A housewife lust story hindi:- आजम: हेलो, क्या कर रही हो???
मुस्कान: बस काम करके बैठी हूँ और क्या करना है मैंने…
आजम: अरे तो टीवी देख लो ना, बोर नहीं होगी..
मुस्कान: बस टीवी से ही मन लगाकर रखना पड़ता है मुझे…
आजम: अब क्या करूँ मुस्कान, काम भी तो इंपॉर्टेंट है ना…
मुस्कान: हम्म..
आजम: अच्छा मैं ये बोल रहा था क्यों ना तुम अपनी माँ के घर हो आओ एक बार…
मुस्कान: पिछले महीने ही तो गई थी, अब इतने जल्दी नहीं…
आजम: अच्छा बाबा ठीक है… चलो मैं रखता हूँ, काम है थोड़ा…
मुस्कान: हम्म ठीक है…
कॉल एंड्स
A housewife lust story hindi
मुस्कान और आजम शेख जिनकी शादी को 2 साल हो चुके हैं। फरीदाबाद में एक कॉलोनी में रहते हैं। जहाँ मुस्कान बाला की खूबसूरत एक हाउसवाइफ है वहीं आजम हैंडसम और वेल बिल्ट एक एमएनसी में काम करता है। दोनों इस कॉलोनी में 2 महीने पहले ही मूव हुए हैं। दोनों की फैमिलीज दूसरी सिटी में रहती हैं। उनका घर 2 फ्लोर्स का था लेकिन वो ग्राउंड फ्लोर पर ही रहते थे क्योंकि फर्स्ट फ्लोर का रेनोवेशन होना बाकी था।
शाम के वक्त आजम घर आ जाता है।
मुस्कान: आ गए आप..
आजम: हाँ भाई आ गया, क्या बताऊँ थक गया हूँ आज काम काफी ज्यादा था…
मुस्कान: क्यों??
आजम: वो बस एक मुझे बड़ा असाइनमेंट मिला है…
मुस्कान: हम्म… आप मुँह हाथ धो लीजिए मैं खाना लगाती हूँ…
आजम: ओके।
खाना खाने के बाद दोनों सोने चले जाते हैं बेडरूम… 15 मिनट सेक्स करने के बाद दोनों सो जाते हैं…
अगली सुबह नाश्ता करके रेडी होने के बाद आजम काम के लिए निकलने लगता है…
मुस्कान: अरे रुकिए आप कुछ भूल रहे हैं…
आजम: क्या???
मुस्कान: सोचिए सोचिए क्या भूले हो??
आजम: मुस्कान लेट हो रहा है, बता दो ना…
मुस्कान पीछे से पर्स निकाल कर आजम को देती है…
आजम: थैंक यू मेरी डार्लू…
मुस्कान: बस बस रहने दीजिए और जाइए अब काम पर…
आजम: अच्छा तुम वो पास वाली निर्मला आंटी के यहाँ जाओगी ना उनसे उनके पति का नंबर ले आना काम है….
मुस्कान: ठीक है ले आऊँगी…
आजम: चलो ठीक है थैंक यू मैं चलता हूँ…
वो फिर काम के लिए निकल जाता है। मुस्कान भी अपने घर के काम फिनिश करके उनके घर से 4 घर दूर निर्मला आंटी के घर चली जाती है। उनकी अच्छी बनती थी इसलिए मुस्कान अक्सर वहाँ जाती थी। उधर मुस्कान बातें सब करके घर वापस आ जाती है और अपने शौहर आजम को कॉल लगाती है…
आजम: हाँ मुस्कान बोलो…
मुस्कान: क्या कर रहे हैं आप…
आजम: कुछ नहीं बस काम में लगा हुआ हूँ.. तुम हो आई निर्मला आंटी के घर…
मुस्कान: हाँ मैं वो गई थी और नंबर ले आई हूँ बता दूँ…
आजम: हाँ एक मिनट…. बताओ…
मुस्कान: 9xx xxx xxx6
आजम: चलो ठीक है मुस्कान बाद में बात करता हूँ काम है अब…
कॉल एंड्स…
इसी तरह शाम हो जाती है और शाम में आजम घर आता है।
मुस्कान: कैसा रहा दिन..
आजम: As usual कैसा रहना था… अच्छा वो सब छोड़ो मैंने ना तिवारी अंकल से बात की है ऊपर वाला जो फ्लोर है ना उसके रेनोवेशन के बारे में इसलिए वो नंबर लिए था। उन्होंने पिछले महीने काम करवाया था अपने घर का उन्हीं मजदूरों को 2 दिन बाद बुलाया है काम के लिए। एक बार वो रेनोवेट हो जाए ना फिर अच्छा खासा स्पेस हमें मिल जाएगा…
मुस्कान: हम्म सही है..
