Maa ke jism ki chahat story:- हाँ तो दोस्तों, ये मेरी पहली कहानी है। काफी स्टोरीज़ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मैं भी अपने किस्से आपको बताऊँ। दोस्तों, ये कोई मन से बनाई हुई सीधी सेक्स की कहानी नहीं है। मुझे उम्मीद है आपको पसंद आएगी।
अब मैं आपको बताता हूँ कैसे मैंने अपनी भोली खूबसूरत माँ की चुदाई की शुरुआत की।
Maa ke jism ki chahat story
मेरा नाम सुनील है और उम्र 20 साल। और मेरी माँ 37 साल की हैं, लेकिन अभी भी 28-29 साल की लगती हैं। उनके बूब्स 38 के होंगे, ये मुझे उनकी ब्रा देखकर पता लगा। और कमर है 25। पिताजी की डेथ के बाद हम घर में बस दो लोग ही रह गए थे।
माँ घर में अक्सर साड़ी ही पहना करती थीं। और साड़ी पहनते वक्त उनकी कमर और पेट दिखते थे। वो उन्हें ज्यादा कवर नहीं करती थीं। मैं भी शुरुआत में इतना ध्यान नहीं देता था, लेकिन एक दिन जब माँ के साथ बाहर सामान लेने गया।
माँ भी हमेशा की तरह साड़ी में थीं और उनका पेट और नाभि दिख रही थी। तो मैंने देखा सब माँ की नाभि और बूब्स की घूर रहे थे जैसे अभी खा जाएँगे। क्योंकि बाहर धूप में माँ की नाभि पर पसीने आ गए थे और वो और भी सेक्सी लग रही थीं। लेकिन माँ को ये सब पता नहीं था। और हम घर आ गए।
उस दिन से मुझे माँ के बारे में अजीब फीलिंग आने लगी। अब मैं भी घर में माँ की नाभि और पेट को घूरने लगा और कभी छूने की कोशिश भी करता। अब मैं कई बार उनके नाम की मुठ मार चुका था। और एक दिन मुझे माँ को छूने का मौका मिल गया।
उस दिन मैं सुबह उठा तो देखा माँ ने रेड कलर की साड़ी पहनी थी और किचन में नाश्ता बना रही थीं। उनकी कमर पीछे से दिख रही थी। मैंने सोचा अच्छा मौका है और थोड़ी सी हिम्मत करनी चाहिए। और मैंने पीछे से जाकर माँ की कमर में दोनों हाथ डाले और उनके पेट को पकड़ लिए। माँ थोड़ी शॉक हो गईं।
माँ: अरे क्या कर रहा है, चल छोड़ पागल।
और इतना कहकर माँ ने मेरा हाथ छुड़ाने लगीं। माँ के मुलायम पेट को पकड़ते ही मैं तो पागल हो गया। और मन ही मन सोच लिया कि अब तो माँ को चोदना ही है।
मैं: माँ तुम बहुत खूबसूरत हो।
मैंने फिर से माँ की नाभि पकड़ ली।
माँ: आज तुझे मैं अचानक कैसे खूबसूरत लगने लगी।
मैं: नहीं माँ, ऐसा नहीं है।
माँ: चल पागल, मैं कहाँ अब खूबसूरत हूँ। अब तो मेरी उम्र हो गई।
मैं: कहाँ माँ, तुम अभी भी 25 साल की लड़की को टक्कर देती हो।
माँ: सच में?
मैं: और क्या माँ।
माँ थोड़ी शर्मा गईं। और अब वो मेरा हाथ भी नहीं हटा रही थीं।
अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी। और मैंने थोड़ा सा माँ की नाभि दबा दी। मैंने देखा माँ अपने होंठ दबा रही थीं। पिताजी की मौत के बाद माँ को किसी मर्द ने पहली बार छुआ था।
मैं: माँ तुम्हारी नाभि बहुत सॉफ्ट है। क्या मैं इसे चूम सकता हूँ बस एक बार?
