Talak ke baad bhai se chudai karwayi:- हाय दोस्तों, मैं एक बार फिर हाजिर हूँ आपसे अपने पड़ोस की घटना को लेकर। आप जानते हैं कि मैं कहानी नहीं लिखती, मैं आँखों देखी सुनाती हूँ। तलाक के बाद क्या-क्या होता है या हो सकता है, मैं जान गई अपनी सहेली पूजा से। दरअसल पूजा मेरी सहेली नहीं बल्कि बड़ी बहन जैसी है, लेकिन सेक्स या सेक्सी बातों के मामले में वो मेरी पक्की सहेली है। वो मुझसे 3 साल बड़ी है, यानी 24 की। ब्रा पहनती है 32 की और 5’4” की स्लिम-सी गोरी-चिट्टी सुंदर लड़की है।
थोड़ा उसका फैमिली-बैकग्राउंड बताना जरूरी है, तभी सारी घटना समझ में आएगी। पूजा की शादी करीब 1 साल पहले सिवान में मुकेश के साथ हुई, साथ ही पूजा के भाई पंकज (जो उससे 2 साल बड़ा है) की शादी मुकेश की बहन मोनी से हुई। ये शादी म्यूचुअल थी जो एक ही दिन पटना में हुई थी। पूजा के फादर डुमराँव में नौकरी करते हैं और उसकी मम्मी कभी पटना कभी डुमराँव आती-जाती रहती हैं। पूजा और पंकज दोनों भाई-बहन पटना में रहते हैं। पंकज एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है, साधारण परिवार है।
Talak ke baad bhai se chudai karwayi
शादी के 2-3 महीने बाद पूजा को एहसास हुआ कि मुकेश का संबंध उसकी बड़ी भाभी से है जो कम से कम 40 साल की होगी। पूजा ये सोचकर खामोश रही कि उसकी टाइट बूर का मजा मिलने के बाद मुकेश खुद ही उसकी चूचियों में दबकर रह जाएगा और भाभी की मोटी और ढीली-ढाली बूर से निकल जाएगा। यही सोचकर उसने कॉम्प्रोमाइज कर लिया। लेकिन उस दिन तो हद हो गई जब उसने एक शाम मुकेश को भाभी के कमरे से निकलते देखा और पीछे से भाभी की 18 साल की बेटी नैना अपने सलवार का नारा बाँधती हुई बाहर आई।
उस दिन मुकेश और पूजा में जमकर झगड़ा हुआ और फाइनली दूसरे दिन पूजा मुकेश का घर छोड़कर वापस मायके यानी पटना आ गई। अब पटना में धीरे-धीरे ननद-भौजाई में खींच-खीच होने लगा और आन में आकर पंकज ने भी मोनी को उसके मायके सिवान भेज दिया। पिछले 9-10 महीने से दोनों जोड़ी तलाक का केस लड़ रहे हैं। दोस्तों, अब आती हूँ उस मजेदार पहलू पर जिसके लिए हर बूर और लंड पानी छोड़ता है।
गुस्से या आन में ये लोग अलग-अलग तो हो गए लेकिन उस बूर या लंड का क्या जिसे चुदने या चोदने की लत लग गई थी। मुकेश और मोनी का हाल तो मैं नहीं जानती, पर मेरी सहेली पूजा की हालत देखकर तो मुझे बहुत दुख होता था। तलाक के वायरस ने दोनों भाई-बहन को खामोश कर दिया था। काम से लौटने के बाद उसके पंकज भैया अपने कमरे में सेक्सी किताब पढ़ने या फिर कंप्यूटर पर बीएफ देखने में मशगूल हो जाते और बेचारी पूजा बेड पर लेटकर छत निहारा करती थी। फिर एक दिन मैंने उसकी उदास जिंदगी में कुछ रंग भरी। एक दोपहर मैं पूजा के घर आई और उसे बहलाने के ख्याल से बोली—