फिर दोनों खाना खाकर सो जाते हैं। अगले दिन डेली रूटीन की तरह आजम ऑफिस चला जाता है और मुस्कान अपने काम में लग जाती है। आजम अपने ऑफिस में बैठा हुआ था कि उसे किसी का कॉल आता है..
आजम: हेलो कौन..
रमेश: साहब मैं रमेश बोल रहा हूँ वो काम के लिए तिवारी सेठ ने आपका नंबर दिया था।
आजम: अरे हाँ हाँ बोलो…
रमेश: साहब हम कल से आ जाएँगे काम के लिए। आप होंगे ना कल घर पर…
आजम: हाँ मैं रहूँगा वैसे भी संडे है कल…
रमेश: ठीक है साहब…
ऐसे ही शाम हो जाती है और आजम घर चला जाता है और वहीं रूटीन के साथ मुस्कान और आजम सो जाते हैं। अगले दिन ऑफिस न होने की वजह से दोनों सो रहे थे लेट लेकिन तभी घर की बेल बजती है जिससे दोनों की आँख खुल जाती है। आजम डोर पर चला जाता है जहाँ कोई आदमी खड़ा था…
आजम: हाँ भाई क्या काम है??
रमेश: अरे साहब हम वो घर का काम करने आए हैं…
आजम: अरे हाँ थोड़ा रुको मैं फ्रेश होकर आता हूँ…
फ्रेश होकर नाश्ता करने के बाद आजम और रमेश ऊपर वाले फ्लोर पर जाकर बातें कर रहे थे…
आजम: तो ये है सारा काम हो जाएगा ना…
रमेश: साहब बेफिकर रहिए हो जाएगा… अच्छा वो साहब खाना सब तो हम लोग होटल से खा लेंगे लेकिन पानी शानी अगर हो सके तो इधर ही मिल जाए तो अच्छा था…
आजम: अरे उसकी फिकर मत करो मैं मेरी बीवी को बोल दूँगा वो पानी वगैरह दे जाया करेगी… कुछ भी चाहिए तो उसे बोल देना…
रमेश: बढ़िया साहब तो हम शुरू करते हैं काम फिर…
आजम: ठीक है… वैसे कितने हो तुम सब…
रमेश: 5 साहब… मैं (30 इयर्स), जानकी (38 इयर्स), सत्य (24 इयर्स), हरिश (46 इयर्स) और रघु (49 इयर्स)। सब ने बहुत काम किया हुआ है साहब काम आपको ऐसा करके देंगे कि आप भी याद रखोगे।
आजम: हम्म अच्छा है एक्सपीरियंस्ड आदमी हो तो अच्छा रहता है…
फिर काम शुरू हो जाता है। आजम और मुस्कान ने घर में ही मूवी का प्लान बनाया था इसलिए वो दोनों उसमें बिजी हो जाते हैं। फर्स्ट फ्लोर पर जोर शोर से काम शुरू हो चुका था… पहला दिन स्मूथली निकल जाता है। मजदूर अच्छे से काम करके चले जाते हैं।
अगले दिन नहा धोकर आजम ऑफिस जाने के लिए रेडी हो जाता है…
आजम: अच्छा मुस्कान जब वो मजदूर आएँगे ना तो उनको पानी का इंतजाम कर देना हाँ। बाकी वो खाना शाना बाहर ही खाएँगे। और कुछ भी चाहिए तो वो बता देंगे..
मुस्कान: जी ठीक है आप जाइए आराम से….
आजम के जाने के बाद मुस्कान कामों में लग जाती है। घंटे बाद वो काम वाले आते हैं और काम में लग जाते हैं। फर्स्ट फ्लोर पर जाने के लिए अलग से बाहर से सीढ़ियाँ थीं इसलिए मजदूर के लिए ऊपर नीचे जाने में ज्यादा मुश्किल नहीं होती थी। अंदर मुस्कान काम पर लगी हुई थी कि उसको बेल की आवाज आती है। बाहर उन मजदूरों में से एक जानकी मिलती है…
जानकी: मेमसाब वो पानी चाहिए था पीने के लिए…
मुस्कान: अरे हाँ सॉरी मैं भूल ही गई अभी लाती हूँ…
मुस्कान के जाने के बाद जानकी अंदर इधर-उधर देखती है क्योंकि मुस्कान और आजम ने घर बड़ा वेल मेंटेंड और प्रॉपरली फर्निश्ड रखा हुआ था। मुस्कान पानी लाकर उसे देती है….
