Maa ko guitar bajate hui choda:- मेरा नाम राहुल है, उम्र 24 साल। मैं रामपुर गाँव में रहता हूँ। मेरे पापा शहर में जॉब करते हैं और महीने में सिर्फ 4-5 दिन घर आते हैं। मेरी माँ वंदना (44 साल) बहुत सुंदर है – गोरी रंगत, लंबे काले बाल जो हमेशा चोटी में बँधे रहते हैं। बड़ी नरम आँखें और एक मैच्योर, भरी-भरी जवानी (38-30-40)। वो हमेशा साड़ी में रहती हैं और बहुत शर्मीली हैं।
Maa ko guitar bajate hui choda
मैं गिटार बहुत अच्छा बजाता हूँ। एक दिन माँ ने मुझे देखते हुए कहा—
माँ- राहुल बेटा, तू गिटार इतना अच्छा बजाता है। मुझे भी सिखाना। मैं अकेली रहती हूँ, टाइम पास हो जाएगा।
मैं मुस्कुराया और बोला—
मै- ठीक है माँ, मैं आपको सिखाऊँगा। लेकिन रोज प्रैक्टिस करनी पड़ेगी। और करीब बैठना पड़ेगा।
उस दिन से हर शाम 7 बजे माँ ड्राइंग रूम में गिटार सीखने बैठती थीं। माँ ने क्रीम रंग की लाइट कॉटन साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज टाइट था, चूचियों का उभार हल्का सा दिख रहा था और दुपट्टा थोड़ा ढीला था।
पहले दिन मैं उनके सामने बैठ गया। उन्होंने गिटार पकड़ा। मैंने उनके हाथ को पकड़कर पहला कॉर्ड दिखाया। मेरी उँगलियाँ उनकी उँगलियों से टकरा रही थीं। माँ ने हल्की सी सिसकारी ली—
माँ- बेटा… तेरी उँगलियाँ बहुत गरम हैं।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा—
मै- माँ, गिटार सीखने के लिए हाथ पकड़ना पड़ता है। आप रिलैक्स रहो।
दूसरे दिन मैं उनके पीछे बैठ गया। माँ गिटार पकड़कर बैठी थीं। मैंने उनके दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया और उनके पीछे से गाइड करने लगा। मेरा सीना उनकी पीठ से लग गया। माँ की साँस थोड़ी तेज हो गई।
मै- माँ, ये कॉर्ड ऐसे बजता है।
मैंने उनके कान के पास धीरे से कहा। मेरी साँस उनकी गर्दन पर पड़ रही थी। माँ ने धीरे से कहा—
माँ- राहुल बेटा… तू इतना करीब बैठता है तो माँ को गरमी लग रही है।
मैंने मुस्कुराते हुए उनकी कमर पर हाथ रख दिया और बोला—
मै- माँ, गिटार के लिए ऐसे ही बैठना पड़ता है। आप टेंशन मत लो। मैं आपको धीरे-धीरे सिखाऊँगा।
तीसरे दिन माँ ने एक स्लो रोमांटिक गाना बजाने की कोशिश की। जब वो गलती से गलत कॉर्ड बजती थीं, मैं उनके हाथ को पकड़कर सही पोजीशन दिखाता था। इस बार मेरा हाथ उनकी कमर से ऊपर बढ़ गया और ब्लाउज की साइड से उनकी स्किन छू गया।
माँ का बदन काँप गया। उन्होंने धीरे से कहा—
माँ- बेटा… तू मेरा बेटा है… इतनी क्लोजनेस… माँ को बहुत अजीब लग रहा है।
लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया। मैंने उनके कान में धीरे से कहा—
मै- माँ… आप औरत भी हो। आप बहुत अकेली रहती हो। गिटार के बहाने हम दोनों के बीच थोड़ी क्लोजनेस हो सकती है ना? आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?