सीमा: पूजा दी, तेरे भैया तो देर रात तक कंप्यूटर पर बीएफ देखते रहते हैं, मैं अपने रूम से देखी हूँ। चल ना आज एक बीएफ देखते हैं।
पूजा दी हिचकिचा रही थीं लेकिन मैं जबरदस्ती उसे पंकज भैया के कमरे में ले गई और कंप्यूटर ऑन करके बीएफ चालू कर दी। देखते-देखते हम दोनों गरम हो गए और करीब 10 महीनों के बाद मैंने पूजा दी के बूर का रस निकालकर राहत दिलाई। हाँ भैया, उसने भी मेरी चूत चाटी और मेरा भी मन हल्का हो गया। अब आगे का हाल पूजा की जुबानी बताती हूँ, जैसा उसने मुझे बताया—
भाई को सेड्यूस करने का पहला दिन। एक स्लिप देकर बोली—
पूजा: भैया, ये सामान जल्दी ला देना, जरूरी है।
दरअसल उसमें नैपकिन-पैड लिखकर दी थी। पंकज भैया ने स्लिप देखा और आश्चर्य से मुझे देखने लगे। मैं किचन में चली गई। थोड़ी ही देर में भैया वापस आए। मैं उनके कमरे में झाड़ू लगा रही थी। मेरे हाथ में काला पॉलीथीन देते हुए बोले—
पंकज: पूजा, ये लो तुम्हारा सामान।
चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया भैया ने। मैं वहीं पर पैकेट खोलकर देखने लगी, फिर बोली—
पूजा: ये छोटा वाला पैकेट ले आए? बड़ा वाला लाना था ना। आज-कल मेरा पीरियड 4 दिन चला जाता है और ब्लीडिंग भी ज्यादा होता है।
मैं शर्माती हुई धीरे-धीरे बोल रही थी, नजरें झुकाकर। भैया बिना कुछ बोले बाहर चले गए। मैं उनके कमरे में बेड पर पड़ी चुदाई की किताबों को समेटकर टेबल पर रख दी और नहाने चली गई। सचमुच उस दिन मेरा पीरियड आने वाला था। मैं जान-बूझकर भैया का अंडरवियर पहनकर उनका लाया पैड लगा ली, साथ ही उनका बाकी 2-3 अंडरवियर भी छुपा दी।
दूसरे दिन नहाने के बाद भैया टॉवल में अपने कमरे में गए तो ढूँढ़ने पर भी उनका कोई अंडरवियर नहीं मिला। वो मुझे आवाज देकर बोले—
पंकज: पूजा, तुमने मेरा अंडरवियर रखा है क्या?
मैं झट से अपने रूम से निकली और बोली—
पूजा: नहीं भैया, मैं तेरा अंडरवियर क्यों रखूँगी। हाँ एक मैं पहनी हूँ, ये वाला।
मैं कुर्ता उठाकर और सलवार को कमर से सरकाकर उसके अंडरवियर का ऊपरी हिस्सा दिखाकर बोली। पंकज भैया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बोले—
पंकज: तू मेरा अंडरवियर पहनी हो……
पूजा: वो क्या है कि मेरी तीनों पैंटी गीली थीं और बिना पैंटी के पैड कैसे रखती……
मैं सर झुकाकर निकल गई।
सेडक्शन का दूसरा स्टेप। मेरा पीरियड दो ही दिनों में बंद हो गया। तीसरे दिन सुबह के 8 बजे भी जब मैं अपने रूम से नहीं निकली तो भैया अंदर आए। मैं बेड पर पेट के बल लेटी थी, केवल नाइटी में थी और वो भी ठेहुने के ऊपर तक उठा था। मेरी गोरी-गोरी चिकनी टाँग चमक रही थी। भैया ने पूछा—
पंकज: क्या हुआ पूजा? तबियत ठीक है तो? खाना कब बनाओगी? ऑफिस जाना है।
पूजा: कमर में बहुत दर्द हो रहा है भैया, जरा दबा दोगे?