मुस्कान: और कुछ भी चाहिए तो बता देना मुझे…
जानकी: जी मेमसाब…
जानकी फिर ऊपर चली जाती है सबको पानी देकर सब काम पर वापस लग जाते हैं। इधर मुस्कान शावर लेने के लिए चली जाती है। उनका वाशरूम बाहर हॉल से अटैच्ड था इसलिए डोर हॉल में से ही खुलता था। इधर मजदूर काम कर रहे थे.. उनमें से एक पेशाब करने नीचे गेट के पास जाने लगता है…
रमेश: अरे हरिश भाई किधर जा रहा हो??
हरिश: पेशाब करने…
रमेश: अरे हरिश भाई उधर मत करना साहब फिर गुस्सा करेंगे… एक काम करो उधर साहब के घर के अंदर ही चले जाओ वहाँ बाथरूम है। मैं साहब से बात कर लूँगा उस बारे में भी और हाँ बेल बजा लेना एक बार..
हरिश फिर चला जाता है डोर तक और वो बेल बजाने ही वाला था कि उसे डोर हल्का सा खुला हुआ मिलता है। जानकी जब वापस गई थी ऊपर तो वो डोर बंद करना भूल गई थी और मुस्कान को भी ख्याल नहीं रहा कि डोर बंद है या खुला क्योंकि वो हल्का सा ही खुला था। हरिश को हालांकि नहीं पता था कि इस घर में कौन रहता है क्या है। वो अंदर हॉल में पहुँचा ही था कि उधर ही वाशरूम का डोर खुलता है और अंदर से एक नाइटी में मुस्कान बाहर आती है।
मुस्कान को हालांकि अंदाजा भी नहीं था कि कोई उसके घर में है इस वक्त। वो तो डोर बंद है समझकर बेफिक्र आई थी बाहर। ये सब इतने जल्दी होता है कि दोनों को कुछ पता नहीं चलता। हरिश की नजर जैसे ही वाशरूम की तरफ पड़ती है तो उसकी आँखें वहीं जम जाती हैं क्योंकि मुस्कान जो इतनी गोरी और खूबसूरत जवान एक नाइटी में खड़ी थी और नहाने की वजह से उसके गीले बाल टॉवल से लपेटे हुए और उसके गीले बालों का पानी नीचे आ रहा था.
जिससे उसकी नाइटी का ऊपरी हिस्सा भीग गया था थोड़ा जिसका नतीजा ये हुआ था कि उसकी ब्रा के स्ट्रैप्स हल्के-हल्के दिख रहे थे ऊपर से नाइटी में मुस्कान का कतिलाना गदराया हुआ फिगर साफ उजागर हो रहा था। मुस्कान को देखकर हरिश की हालत तो खराब हो जाती है क्योंकि वो ठहरा एक मजदूर और ऐसा नजारा उसने जिंदगी में अपनी आँखों के सामने नहीं देखा था।
वो मुस्कान को ताक ही रहा था कि इधर मुस्कान की नजर अब हरिश पर पड़ जाती है और एकदम सतर्क हो जाती है और अपने बालों से टॉवल निकाल कर खुद पर डाल लेती है और गुस्से से…
मुस्कान: कौन हो तुम??? और यहाँ क्या कर रहे हो???
हरिश भी थोड़ा डर जाता है कि कहीं ये शिकायत न कर दे…
हरिश: ओ ओ मेमसाब मैं वो वाशरूम जाने आया था वो मैं काम कर रहा हूँ आपके घर का ऊपर…
मुस्कान: लेकिन बिना बेल बजाए यूँ दरवाजा कैसे खोल तुमने..
हरिश: मेमसाब माफ कीजिए लेकिन दरवाजा खुला था इसलिए बिना बेल बजाए अंदर गया..
फिर मुस्कान को ख्याल आता है कि हाँ उसने तो ध्यान ही नहीं दिया उस मजदूर औरत के जाने के बाद डोर उसने बंद किया या नहीं। अब वो सिचुएशन को समझते हुए…
मुस्कान: ठीक है लेकिन आगे से ध्यान रखना बेल बजाए बिना मत आइए…
हरिश: ठीक है मेमसाब…
वाशरूम जाकर हरिश फिर वापस काम पर चला जाता है लेकिन उसे मुस्कान वाला सीन अभी भी ख्याल आ रहा था, मुस्कान का वो गोरा कतिलाना जिस्म। वो अपने ख्यालों में डूबा हुआ था कि…
रघु: क्या सोच रहा है??
