ये कहानी और इसके पात्र काल्पनिक हैं।
मधु: उम्र 27
रमेश: मधु का पति, उम्र 28
रानी: रमेश के बड़े भाई उमेश की विधवा, उम्र 30
निम्मी: उमेश और रानी की बेटी, उम्र 6
लीलावती: मधु की सास
लालचंद: मधु का ससुर
रामू: घर का नौकर, उम्र 45
कल्लू: घर का दूसरा नौकर (खेतों का काम देखने वाला), उम्र 38
कम्मो: घर की सफाई करने वाली, उम्र 38
रात का समय गाँव में पूरा सन्नाटा था। पूरा गाँव नींद की गोद में था। लालचंद की हवेली में भी सब सो रहे थे सिर्फ मधु को छोड़कर। अपने कमरे में बेड पर लेटी मधु सोने की कोशिश कर रही थी, करवटें ले रही थी। साथ में बेड पर लेटा उसका पति रमेश गहरी नींद में सोया था। पलट कर मधु अपना चेहरा रमेश की तरफ कर लेती है और उसे देखने लगती है और कुछ सोचने लगती है।
5 साल हो गए जब मधु इस हवेली में दुल्हन बनकर आई थी। कॉलेज पास आउट होते ही मधु के घरवालों ने अच्छे घर का रिश्ता देख उसके हाथ पीले कर दिए थे। करते भी क्यों न। पास के ही गाँव के सेठ लालचंद जी जिनका पास के शहर में हार्डवेयर का बहुत बड़ा काम था और उनके छोटे बेटे रमेश का रिश्ता मधु के साथ तय कर दिया गया था। रमेश तो वैसे +2 पास था पर काम अच्छा-खासा होने की वजह से मधु जैसी शहर के कॉलेज में पढ़ी-लिखी खूबसूरत लड़की उसकी किस्मत में लिखी थी। रमेश के घरवालों को भी मधु बहुत पसंद आई।
चंचल सुबह की मधु जिसने अभी कॉलेज पूरा ही किया था, उम्मीद नहीं थी उसको कि इतनी जल्दी उसकी शादी हो जाएगी। मधु आगे पढ़ना चाहती थी लेकिन घरवालों की जिद के सामने उसकी एक ना चली और उसको शादी के लिए हाँ करनी पड़ी। देखा जाए तो सब पैसे की माया थी। रमेश और मधु में बहुत फर्क था। कहाँ मधु पढ़ी-लिखी खूबसूरत गोरे रंग की थी और रमेश पढ़ा-लिखा भी कम था और रंग भी साँवला था। खैर इन सबमें सबसे ज्यादा खुश जो था वो रमेश ही था।
शादी के दिन पूरी हवेली को फूलों से सजाया गया था। धूम-धाम से शादी हुई दोनों की और मधु रमेश की पत्नी बनकर हवेली में कदम रखा था। रमेश की तरफ देखती मधु अपनी ससुराल में अपनी पहली रात को याद करने लगती है। कैसे उसका कमरा सजाया हुआ था। कमरे में अकेली बैठी अपने पति के आने का इंतजार कर रही थी। कुछ देर बाद रमेश को उसके दोस्त कमरे के दरवाजे के पास छोड़ने आए। मधु को साफ-साफ सुनाई दे रहा था कैसे रमेश के दोस्त रमेश को सुहागरात के बारे में बोल-बोलकर चिढ़ा रहे थे।
मधु को याद था कैसे जब रमेश कमरे में आया तो उसके दिल की धड़कन कैसे तेज हो गई थी। जैसे कि सहेलियों ने सिखाया था मधु दूध का गिलास रमेश को दिया और रमेश पूरा दूध गटक गया था। उसके बाद रमेश बेड पर आकर उसके रेशमी बालों से खेलने लगा था और धीरे-धीरे करके उसके आभूषण उतारने लगा था। कोई बात नहीं कि बस आते ही आभूषण उतारने लग गया था। मधु का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसकी साँसें मधु अपने चेहरे पे महसूस कर रही थी।