मैं कराहते हुए बोली। कुछ देर तक तो भैया खामोश रहे, फिर बाहर चले गए, फिर तुरंत वापस आए और बिना कुछ बोले धीरे-धीरे मेरा कमर का ऊपरी हिस्सा दबाने लगे।
पूजा: थोड़ा नीचे दबाओ…… और नीचे…… और नीचे।
इस तरह भैया मेरी गाँड का ऊपरी हिस्सा दबाने लगे। जवान होने के बाद पहली बार भैया मुझे इस तरह टच कर रहे थे। और फिर करीब 10-11 महीनों से मैं अनचुदी थी। मेरी साँस तेज हो गई। मैं महसूस कर रही थी कि भैया की साँस भी तेज हो रही थी। मेरे कोमल गाँड का स्पर्श उन्हें भी उत्तेजित कर रहा था। फिर मैं चित लेट गई और भैया चेहरा घुमाकर रुक गए। मेरा सेक्स जाग गया था। धीरे से बोली—
पूजा: थोड़ा जाँघ भी दबा दो ना, प्लीज।
इस बीच नाइटी और ऊपर सरका ली। अब मेरा आधा जाँघ दिख रहा था। भैया हिचकिचाते हुए ठेहुने से थोड़ा ऊपर दबाने लगे। डायरेक्ट टच से मेरी साँस और तेज हो गई।
पूजा: थोड़ा ऊपर दबाओ…… और ऊपर…… और ऊपर…… थोड़ा और।
जैसे ही भैया की उँगली नाइटी के ऊपर से ही मेरी बूर में सटी, वो तेजी से उठकर बाहर चले गए और मैं गुनगुनाकर रह गई। भैया का क्या हाल था पता नहीं।
उस दिन संडे था। भैया अपने कमरे में लेटकर चुदाई का फोटो देख रहे थे, केवल लुंगी और बनियान में। मैं नाइटी को काफी ऊपर उठाकर कमर में बाँध ली और झाड़ू लेकर उनके रूम में गई। भैया ने किताब छुपा लिया। दीवारों पर लगे जालों को साफ करने लगी। इसी क्रम में मैं उनके बेड पर चढ़कर छत का जाला साफ करने लगी। झाड़ू ठीक से छत में टच नहीं कर रहा था। मैं थोड़ा उछलने लगी और एक बार जान-बूझकर गिर गई। गिरी तो मेरी गाँड सीधे उनके लंड पर पड़ी और नाइटी कमर तक सरक गया।
हालाँकि भैया मेरी बूर नहीं देख पाए लेकिन उनके ऊपर मैं आधी नंगी हुई ये तो देख ही लिए। मैं फटाफट उठ गई और सॉरी बोलकर दूसरी ओर झाड़ू लगाने लगी। तिरछी नजर से देखी कि भैया का लंड खड़ा होने लगा। भैया आँखें फाड़कर मुझे देख रहे थे। दोबारा मैं उनके बेड के पास जमीन पर झाड़ू लगाने लगी। बड़े गले वाले नाइटी के अंदर बिना ब्रा की चूचियाँ हिल रही थीं और भैया का दिमाग भी मेरी चूचियों के साथ हिलने लगा।
उसी दोपहर को मैं अपने रूम में बेड पर लेटकर भैया की ही एक चुदाई वाली किताब पढ़ रही थी। भैया कमरे में आए। बदन पर बनियान नहीं था, केवल लुंगी और वो भी फ्रंट-ओपन। लुंगी के ऊपर से ही हिलते हुए लंड की लंबाई जान सकती थी। वो मेरे पैर की ओर बैठ गए। मैं पैर मोड़कर ऐसे बैठी कि उन्हें मेरी बूर के दर्शन हो जाएँ। भैया की नजर काले बालों से घिरी बूर पर पड़ी तो चेहरा घुमाकर बोलने लगे—
पंकज: अच्छा पूजा ये बताओ कि कोर्ट में ये कैसे प्रूव करोगी कि मुकेश का संबंध उसकी भाभी और भाभी की बेटी दोनों से है। मेरा मतलब, तूने क्या देखा था?
मैं एक बहुत ही मजेदार चुदाई का किस्सा पढ़ रही थी। मेरी बूर वैसे ही गीली हो रही थी। मैं गोद में रखी किताब देखती हुई बोली—
पूजा: भैया, मुकेश को बड़ी भाभी के साथ तो मैं रेड हैंड देख चुकी थी। उस दिन जब वो भाभी की बेटी नैना के साथ उनके रूम थे मैं देखी कि मुकेश नैना को गले लगाकर……
पंकज: क्या कर रहा था?