हरिश: कुछ नहीं बस ऐसे ही रघु भाई…
रघु: बता दे क्या करेगा मन में रखकर…
हरिश इधर-उधर देखते हुए रघु को अपने पास बुलाकर…
हरिश: रघु भाई मैं अभी नीचे गया था ना पेशाब करने तब मैंने देखा… (हरिश जो कुछ हुआ वो रघु को बता देता है..)
रघु: ससुरा का नाती तू तो बड़ा भाग्यशाली निकला…. कैसी है मेमसाब…
हरिश: क्या बताऊँ रघु भाई मक्खन है मक्खन हाथ लगाओ तो पिघल जाए… लेकिन हैं मेमसाब किसी तलवार की तरह काट ही रख देंगी…
रघु: हाहाहा चल काम करते हैं….
ऐसे ही वो दिन भी गुजर जाता है। अगले दिन आजम फिर ऑफिस के लिए निकल जाता है। घंटे बाद मजदूर काम पर आकर और काम करने लगते हैं। वो सब काम करते हुए कुछ आधा घंटा हुआ ही था कि वहाँ मुस्कान आ जाती है जिसके हाथ में एक ट्रे था जिसमें जूस था। जानकी वहाँ चली जाती है।
जानकी: अरे मेमसाब इसकी क्या जरूरत थी…
मुस्कान: कोई बात नहीं आप ये सब पी लीजिए…
जानकी: धन्यवाद मेमसाब…
इधर रघु हरिश से धीमी आवाज में…
रघु: हरिश यहीं है क्या मेमसाब??
हरिश: हाँ रघु भाई यहीं है…
रघु: सच में हरिश तू झूठ नहीं बोल रहा था मेमसाब तो एकदम मक्खन है। देख यार क्या सफेद रंग है मैंने तो जिंदगी में इतनी गोरी नहीं देखी।
हरिश: रघु भाई रहने दो मेमसाब ने सुन लिया ना तो बवाल हो जाएगा।
रघु: जो भी है लेकिन मेमसाब हैं बड़ी माल…
हरिश: रघु भाई चुप हो जाओ भावनाओं में बह मत जाओ…
रघु: हाहाहा…
मुस्कान ट्रे लेकर फिर चली जाती है नीचे। इधर मजदूर काम में लगे रहते हैं। करीब घंटे बाद…
मुस्कान: अरे जानकी
उस आवाज को सुनकर उधर देखते हैं। मुस्कान एक बुरके में खड़ी थी हिजाब किए हुए। हालांकि उसका चेहरा नहीं दिख रहा था लेकिन आवाज से सबको पता चल जाता है कि वो मुस्कान ही है। हरिश और रघु की नजर मुस्कान पर थी। बुरके में मुस्कान का परफेक्ट फिगर कतिलाना लग रहा था।
जानकी: जी जी मेमसाब कहीं जा रही हैं..
मुस्कान: हाँ वो मुझे कुछ काम है मैं तकरीबन 2 घंटे में लौट आऊँगी। तब तक प्लीज एडजस्ट कर लेना अगर किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।
जानकी: जी जी मेमसाब कोई बात नहीं आप आराम से जाओ।
मुस्कान: ओके।
मुस्कान अब मुड़ कर जाने लगती है और उसका मुड़ना इधर हरिश और रघु की नजर सीधा टारगेट पर चली जाती है। बुरका थोड़ा टाइट होने की वजह से मुस्कान की गाँड का शेप अच्छी तरह से नुमाया था। सीढ़ियाँ उतरते हुए मुस्कान की गाँड की कतिलाना थिरकन। हरिश और रघु की नजर हटाए नहीं हट रही थी। दोनों पकड़े जाने के डर से नजरें चुरा-चुरा कर देखते रहते हैं जब तक मुस्कान उनकी नजरों से ओझल नहीं हो जाती। मुस्कान स्कूटी चलाना जानती थी इसलिए वो लेकर निकल जाती है…
मुस्कान: हेलो
आजम: हाँ मुस्कान बोलो..
मुस्कान: मैं वो फरीदा खाला के यहाँ जा रही हूँ आ जाऊँगी 2 घंटे के अंदर और मैंने वर्कर्स को बता भी दिया है…
आजम: चलो ठीक है संभाल कर जाना…
मुस्कान: जी रखती हूँ…
कॉल एंड्स….
