नहीं जा रहा था और निकलने का मन भी नहीं हो रहा था।
तभी प्रताप कहता है।
प्रताप: अरे गफूर तुम्हारे साथ जो लोग आए हैं उन्हें रसोई घर में खाना खाने के लिए भेज दो।
गफूर: जी साहब…
और फिर गफूर अपने मोबाइल से अपने करीबी रागा को कॉल लगाता है जो हवेली के बाहर 15 लोगों के साथ बैठा था।
गफूर का राइट हैंड और बाकी गुंडे लोगों का बाप यानी रागा जो उम्र से तो काफी बूढ़ा हो चुका था पर आज भी 10 लोगों को गिराने की ताकत रखता था। जिसको देख के भी कोई भी डर जाए और औरतों को घिन आ जाए ऐसा हुलिया। हमेशा उसको गांजा फुकने को चाहिए और रात को एक रांडी।
रागा: उम्र 65 पर बॉडी से अभी भी हट्टा-कट्टा और गंदा।
रागा गफूर का कॉल उठाता है।
रागा: जी जी मालिक अभी भेजता हूँ लड़कों को खाना खाने।
गफूर: अरे रागा तुम भी आ जाओ। साहब से मिलके भी हो जाएगा…
रागा: ठीक है मालिक।
यहाँ रितेश और अमृता बैठ के कुछ बात कर रहे थे और उनके ठीक सामने गफूर और प्रताप और मिश्रा बातें कर रहे थे।
तभी अमृता को हवा में अलग से गंध महसूस होती है जिससे उसको थोड़ा प्रॉब्लम सा लगता है।
ये गंध और किसी की नहीं रागा के बदन की थी। उसने फूंका गांजा की थी। अमृता पीछे मुड़ के देखती है तो उसे थोड़ा डर सा लगता है उस बूढ़े आदमी को देख। उससे लगता है कोई सड़क का गंदा भिखारी घर में घुस चुका हो।
पर वो सीधा जा के प्रताप के पैर छू लेता है और गफूर के बाजू में चुपचाप खड़ा हो जाता है।
अमृता रितेश को उस आदमी के बारे में पूछती है तभी सब निकलने की बात करते हैं।
सब खड़े हो जाते हैं और प्रताप को निकलने की बात करते हैं।
तभी रितेश कहता है।
रितेश: अरे अमृता सब वो मिठाई तो लाओ जो हमें लाई थी। सबका मुँह मीठा कराओ।
ये बात सुन के सब हँसते हैं और अमृता मिठाई का बॉक्स लाती है और खोल के पहले अपने ससुर यानी प्रताप को देती है।
अब उसकी चाल गफूर और उसके बाजू में खड़े रागा की तरफ जा रही थी।
अमृता की धीमी चाल और पायल से आता हुआ मधुर आवाज गफूर की ओर बढ़ रहा था। अमृता को आता देख गफूर की हालत खराब हो चुकी थी। उसके रोम-रोम में कुछ अलग सा महसूस हो रहा था।
इससे ज्यादा बुरी हालत तो रागा की हो रखी थी। मानो अमृता को देख उसका गांजे का नशा उतर चुका था। उसको यकीन नहीं आ रहा था कि कोई इतना भी खूबसूरत कैसे हो सकता है।
दोनों भी अमृता को देखे ही रहे थे कि अमृता उनके करीब जाके रुक जाती है और गफूर को मिठाई देती है। गफूर अपने हाथ आगे कर वो मिठाई ले लेता है।
गफूर: शुक्रिया बहू…
अमृता बड़े ही आदर भाव से कहती है।
अमृता: आरे चाचा उसमें शुक्रिया कैसा।
तभी अमृता और एक मिठाई लेते हुए रागा की ओर मुड़ती है और रागा को कहती है—
अमृता: लीजिए।
रागा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो ये सब पहली बार देख रहा था। इतनी बड़ी हवेली, जिनकी गुलामी करता है उसके घर में उसकी बहू और इस हवेली की होने वाली मालकिन ऐसे उसके सामने थी तो वो बस भूत की तरह खड़ा होकर अपने सामने की खूबसूरती को देखे जा रहा था।