माँ शर्माकर नीचे देखती रहीं। उनकी साँस तेज हो रही थी। मैंने उनका पल्लू थोड़ा साइड में किया और उनकी कमर पर हाथ फेरने लगा। माँ सिसकारी भर उठीं—
माँ- आआह्ह्ह… राहुल बेटा… मत कर… माँ तेरी माँ है…
मैंने उनके कान में गहरी आवाज में कहा—
मै- माँ… आपकी ये गीली साँस… आपकी ये नरम कमर। मैं देख सकता हूँ आप कितनी तड़प रही हो। गिटार सिखाने के बहाने मैं आपको वो प्यार दे सकता हूँ जो आपको चाहिए।
माँ का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने धीरे से कहा—
माँ- बेटा… ये गलत है, लेकिन माँ बहुत तड़प रही है। तू मेरा बेटा है, लेकिन आज रात तू माँ को गिटार के अलावा कुछ और भी सिखा सकता है।
उस रात ड्राइंग रूम में सिर्फ टेबल लैंप की हल्की, पीली रोशनी थी। माँ की क्रीम साड़ी अभी भी थोड़ी गीली थी और बदन से चिपक रही थी, जैसे वो खुद ही मेरा इनविटेशन बन गई हों। गिटार साइड में पड़ा था। मैं माँ के बिल्कुल पास बैठ गया था। माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से, साँस रोककर बोलीं—
माँ- राहुल बेटा… माँ को बहुत अकेलापन लगता है। तू मुझे गिटार सिखाने के बहाने इतना करीब आता है। माँ को अच्छा लग रहा है, लेकिन ये गलत भी लग रहा है। दिल में कुछ और हो रहा है।
मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया। उनकी आँखें शर्म से भरी हुई थीं, लेकिन उसमें एक गहरी प्यास भी चमक रही थी। मैंने धीरे से उनके होंठों पे किस कर दी। पहला किस बहुत सॉफ्ट था – जैसे कोई कोमल स्पर्श। माँ पहले थोड़ी हटीं, लेकिन फिर उन्होंने भी आँखें बंद करके मेरे होंठों से लिपट लिया। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे से धीरे-धीरे उलझने लगी। किस में माँ की गरम साँस मेरी साँस से मिल रही थी, उनके होंठों की नरमी मुझे पागल कर रही थी।
किस के दौरान मेरा हाथ उनकी कमर से धीरे से ऊपर बढ़ा। मैंने ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियों को बहुत धीरे, प्यार से दबाया – जैसे उन्हें समझना चाहता हूँ। माँ सिसकारी भर उठीं, उनकी आवाज में एक मधुर सी तड़प थी—
माँ- आआह्ह्ह… राहुल बेटा… और धीरे… माँ की चूचियाँ बहुत सेंसिटिव हो रही हैं… आआह्ह्ह… तू उन्हें प्यार से छू रहा है ना?
मैंने उनका ब्लाउज के सारे हुक एक-एक करके खोल दिए। दोनों बड़ी, गोल, नरम चूचियाँ बाहर आ गईं। उनके निप्पल्स पहले से ही टाइट और खड़े हो चुके थे, जैसे मेरा टच उन्हें बुला रहा हो। मैंने एक निप्पल को अपनी जीभ से धीरे से छुआ। फिर मुँह में लेकर बहुत धीरे चूसने लगा – जीभ से घुमाता हुआ, कभी हल्का सा काटता हुआ, कभी सिर्फ जीभ की टिप से सहलाता हुआ। दूसरी चूची को हाथ से प्यार से मसलता रहा, उँगलियों से निप्पल को धीरे से खींचता रहा।
माँ तड़प उठीं, उनकी कमर ऊपर उठ रही थी। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए और धीरे से कहा—
माँ- हाँ बेटा… और प्यार से चूसो… माँ की चूचियाँ तेरी हैं आज। उन्हें जीभ से सहलाओ… काटो हल्का सा… माँ को दर्द के साथ मजा आ रहा है… आआह्ह्ह… दूसरी भी मत भूलना।
मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी प्यार से चूसा, जीभ से चटखारते हुए घुमाया, हाथों से उनकी नरमी को फील किया। माँ की साँस बहुत तेज और गरम हो रही थी। उनकी टाँगें काँप रही थीं और वो सोफा पर लेटी हुई तड़प रही थीं, जैसे हर स्पर्श उनकी रूह तक पहुँच रहा हो।
मैंने माँ को सोफा पर लिटाया। उन्होंने साड़ी की नाड़ी खोली और पैंटी नीचे कर दी। माँ की चूत अभी से पूरी तरह गीली, चमकती हुई थी। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी टाँगें धीरे से फैलाईं और अपनी जीभ से चूत चाटनी शुरू कर दी – पहले ऊपर से नीचे तक बहुत धीरे लिक किया, फिर क्लिट को मुँह में लेकर हल्के-हल्के चूसने लगा। कभी जीभ अंदर डालकर धीरे अंदर-बाहर करता।