तभी रमेश अपने होठों को मधु के कोमल होठों से सटा दिया। मधु की जिंदगी में पहली बार था किसी मर्द ने उसके होठों का स्वाद चखा था। होठों का रसापन करते-करते ही मधु को रमेश के हाथों का दबाव अपने चूचियों पे महसूस होने लगा और वो सिकुड़ गई थी। जो भी हो रहा था बहुत जल्दी-जल्दी हो रहा था।
अगले ही पल रमेश ने उसे बेड पर लिटा दिया था और ब्लाउज खोलके ब्रा के अंदर कैद चूचियों को मसलने लगा था। मधु मदहोशी में खोने लगी थी। जवान लड़की पहली बार किसी मर्द के हाथों का स्पर्श पाकर उत्तेजित होने लगी थी। जल्दी ही उसके ब्लाउज और ब्रा ने उसका साथ छोड़ दिया था और रमेश उसकी गोरी चूचियों पे टूट पड़ा था।
मधु को पता था सुहागरात को क्या होने वाला था पर सब कुछ इतना जल्दी-जल्दी हो रहा था कि वो बस चुपचाप लेटी जो हो रहा था उसे होने दे रही थी। मधु को याद आया कि रमेश मुश्किल से एक मिनट ही उसकी चूचियों को चूसा होगा और फिर झट से उसकी साड़ी उतारने पे लग गया था। वो बेचारी शर्मा तो रही थी पर पति का साथ तो देना ही पड़ना था। जल्दी ही वो सिर्फ सफेद पैंटी में रह गई थी। उसने आँख उठाकर देखा तो रमेश उसकी जाँघों के बीच फँसी पैंटी को निहार रहा था।
मधु को शरमा जाती है और वो अपनी जाँघें आपस में समेट ली थी। पर रमेश इतना जोश में था कि उसने झट से उसकी जाँघें खोल दी थीं और पैंटी की इलास्टिक में हाथ डालकर उसे नीचे सरका दिया था। मधु को याद है कि उसने शर्माते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थीं। बिना बालों वाली चिकनी चूत देख रमेश से रहा नहीं गया और उसने अपने कपड़े भी उतार दिए थे। मधु ने हल्की सी आँख खोल देख तो रमेश अपना आखिरी अंगवस्त्र यानी कि अंडरवियर भी उतार रहा था।
अंडरवियर उतारने के बाद रमेश ने मधु की दोनों जाँघों को खोल दिया था और टिकटिकी लगाकर देखने लगा था। इसी बीच मधु की नजर रमेश के लंड पे पड़ी थी, पूरा टाइट हो रखा था और झटके खा रहा था। मधु पूरी तरह गरम थी और अपना कुंवारापन खोने को तैयार थी।
रमेश झट से उसके ऊपर आ गया था और उसे चूमने लगा था। रमेश बेतहाशा उसे चूमने लगा था। तब रमेश से रहा नहीं गया और मधु की जाँघें खोलके उसकी दोनों टाँगें अपनी जाँघों के दोनों साइड रखते हुए अपने लंड को उसकी कुँवारी चूत के समीप लाने लगा था। मधु की धड़कनें बढ़ गई थीं। आखिर वो टाइम आ गया था जब उसका कुँआरापन का रस कोई भँवरा पीने वाला था। रमेश अपने लंड को और पास लाया और मधु को चूत पे कुछ गरम सा एहसास हुआ। रमेश को अपने लंड पे चूत की गर्मी का एहसास हुआ तो वो पागल हो गया था।
मधु आँखें बंद किए रमेश के हाथों का खिलौना बन उसे जो दिल था करने दे रही थी। बस उस पल का इंतजार कर रही थी जब रमेश का लंड जो कि अभी चूत की दीवार को खोलकर उसकी गुफा में जाने लगे। रमेश ने मधु को बाहों में भरा उसकी जाँघों को अपनी जाँघों के ऊपर रखा जिससे मधु के चूतड़ थोड़े से ऊपर को उठ गए थे और चूत लंड के बिल्कुल रेंज में आ गई थी। रमेश ने अपनी कमर को हल्का-हल्का झटका देने लगा और फिर एक थोड़ा सा जोर का झटका दिया। उसका लंड फिसल कर नीचे की तरफ चूतड़ों की दरार में घुस गया था और गाँड के छेद से टकरा गया। मधु तड़प उठी और उसके मुँह से हल्की सी सिसकी निकली।