अमृता का बदन थोड़ा सा पसीने से भीग गया था। उसके गर्दन पे पसीना था जिसके कारण उसकी गोरी-गोरी चमड़ी चमक रही थी और चेहरे पे गीलापन आने से उसकी खूबसूरती और निखर रही थी।
ये देख रागा का लंड उसके धोती में थोड़ा मचल जाता है और उसके बदन में एक अलग से कामुक भावना जाग जाती है।
अमृता रागा की तरफ मुड़ने के कारण गफूर को अमृता की पीछे की खूबसूरती को टटोलने का मौका मिलता है। वो अमृता का कसा बदन देख रहा था।
अमृता ने आज पूरी कसी हुई और कुछ न एक्सपोज हो ऐसे साड़ी पहनी थी पर फिर भी उसके कमर का गोरा भाग आसानी से दिख रहा था। वो देख गफूर भी थोड़ा अपना कामवासना का भाव जगा देता है।
बड़ी गदराई हुई गाँड पे चिपकी वो कसी हुई साड़ी गफूर के शरीर के तापमान को बढ़ा रही थी। वो उभार उसकी आँखों में घर कर चुके थे और वो नाजुक कमर उसके दिल में वार कर चुकी थी।
अमृता: लीजिए ना मुँह मीठा कीजिए…
अमृता फिर से एक बार बोलती है। इस बार रागा अमृता के लिप्स के मूवमेंट को देखता है कैसे बोलते वक्त उसके खूबसूरत होंठ एक-दूसरे को चिपक के एक अलग ही कामुक अंदाज बनाते हैं।
पर तभी रागा थोड़ा होश में आ जाता है और कहता है।
रागा: हा… हा दीजिए मेमसाब।
और अपना गंदा हाथ आगे करता है।
अमृता उसके हाथ पे मिठाई रख देती है।
और एक चीज नोटिस करती है रागा के हाथ काफी काले थे और उसपे जलने के और कुछ वार के भी निशान थे। उस हाथ पे काफी गंदगी थी मानो अभी कोयले की भट्ठी से निकाले हों।
मिठाई हाथ में मिलते ही रागा मन में कहता है।
रागा: (अह मुँह मीठा करने को कह रही है, इस मिठाई से, इससे ज्यादा तो मीठा इसका…)
तभी रागा अपने दिमाग से ये ख्याल निकाल देता है क्योंकि वो जिस अमृता के बारे में सोच रहा था उसका ससुर उन सबको पालता है।
तभी गफूर वहाँ से निकलने की बात करता है और अब सभी वहाँ से निकलने लगते हैं।
प्रताप और रितेश सबको हवेली के दरवाजे तक छोड़ देते हैं। अमृता अभी भी हॉल में ही थी।
गफूर: अरे… रागा मैं जहाँ बैठा था वहाँ मेरा मोबाइल रह गया। जाओ लेकर आओ।
रागा: जी जी मालिक…
प्रताप: हाँ जाओ लेकर आओ। अगर नहीं मिले तो एक रिंग देके देखो…
रागा झट से हॉल में जाता है तो देखता है अमृता वहीं सोफे पर बैठी हुई थी। किसी के आने की आहट से अमृता झट से सोफे से खड़ी हो जाती है।
वो रागा को आता देखती है…
रागा भी अमृता को देखता है और नजरें झुका के गफूर जहाँ बैठा था वहाँ जाके वो मोबाइल उठा लेता है।
रागा: जी ओ मेमसाब मेरे मालिक का फोन रह गया था इसलिए आया…
अमृता: कोई बात नहीं मिल गया ना।
रागा: जी जी मेमसाब।
और अमृता वहाँ से निकलती है और अपने रूम की तरफ चल देती है।
रागा भी वहाँ से निकलते हुए अमृता की खूबसूरती को पीछे से देखता है। वो अमृता को देखे ही रहा था कि अमृता पीछे मुड़ जाती है और कहती है।
अमृता: वैसे आपका नाम क्या है?