माँ जोर से तड़प उठीं, उनकी आवाज में एक मधुर सी चीख थी—
माँ- आआह्ह्ह… राहुल बेटा… और अंदर… चाटो मेरी चूत प्यार से… जीभ अंदर डाल दो… आआह्ह्ह… बहुत तड़प रही थी मैं। आज तू ही मेरी प्यास बुझा दे… और धीरे… माँ को हर पल फील करने दे…
माँ ने मेरे बाल पकड़कर चूत को मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं। मैंने जीभ अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। कभी क्लिट को जीभ से सहलाता। कभी पूरा मुँह लगाकर चूसता। माँ की कमर ऊपर उठ रही थी। थोड़ी देर में माँ जोर से काँप उठीं और पहली बार झड़ गईं। उनका गरम, मधुर रस मेरे मुँह में आ गया।
मैंने उनकी चूत को अच्छे से चाटकर साफ कर दिया, हर बूँद को टेस्ट किया। फिर मैंने अपना मोटा, लंबा और खड़ा लंड बाहर निकाला। माँ ने उसको देखकर शर्मा गईं, लेकिन आँखें हटा नहीं पा रही थीं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाया और लंड को पकड़ लिया, उसकी गरमी को फील करते हुए।
माँ- बेटा… इतना मोटा और गरम… मेरी चूत में कैसे जाएगा? लेकिन आज मै चाहती है कि तू धीरे-धीरे अंदर डाल ही दे।
मैंने माँ को घुमाकर डॉगी स्टाइल में किया। उन्होंने पीछे से लंड को चूत के मुँह पर रगड़ा। मैंने धीरे से अंदर घुसा दिया – पहले सिर्फ सुपाड़ा, फिर धीरे-धीरे पूरा।
माँ चीख उठीं, उनकी आवाज में दर्द और मजा दोनों था—
माँ- आआआह्ह्ह… बेटा… बहुत मोटा है… फट रही है तेरी माँ की चूत… धीरे… आआह्ह्ह… पूरा अंदर डाल दे… अपनी माँ को फील होने दे हर इंच…
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे, हर धक्के के साथ माँ की गाँड हिल रही थी और चूचियाँ लटक रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़कर स्पीड धीरे बढ़ा दी। हर धक्के के साथ माँ की आवाज मधुर होती गई—
माँ- आआह्ह्ह… राहुल बेटा… और गहरा… फाड़ दो मेरी चूत… चोद मुझे प्यार से… मै तेरी हूँ आज… गिटार के बहाने तू मुझे वो प्यार दे जो मुझे चाहिए था… और गहरा… मेरी रूह तक पहुँचा दो।
मैंने माँ को घुमाकर अपने ऊपर बिठा लिया। माँ ऊपर-नीचे हो रही थीं, उनकी चूचियाँ जोर से हिल रही थीं। मैंने नीचे से हिप्स उठा-उठाकर धीरे-धीरे धक्के मारे। कभी उनकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसता। कभी उनकी कमर पकड़कर गहरे धक्के मारता। माँ अब खुलकर मोअन कर रही थीं, उनकी आवाज में एक मधुर सी चीख थी—
माँ- हाँ बेटा, और तेज… लेकिन प्यार से… अपनी माँ की चूत फाड़ दे… आआह्ह्ह… तू मेरा बेटा है… लेकिन आज तू माँ का मर्द बन गया। चोद मुझे जैसे पति नहीं चोदता… अंदर ही झाड़ दो… माँ को अपना माल दे दो।
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। हर धक्के के साथ माँ की चूचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। लास्ट में मैंने माँ के अंदर ही गरम माल भर दिया। माँ जोर से काँप उठीं, उनकी चूत मेरे लंड को टाइटली पकड़ रही थी और वो मेरे साथ ही झड़ गईं। दोनों के शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए काँप रहे थे।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेट गए।
माँ ने मेरे सीने पे सर रखकर धीरे से कहा—
माँ- राहुल बेटा… ये बहुत गलत था… लेकिन माँ को बहुत सुकून मिला। तू मेरा बेटा है। लेकिन आज रात तू माँ का मर्द बन गया।
मैंने उनके माथे पे किस किया और बोला—
मै- माँ… अब हर शाम गिटार प्रैक्टिस होगी। और प्रैक्टिस के बाद ये भी, जब तक आप चाहें।
माँ शर्माकर मेरे सीने में मुँह छुपा लिया।