उसने आँख खोलकर देखा तो रमेश आँखें बंद किए था और उसका चेहरा टाइट हो रखा था और झड़ने लगा था। तभी मधु को अपनी जाँघों पे गीला-गीला सा कुछ महसूस हुआ। रमेश जोर-जोर की साँसें लेने लगा और हाँफने लगा था। मधु को कुछ समझ में नहीं आया था। आँखें खोल रमेश की तरफ देखती उसके मूव का इंतजार कर रही थी। रमेश आँखें खोलता है और कपड़ा उठाकर मधु की जाँघें साफ करने लगा था।
तब मधु को समझ आई थी कि रमेश खुद पे कंट्रोल नहीं कर पाया और बिना कुछ किए झड़ गया था। पर ये कैसे हो सकता था? मधु ने तो सुहागरात के बारे में बहुत सी बातें सुनी थीं सहेलियों से। पर उसकी सुहागरात तो वैसी नहीं गई थी। रमेश भी शायद शर्म का मारा चुपचाप साइड में होकर लेट गया था। तो ऐसी सुहागरात गई थी मधु की।
और आज का दिन है जब रमेश गहरी नींद में सो रहा है और मधु की आँखों में नींद का कोई नाम नहीं है। आज भी तो किया था उन दोनों ने पर हर बार की तरह रमेश उसे अधूरा छोड़ देता है। मिलन के नाम पर बस अपना लंड निकालकर उसकी चूत में पेलता है और शायद एक-आधे मिनट में ही झड़ जाता है। ऊपर से 5 साल हो गए थे कोई बच्चा भी नहीं हो पा रहा था। डॉक्टर से चेकअप करवाया तो रमेश के स्पर्म काउंट कम निकले थे। पिछले साल से दवाई चल रही थी। पर अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा था…………………….
रामू और कल्लू दोनों घर के पीछे बने तबेले के पास बने कमरों में रहते थे। हालाँकि रामू रात को घर के अंदर ही सोता था किचन में ही क्योंकि उसको ही बर्तन वगैरह साफ कर अंदर से घर को लॉक करना होता था। लेकिन दिन के टाइम वो अपने कमरे में होता था घर का काम खत्म कर। रामू के कमरे में से सिसकियों की आवाज आ रही थी।
कम्मो: आआह्ह धीरे करो ना……
रामू: अरे धीरे से करूँगा तो मालकिन के पास कैसे जाऊँगा।
कम्मो: हाँ तेरी मालकिन का क्या फायदा जब छोटा सा काम नहीं कर सकती।
रामू: (झटका लगाता हुआ) तुम बहुत लालची हो। थोड़ा सब्र रखा करो। कहीं भागे थोड़ी जा रही है वो।
कम्मो: तुम्हें उसके साथ बाँट रही हूँ। इससे ज्यादा क्या सब्र रखूँ।
रामू: हाँ ठीक है।
कम्मो: तो करियो ना बात आज भी तुम जाओगे मालकिन के पास।
रामू: करता हूँ। अभी जो कर रहा हूँ उसे खत्म कर दूँ पहले।
रामू कम्मो को अपनी बाहों में जकड़ता है धक्के मारने स्टार्ट कर देता है। थोड़ी ही देर में दोनों ठंडे पड़ जाते हैं। रामू अपनी धोती बाँधता है और खेत की तरफ निकल जाता है। कल्लू का काम सिर्फ खेतों और गाय-भैंस का था। उधर रामू का काम खाना बनाने से लेकर घर की औरतों की ड्राइवर का भी था। कम्मो घर की सफाई का काम करती थी। ये कम्मो की ही मेहरबानी थी या शैतानी दिमाग था कि उसने पैसे ऐंठने के चक्कर में रामू को रानी की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए बोला था और रानी को पटाने के लिए उसे पूरा सहयोग दिया था।