रागा: जी मेमसाब वो रागा…
अमृता: अच्छा ठीक है।
और हल्का सा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ती है।
रागा का लंड थोड़ा फिर से मचल उठता है क्योंकि उससे अमृता के बड़े-बड़े आमों का और गदराई हुई गाँड का अनुमान लगाना आसान हो गया था। वो कातिलानी अदा ऊपर से उभरे हुए बदन को देख वो थोड़ी देर के लिए वहीं खड़ा हो गया था।
उसकी आँखों के सामने अभी-अभी देखा हुआ कम्सिन बदन घूम रहा था। भले ही अमृता ने काफी संस्कारी तरीके से साड़ी पहनी थी जिससे किसी को कुछ देखने का चांस नहीं था पर वो कहते हैं ना जिसको जो देखना हो वो देख लेता है।
वैसे ही आज रागा ने अपने जीवन की सबसे खूबसूरत स्त्री को देख लिया था जो उसके औकात के काफी बाहर थी। रागा की आँखों के सामने अभी भी वो साड़ी में कसे हुए बड़े-बड़े स्तन घूम रहे थे। वो कसी हुई गाँड जो साड़ी को उभार बना के मर्दों को आकर्षित करने का काम कर रही थी।
अमृता जाने के बाद रागा भी वहाँ से निकल जाता है।
सब अपने-अपने घर निकल जाते हैं। गफूर रागा के साथ अपने स्लम में गाड़ियों के साथ एंट्री करता है।
गफूर को छोड़ के रागा अपने उसी स्लम के एक गंदे से घर में चला जाता है।
रात भर गफूर को नींद नहीं आती। उसे कोई बात सता रही थी। कुछ दृश्य उसकी आँखों के सामने आ रहे थे।
उसका लंड पूरा टाइट हो चुका था। क्या चल रहा था उसके ख्यालों में उसे ही पता पर उसके लंड में काफी दम था भले ही उम्र हो गई हो।
वैसे गफूर काफी हरामी इंसान था। उसका एक परिवार था। उसकी 2 बेटियाँ थीं और एक बेटा। उसकी बीवी इस दुनिया में नहीं थी पर गफूर को लड़कियों की कोई कमी नहीं थी। उसकी हर एक रात रंगीन होती थी। रागा के साथ मिलकर उसने कई रांडियों को चोदा था।
पर आज गफूर बदला-बदला सा लग रहा था। वो सो नहीं पा रहा था। अपनी करवटें बदल रहा था।
और तभी उसका हाथ अपने कड़े लंड पे जाता है और धोती के ऊपर से वो अपने लंड को मसलना शुरू कर देता है। उसका काला लंड नाग की तरह फनफना उठता है और वो अपने आप से बात करने लगता है।
गफूर: आआआह्ह्ह्ह क्या कमर थी उफ्फ्फ क्या रूप अह्ह्ह क्या कम्सिन बदन था मानो कोई जन्नत की हूर अह्ह्ह अप्सरा, अह्ह्ह मल्लिका फीकी है इसके सामने तो आआआह्ह्ह्ह क्या कसी हुई गाँड थी मर गया मैं।
उस रूम में फट-फट लंड को हिलाने की आवाज आ रही थी। गफूर सिसकियाँ ले रहा था और मानो 20 मिनट बाद वो अपनी चरम सीमा पे था। उसकी आँखों के सामने एक औरत थी जिसको सोच के वो अपने लंड को हिलाए जा रहा था।
उसके लंड के टोपे से गाढ़ा वीर्य निकलने लगा और उसकी के साथ फनफन करता हुआ लंड उस अप्सरा को सोच अपना वीर्य त्याग देता है।
और गफूर बूढ़े की एक ही आवाज उस रूम में गूंजती है।
गफूर: आआआह्ह्ह्ह अमृता आआआह्ह्ह्ह ये क्या कर दिया इस बूढ़े को तूने अह्ह्ह।
सुबह उठते ही गफूर रागा को कॉल लगाता है और तुरंत गफूर के घर आने को बोलता है।
रागा अपने मालिक का ऑर्डर सुनते ही पहुँच जाता है।
गफूर उसे गाड़ी में बिठा के स्लम के पीछे वाले एरिया में लेके जाता है।
दोनों में कुछ बातचीत होती है। आधा घंटा कुछ डिस्कस करने के बाद गफूर अपनी गाड़ी से एक पिस्टल निकालता है और उसे लोड करता है।
रागा थोड़ा दूर होकर खड़ा हो जाता है…
गफूर पिस्टल का निशाना रागा पे लगाता है और रागा अपनी आँख बंद कर लेता है।
गफूर झट से गन को शूट करता है और गोली सीधा जाके रागा के घुटने के ऊपर लग जाती है और उसकी चीख से पूरा सुनसान एरिया दहल जाता है।
दोपहर के 11 बजे:
डॉक्टर अमृता अपने केबिन में बैठी हुई हैं। हमेशा की तरह उसने कामुक साड़ी पहनी है।
तभी वार्डबॉय भागता हुआ आता है और अमृता से कहता है।
वार्डबॉय: मैडम एक इमरजेंसी केस है… पैर में गोली लगी है…
कहानी जारी रहेगी।