पूजा: नैना के कुर्ते के अंदर हाथ डाले हुए था और होठों को……
पंकज: फिर क्या किया मुकेश ने?
पूजा: फिर नैना ने मुकेश का बरमुडा सरका दिया और उसे मुँह में लेकर……
पंकज: फिर?
पूजा: फिर मुकेश ने नैना का कुर्ता उतार दिया और उसकी छाती से मुँह लगा दिया……
पंकज: और क्या देखी?
अब भैया कोहनी के बल आधे लेट गए, कुछ ऐसे कि उनका चेहरा मेरे दोनों पैरों के बीच था, यानी वो नजदीक से मेरी बूर देख रहे थे बल्कि उससे निकलने वाली मदहोश खुशबू भी ले रहे थे। मैं आगे बताने लगी—
पूजा: और क्या, वही हुआ जो होता है। मुकेश ने नैना को बेड पर पटक दिया और लगा सटा-सट ठोकने……
पंकज: फिर तूने मुकेश से बाद में पूछा तो वो क्या बोला?
पूजा: कुछ नहीं।
अचानक भैया गुस्से से आग बबूला हो गए और जोर-जोर से बोलने लगे—
पंकज: वो बहनचोद क्या बोलेगा। भाभी को चोदता है। उसकी बेटी को चोदता है। क्या पता साला अपनी बहन मोनी को भी चोदता होगा। सारा खानदान ही चुदाक्कड़ है। मादरचोद है वो साला। अच्छा हुआ तू आ गई वरना तेरी बूर में भी कैंसर हो जाता। अभी मुझे मिल जाए तो साले के मुँह में मूत दूँगा।
कहते हुए भैया ताव में सचमुच अपना लंड निकालकर मेरे मुँह में सटाने लगे। मैंने उनका लंड हाथों से पकड़ा और धीरे से बोली—
पूजा: भैया, शांत हो जाओ। क्यों अपना खून जलाते हो। मरने दो सालों को। अब वो अपनी भाभी को चोदे, बेटी चोदे या अपनी बहन के बूर में लंड पेलते रहे, हमें क्या……
मैं बेड पर ठीक से बैठ गई। भैया शांत होते हुए मेरे पास आए और प्यार से मेरा सर अपनी छाती से लगाते हुए बोलने लगे—
पंकज: सालों ने मेरी पूजा बहन को तड़पाया है, उनको छोड़ूँगा नहीं।
फ्रंट-ओपन लुंगी से लंड निकालकर मेरी ठुड्डी को सहला रहा था। मैं भैया झांटों की खुशबू लेने लगी। मैंने भी भैया को कसकर पकड़ लिया और पैर नीचे सरकाकर उनके पैरों में रगड़ने लगी। कोई 2-3 मिनट हम लोग यूँ पड़े रहे। फिर मैं खड़ी हो गई और अपने पंकज भैया के गले से झूल गई। उसने भी मुझे पकड़कर उठा लिया और मैं अपनी दोनों टाँगें उनके कमर से लिपटा दी। मेरी नाइटी कमर तक उठ गई थी। ऐसे में उनका लंड मेरी तपती बूर के किनारे दस्तक दे रहा था। भैया मुझे नीचे उतारते हुए बोले—
पंकज: तुम चिंता मत करो मेरी पूजा, मैं सालों को जेल भिजवाकर रहूँगा।
इतना कुछ करने में भैया का लुंगी ढीला हो गया था जिसे वो बाँधने लगे, लेकिन तभी मैं फिर से उनसे लिपट गई और उनका लुंगी फिसलकर नीचे गिर गया। अब वो बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड नाइटी के ऊपर से ही मेरी बूर पर टिक गया। भैया प्यार से मेरे गालों में अपना गाल रगड़ने लगे और फिर होठों से होठ मिल गए। होठ चूसते-चूसते उनका हाथ मेरी चूचियों पर चला गया और वो उसे धीरे-धीरे दबाने लगे। लंड का दबाव भी बढ़ने लगा और मैं पीछे बेड पर गिर गई। दोनों टाँगें ऊपर उठ गईं जिससे मेरी बूर नाइटी से बाहर हो गई। भैया तुरंत ही मुझ पर झुक गए और उनका दहकता लंड मेरी प्यासी बूर में जाने ही वाला था कि किसी ने दरवाजा नॉक किया। भैया दौड़कर अपने कमरे में चले गए। मैं नाइटी में थी इसलिए मैं दरवाजा खोली तो सामने सीमा खड़ी थी।
सीमा: क्यों पूजा दी, बात कुछ आगे बढ़ी कि नहीं?