रानी तो कम्मो के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी थी। रामू भी खुश था कि उसे घर की खूबसूरत बहू को चोदने का अवसर मिल गया था वरना कहाँ वो अपनी कम्मो जैसी गाँव की अनपढ़ को ही भोग सकता था। पर अब तो रानी जैसी खूबसूरत औरत का साथ मिल गया था।
रानी दिल की बहुत अच्छी थी। उसे बेचारी को पता ही नहीं था कि कम्मो और रामू मिलकर उसे पैसे ऐंठने रहते हैं और ये सब इन दोनों ने प्लान से किया है। उसे नहीं पता था कि उसके पति के गुजरने के बाद उसकी तड़पती जवानी का फायदा कम्मो और रामू ने उठाया था। खैर जो भी था सब अपनी-अपनी जगह खुश थे। शादी के बाद रानी के जिस्म पे थोड़ी सी चर्बी बढ़ गई थी पर उसकी खूबसूरती पे कोई शक नहीं था। भरा-भरा जिस्म किसी ने तो भोगना ही था तो रामू के नसीब में ये काम आया था मानो।
रात का खाना सर्व हो रहा था। सभी फैमिली मेंबर्स खाना खा रहे थे। रामू सभी को जरूरत के हिसाब से खाना सर्व कर रहा था। उधर कल्लू अपना खाना खाके सो गया था। बस रामू ही था जो सबसे लेट सोता था और सबसे जल्दी उठता था। सबके खाना खाने के बाद रामू बर्तन साफ करता है और खुद खाना खाकर घर को लॉक वगैरह करने लगता है। जल्दी ही पूरे घर में शांति पसर जाती है। लालचंद और लीलावती ग्राउंड फ्लोर पे अपने कमरे में सो रहे थे। रानी की बेटी भी अपनी दादी के साथ ही सोती थी। ऊपर के फ्लोर में सिर्फ मधु और रानी थीं।
रामू पूरा काम खत्म कर देता है और किचन के फर्श पे कपड़ा डालके लेट जाता है। अब आधी रात हो चुकी थी। पूरे गाँव में सन्नाटा था। मधु अपने कमरे में रमेश की बगल में लेटी करवटें ले रही थी। उधर रानी बेड पर लेटी टीवी देख रही थी। पता नहीं क्यों अभी तक सोई नहीं थी। तभी रानी का दरवाजा खुलता है। दरवाजा खुलते ही सामने रामू खड़ा था। दोनों की नजरें मिलती हैं और रानी उसको देख मुस्कुराती है।
रानी के पास आते ही रामू उसके होठों का चुंबन लेता है और रानी भी उसके होठों पे किस करती है। रामू अब बेड पर रानी के बगल में आ जाता है। रानी के पीछे लेटकर रानी के कमर में हाथ डाल देता है। दोनों प्रेम के पुजारी लेटे-लेटे बातें करने लगते हैं। रामू बातें करते-करते साथ-साथ में अपने हाथ से रानी के जिस्म का जायजा लेने लगता है।
रामू: रानी जी वो मैंने आपसे कुछ काम बोला था।
रानी पलटकर उसकी तरफ देखती है।
रानी: जाना जरूरी है रामू?
रामू: आपको पता ही है घर के हालात। पिताजी बीमार हैं तो जाना ही पड़ेगा एक बार तो।
रानी उसकी आँखों में देखती है और कुछ सोचने लगती है। फिर वो अपना चेहरा उसकी छाती पे रख देती है। रामू का हाथ अपने हाथ में पकड़ उसकी उंगलियों से खेलने लगती है।
रानी: मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूँगी?