माँ थोड़ा सोचने के बाद मान गईं।
माँ: चल ठीक है, बस एक बार।
मैं: ओके।
और इतना कहते ही मैंने माँ के पेट में अपना मुँह घुसा दिया और उनकी नाभि चाटने लगा।
माँ: आhhh… ओह्ह… आराम से बेटा, मैं यहीं हूँ।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था। और मैंने माँ के पेट पर जोर से काट लिया।
माँ: आआआआ…
माँ ने मेरा सर अपनी नाभि में और घुसा दिया। माँ की नाभि पूरी लाल हो चुकी थी। और मेरा लंड भी पैंट में माल निकाल चुका था। और फिर मैं खड़े होकर माँ से जोर से लिपट गया और माँ के बड़े-बड़े बूब्स मेरी चेस्ट में धँस गए।
माँ: तू तो बहुत बदमाश हो गया है।
मैं: माँ आई लव यू।
माँ: आई लव यू टू बेटा।
माँ छूटने की कोशिश कर रही थीं, पर मैंने जोर से माँ को पकड़ रखा था। जिससे माँ चाहकर भी छूट नहीं पा रही थीं। मेरा एक हाथ माँ की कमर पर और माँ की गाँड पर था।
मैं: माँ एक बार और करने दो ना।
माँ: हट बदमाश, अब बाद में।
मैं: नहीं माँ, बस एक बार।
और मैंने फिर से माँ की नाभि में दाँत गड़ा दिए और उनका सफेद मुलायम पेट चाटने लगा बिल्कुल मलाई जैसा।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह बस कर बेटा, अब जान लेगा मेरी।
करीब 10 मिनट माँ की नाभि चूसने के बाद मैं हट गया। माँ भी शायद अब झड़ चुकी थीं क्योंकि उनकी साड़ी पर भी थोड़ा गीला हो गया था।
उस दिन मेरा खाता खुल गया था। पर अब मैं रुकने वाला नहीं था। वैसे तो माँ और मैं अलग कमरों में सोते थे। पर आज मैंने माँ के साथ सोने का प्लान बनाया। और मैं पजामा पहनकर माँ के बेडरूम में चला गया।
माँ: अरे आज तू यहाँ कैसे?
मैं: माँ आज से मैं तुम्हारे साथ सोऊँगा।
माँ: (थोड़ा शर्माते हुए) क्यों, अब तुझे अकेले नींद नहीं आती?
मैं: नहीं माँ, मुझे अकेले डर लगता है।
माँ: अच्छा, चल ठीक है।
माँ भी समझ चुकी थीं कि अब ये रुकने वाला नहीं है। और फिर हम दोनों बेड पर लेट गए। और माँ दूसरी तरफ मुँह करके लेट गईं।
मैं: माँ..
माँ: हाँ क्या हुआ?
मैं: माँ मैं तुम्हें पकड़कर सोऊँगा। मुझे डर लगता है।
माँ: अच्छा ठीक है, आजा।
और माँ मेरी तरफ मुड़ गईं। माँ साड़ी में थीं और उनके बड़े-बड़े चूचे साफ दिख रहे थे। मैं तो पागल सा हो गया और अपना मुँह उनके चूचों में देकर माँ से चिपक गया।
माँ: अब ठीक है?
मैं: हाँ माँ, अब ठीक है।
रात को 1 बजे मेरी आँख खुली तो मेरा लंड एकदम कड़क हो गया और साड़ी में से माँ की चूत की तरफ घुसा हुआ था। माँ तो सोई हुई थीं, उन्हें कुछ पता नहीं।
मैंने मौके का फायदा उठाया और माँ का पल्लू हटा दिया। अब उनके गोरे-गोरे चूचे बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थे। और अब तो आधा निप्पल भी माँ के ब्लाउज में से बाहर आ रहा था। फिर मैंने आव देखा न ताव और माँ के चूचों को चूमने लगा और उनके निप्पल को काट लिया। माँ नींद में थोड़ा सा चिल्लाईं फिर सो गईं।
सुबह उठा तो मैंने देखा कि मेरा लंड अभी भी खड़ा है और पजामे में से बाहर आ गया है। और माँ भी रसोई में थीं। तभी माँ कुछ लेने अंदर आईं और मैंने झट से अपना लंड अंदर किया। पर माँ ने शायद देख लिया था और वो हल्का सा मुस्कुरा भी रही थीं।
उसके बाद मैं उठा और सीधा किचन में गया और माँ का मुलायम पेट पीछे से पकड़ लिया।
माँ: आhhh… आhhh…
मैं: आई लव यू माँ।
माँ: आज तुझे डर नहीं लगा?
मैं: नहीं माँ, आज तुम साथ थीं ना। माँ अपना पल्लू हटाओ ना।
माँ: क्यों? (शर्माते हुए)
मैं: मुझे तुम्हारी नाभि चूमनी है।
माँ: नहीं अभी नहीं, बाद में।
मैं: नहीं मुझे अभी चाहिए। मैं थोड़ी तेज आवाज में चिल्लाया।
मैं वैसे ही माँ की कमर देखकर पागल हुआ जा रहा था।
माँ: अच्छा चल आज।
और माँ ने अपना पल्लू हटा दिया। और मैं भूखे भेड़िए की तरह उनकी नाभि पर टूट पड़ा। मैंने एक हाथ से उनका पेट भींच दिया और दूसरे से उनकी गाँड में उंगली करने लगा।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह आराम से बेटा, तेरी माँ हूँ मैं। अब बस भी कर।
आधे घंटे तक उनकी नाभि चूस-चूस कर पूरी लाल कर दी। और फिर मैंने…
और फिर कैसे मैंने अपनी माँ की नाभि का बुरा हाल करके उनका दूध पीके कैसे उनकी चूत फाड़ी, ये सब अपकमिंग पार्ट्स में। ये तो सिर्फ शुरुआत है।