2 घंटे अपनी खाला के घर गुजरने के बाद मुस्कान वापस घर के लिए निकल जाती है स्कूटी लेकर। उधर आजम ऑफिस में अपने काम पर लगा हुआ था। एक एमएनसी में जॉब की वजह से वो दिन भर बिजी रहता था। उधर उसके घर पर रेनोवेशन का काम जारी था। मुस्कान घर पहुँचकर फ्रेश होकर टीवी देखने बैठ जाती है। ऊपर उसे काम करने की आवाज आ रही थी तभी उसे ख्याल आता है कि शाम का वक्त है उन लोगों को चाय ही बनाकर दी जाए।
चाय बनाकर वो जानकी को पुकारती है सबको देने के लिए बोलती है। मुस्कान के ऊपर न आने से हरिश और रघु निराश हो जाते हैं। फिर ऐसे ही दिन गुजर जाता है। शाम में आजम घर आकर काम का मुजाहिरा करता है कि कैसा चल रहा है काम। वो काम तो सही कर रहे थे क्योंकि तिवारी ने बताया था कि वो काम अच्छा करते हैं। खाना खाकर फिर मुस्कान और आजम थोड़े वक्त का सेक्स करके सो जाते हैं।
अगली सुबह फिर से आजम अपने काम के लिए रेडी होकर निकल जाता है और वहीं मुस्कान अपने कामों में लग जाती है। काम करने के बाद वो टीवी देखने बैठ जाती है। मुस्कान अक्सर काम पूरा करने के बाद ही नहाती थी तो वो थोड़ा टीवी देखने के बाद शावर लेने चली जाती है। तभी मजदूर भी आ जाते हैं ऊपर। मुस्कान शावर ले रही थी कि उसे बाहर बेल की आवाज आती है। वो अंदाजा लगाती है कि शायद जानकी होगी। मुस्कान नाइटी पहन कर अपने बालों में टॉवल लपेट कर वाशरूम से बाहर आती है और हल्के से डोर खोलती है तो सामने जानकी ही थी।
मुस्कान: अरे आओ जानकी कुछ चाहिए था??
जानकी: हाँ मेमसाब वो मुझे नहीं असल में रघु को पानी चाहिए था।
मुस्कान ने जब दरवाजा खोला था तो उसने सिर्फ जानकी पर ही नजर डाली थी रघु पर नहीं जो डोर से थोड़ा दूर साइड में था। एक मर्द मजदूर की प्रेजेंस का सुनकर मुस्कान जब तक रिएक्ट कर पाती तब तक रघु जानकी के साथ खड़ा हो जाता है और उसकी नजर नाइटी में खड़ी मुस्कान पर चली जाती है। कल जो नजारा हरिश को देखने को मिला था वहीं नजारा आज रघु को मिल रहा था बल्कि उससे भी बेहतर। मुस्कान जो अभी-अभी निकली थी शावर लेकर उसके गीले बालों की वजह से पानी की बूंदें उसकी गर्दन और खूबसूरत चेहरे पर आ रही थीं। ऐसा नजारा देख भला कौन न उतावला हो।
पानी की बूंदें मुस्कान के गले से होते हुए उसके कंधे से नीचे उतर रही थीं जो उसकी ब्रा स्ट्रैप्स को विजिबल कर रही थीं। मुस्कान को इतना करीब ऐसी हालत में देख रघु तो जैसे पत्थर बन गया था वहीं मुस्कान जानकी की वजह से एकदम से रिएक्ट भी नहीं कर सकती थी क्योंकि वो अकवर्ड लगता। फिर भी मुस्कान सिचुएशन को संभालते हुए…
मुस्कान: जानकी तुम थोड़ी देर में आ जाओ मैं दे देती हूँ…
जानकी: ठीक है मेमसाब हम चलते हैं…
रघु और जानकी फिर चले जाते हैं वहाँ से। उनके जाने के बाद मुस्कान डोर बंद करके सोचती है “ये सब क्या हो रहा है, जानकी को भी समझना चाहिए अचानक उस आदमी को ले आई। मुझे ध्यान रखना होगा आगे से। जानकी को बता देती हूँ कि आवाज लगाकर आया करे जो भी हो और बेल भी।”
फिर मुस्कान रेडी होकर मजदूरों के लिए पानी जानकी के हाथों भिजवाती है। उधर हरिश रघु से बातचीत कर रहा था।
हरिश: क्या रघु भाई जानकी के साथ नीचे गए थे आते ही मेमसाब के घर…
रघु: अरे कुछ नहीं वो पानी गया था..
हरिश: संभाल कर रघु भाई पानी के अलावा और कुछ मत मांग लेना उधर हाहाहा…
रघु: हाहाहाहाहा…