रामू: जान मैं जल्दी ही वापस आ जाऊँगा।
रानी: एक तुम ही तो हो जो इस अकेलेपन में मेरे साथ हो। तुम्हारे बिना कैसे ये रातें कटेंगी।
रामू: मैं भी क्या कर सकता हूँ। जाना तो पड़ेगा ही। चिंता मत करो। वहाँ से हम रोज़ फोन करेंगे आपको।
रानी चुप रहती है और रामू उसके बालों में हाथ फेरता-फेरता उसकी बैक की तरफ उसके चूतड़ों पे हाथ फेरने लगता है।
रानी: (झूठमूठ का नखरा करते उसका हाथ चूतड़ों से हटाते हुए) रहने दो। मेरा नहीं दिल कर रहा।
रामू: ऐसे नाराज मत हो मेरी जान।
रानी: नाराज ना होऊँ तो क्या करूँ। मेरी बिल्कुल भी फिकर नहीं है तुम्हें।
रामू: (फिर से उसके चूतड़ों पे हाथ फेरने लगता है) फिकर तो आपकी बहुत करते हैं पर मजबूरी भी तो समझे इस गरीब की।
रानी सिर उठा रामू की आँखों में देखती है और झूठ का गुस्सा दिखाती है।
रानी: तुम्हारी तो बीवी है घर पे। तुम तो चला लोगे। मैं क्या करूँगी।
रामू: बीवी तो है पर आपके जैसी खूबसूरत नहीं है। पल-पल आपकी याद आएगी।
रानी: झूठे।
रामू: सच में मेरी रानी।
रानी: खाओ कसम।
रामू: आपकी कसम। आपको बेइंतहा प्यार करते हैं हम।
दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते हैं और रानी आगे बढ़ अपने होठ उसके होठों पे रख देती है। दोनों एक-दूसरे के होठों को चूसने लगते हैं। कुछ देर बाद दोनों के होठ अलग होते हैं।
रामू: वो मैंने आपसे कुछ बोला था।
रानी: पता है मेरे राजा। तुम्हारा काम कर दिया है मैंने।
रामू: सच में?
रानी: हाँ। 10 हजार हैं पड़े ड्रॉअर में। जाते टाइम ले जाना।
रामू: पर मैंने तो 5 का बोला था।
रानी: पर मैंने अपनी जान के लिए 10 कर दिया। इतना प्यार जो करते हो मुझे।
रामू उसकी इस बात पे खुश हो जाता है।
रामू: आज तो आपने हमें खुश कर दिया रानी जी। अब मत तड़पाओ मुझे इस आग में।
और रामू दोबारा से रानी के होठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगता है और उसके हाथ रानी के चूतड़ों को सहलाने लगते हैं। जल्दी ही रामू रानी की नाइटी को उतार फेंकता है और रानी पूरी तरह नंगी हो जाती है। रानी भी उसकी छाती से चिपक कर उसके दिल की धड़कन को सुनने लगती है। रामू रानी को छाती से अलग करता है और दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए किस करने लगते हैं। रामू उसके दूध से भरे उभार देखता है और उनपे टूट पड़ता है।
रानी: आआह्ह्ह्ह…… धीरे से……
रामू दोनों उभारों को एक-एक करके मुँह में लेकर चूसने लगता है। रानी खुद पे कंट्रोल खोने लगती है। रामू के चूसने से उसकी निप्पल टाइट हो गई थीं। रामू दोनों उभारों का पूरा मजा ले रहा था। रानी भी आगे कदम बढ़ाती है और रामू के लंड को उसकी धोती के ऊपर से ही मसलने लगती है। दोनों बेतहाशा एक-दूसरे के प्यार में खोए हुए थे। रानी नीचे लेटे-लेटे रामू को अपने कपड़े उतारता देखती है। जल्दी ही रामू कपड़ों से बाहर होता है और उसका 8 इंच का लंड पूरा तना हुआ रानी के सामने आ जाता है।