पूजा: सीमा, तुम थोड़ी देर बाद आना, समझ गई ना, फाइनल स्टेज में हूँ, कल सब बताऊँगी……
कहकर दरवाजा बंद किया और वापस भैया के कमरे में गई।
भैया चुदाई के फोटो के आगे लंड हिला रहे थे। अब कोई पर्दा बचा नहीं था। मैंने नाइटी उतार फेंकी और अपने भैया से पीछे से लिपट गई। भैया पीछे मुड़े और मुझे गले से लगाकर बोले—
पंकज: मेरी पूजा, तुम कितनी अच्छी हो। तेरे इतने ठोस चूचियों और टाइट बूर के रहते हुए तेरा भाई मुठ मारता है। मुकेश अभागा है साला जो इतनी सुंदर लड़की को छोड़कर मोटी भाभी की गुफा में डूबा रहता है।
पूजा: हाँ भैया, मोनी भी तो पगली है जो मेरे भैया के मोटे से लंड को छोड़कर पता नहीं उँगली से बूर शांत करती है या उस बेटीचोद मुकेश भैया से चटवाती है। भैया, अब कुछ मत कहो, बस अपनी बहन को प्यार करो और इतना प्यार करो जितना आज तक किसी ने अपनी बहन से नहीं किया होगा।
मैं उनके 8” खड़े लंड को सहलाने लगी तो भैया मेरी चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगे। उनकी हथेली मेरे गाँड के दोनों हिस्सों को दबा रहे थे। अब बर्दाश्त करना मुश्किल था। मैं बोली—
पूजा: भैया, अब इस लोहे जैसे लाल लंड को अपनी पूजा की काँपती बूर में डाल दो। मसल डालो इन चूचियों को। आज से ये सब तेरा ही है।
पंकज: हाँ मेरी पूजा, आज अपने लंड के अगरबत्ती से तेरी बूर की पूजा करूँगा, चूचियों का मिठाई खाऊँगा और गाँड का बताशा चाटूँगा। वाह! क्या मस्त चूची है तेरी।
कहते हुए भैया ने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी दहकती बूर पर रखा और एक ही धक्के में वो सन-सनाता हुआ मेरी बूर की जड़ तक पहुँच गया। मैं मस्ती से चिल्लायी—
पूजा: हाय मेरे भैया, जोर-जोर से चोदो। आह! और जोर से चोदो ना। फाड़ दो बूर को ताकि और कोई लंड घुसने ना पाए तेरी बहन के बूर में। पी लो सारा रसना अपने इस मोटे लंड के पाइप से। आह, बस ऐसे ही जोर-जोर से पेलते रहो मेरे भै। ठोकते रहो। चोदते रहो। सुबह-शाम। रात-दिन……
दोस्तों, इसके बाद तो पूजा दी और पंकज भैया पति-पत्नी की तरह ही रहने लगे, बल्कि उससे ज्यादा मस्ती में। उनके घर का हर दरवाजा और खिड़की हमेशा बंद ही रहता है। पूजा दी ने बताया कि हम लोग घर में एक भी कपड़ा नहीं पहनते हैं और भैया के ड्यूटी से आने के बाद बचे 15-16 घंटों में से 13-14 घंटा बूर में लंड डालकर ही रहते हैं, चाहे नहाने का समय हो या खाने का। हाँ तो दोस्तों, सेडक्शन का ये अलग अंदाज कैसा लगा? कभी घर में भी ट्राई कर लो यार…… मैं तो चली अपने भैया के पास…… मेरा मेल आईडी तो पता ही है – sujataseema ymail पर।
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