रामू रानी की तरफ देखता है। दोनों मुस्कुराते हैं और रामू रानी के ऊपर टूट पड़ता है। दोनों चूचियों को बारी-बारी अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है और रानी उसके सिर को पकड़ चूचियों में दबाने लगती है। दोनों के जिस्मों की गर्मी बढ़ रही थी। रानी की चूत गीली हो गई थी। रामू ज्यादा देर ना करते हुए रानी की जाँघों को अलग करता है और उन दोनों के बीच बैठ जाता है। रानी बेसब्री से रामू के अगले मूव का इंतजार करने लगती है।
रामू लंड के सुपाड़े को चूत के मुहाने पे रखता है और जोर लगाता है। धीरे-धीरे पूरा लंड चूत में समा जाता है। रामू की जाँघें रानी की जाँघों से चिपक जाती हैं। दोनों प्रेमी एक-दूसरे से अपने होठ चिपका लेते हैं और खेल शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर होने लगता है। बीच-बीच में रामू जोरदार धक्का लगाकर रुक जाता है। जोरदार धक्के से रानी सिसक पड़ती है।
रानी: आआह्ह्ह्ह…… धीरे से राजा……
रामू: क्या करूँ मेरी जान तुम इतनी खूबसूरत हो। रहा नहीं जाता।
रानी: जान-जान भी बोलते हो और जान निकालने पे भी उतारू हो।
रामू: जान तो आपने मेरी ले रखी है।
एक और जोरदार धक्का लगता है……
रानी: आआह्ह्ह्ह…… क्या कर रहे हो। मार डालोगे मुझे।
रामू: सुनो मैंने तुमसे कुछ बोला था।
रानी: पता है जी। आपकी बात को कैसे भूल सकते हैं हम। अलमारी में पड़े हैं। जाते टाइम ले जाना।
रामू: आपको बुरा तो नहीं लगता ना बार-बार पैसे माँगने से।
रानी: नहीं मेरे राजा… नहीं लगता बुरा। मुझे तो बस तुम्हारा साथ चाहिए।
रामू: वो तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।
और रामू तीन-चार जोर से धक्के लगाता है जिससे रानी पूरी तरह हिल जाती है। रानी अपना चेहरा उठाकर रामू के होठों को चूम लेती है। रामू अब काम खत्म करना चाहता था। अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा देता है। रानी का नरम जिस्म रामू के सख्त जिस्म के नीचे रगड़ा जा रहा था। रानी अपनी टाँगों से रामू की कमर को घेरा बना लेती है। दोनों अंतिम चरण की तरफ बढ़ रहे थे। रानी के चूतड़ हवा में उठ जाते हैं और दोनों के अंगों का मिलन हवा में होने लगता है।
दोनों की साँस अटकने लगती है और रामू जोर से धक्का लगाता है और पूरा लंड चूत में पेल देता है और रानी को पूरी तरह जकड़ लेता है। लंड से वीर्य की पिचकारी छूटती है। उधर रानी भी अपना पानी छोड़ देती है। रामू दो-चार बार लंड आगे-पीछे करता है और अपने अंडकोष में भरा वीर्य पूरी तरह खाली कर देता है। दोनों प्रेमी ठंडे पड़ जाते हैं। घर की बड़ी बहू के कमरे में दोनों पूरी तरह नंगे थे। रामू अब धीरे से रानी के ऊपर से उठता है और बगल में लेट जाता है। रानी अपना सिर रामू की छाती पे रख लेती है और सोचने लगती है कि अगर रामू ना होता तो वो कैसे अकेले तड़प-तड़प कर इन रातों को काटती। दोनों प्रेमी एक-दूसरे को बाहों में भरकर नींद की गोद में चले गए।
आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।