Pariwar me hawas ki sex story:- कहानी शुरू होती है हमारे मेन कैरेक्टर चिंटू से। एक 21 साल का आवारा बेरोजगार लौंडा जो मुंबई की बस्ती में अपनी माँ के साथ बस्ती के एक चावल में रहता था, जिसमें उनके पास एक छोटा सा लिविंग रूम और 1 बेडरूम था और एक अटैच्ड बाथरूम।
उसकी हाइट 5.11, पतला शरीर और 7 इंच का काला लौड़ा है और दिन भर बस्ती में घूमता है। चिंटू का बाप उसकी माँ के द्वारा 2 साल पहले एक रांड को कोने में चोदते हुए पकड़ा गया था, तब से वो गायब है।
Pariwar me hawas ki sex story
हमारा चिंटू उठता है और सुबह होते ही अपनी माँ को अपने बिस्तर के पास झुक कर पोछा लगाते हुए देखता है।
उसकी माँ (जया, एक 45 साल की औरत) ने सिंपल कॉटन का डीप नेक का पुराना सादा सलवार सूट पहना था जिससे उसके पसीने से भीगे हुए चूचों का उभार आराम से देखा जा सकता था। उसका रंग हल्का गेहुँआ और गाँड और चूचे भरे हुए थे, एकदम गाँव की गदराई औरत।
चिंटू अपनी माँ के चूचों को देखते हुए अपने लंड को अपने अंडरवियर से बाहर निकालता है और कंबल के अंदर ही अंदर मुठ मारने लगता है। क्लियरली ये उसके लिए पहली बार नहीं था, वो कई बार अपनी माँ को देखकर मुठ मार चुका था।
जया: उठ जा आलसी इंसान, सुबह हो चुकी है, जाकर काम ढूंढ। कब तक सोता रहेगा।
चिंटू: (लंड हिलाते हुए लेटे-लेटे ही बोलता है) जाता हूँ ना, चिल्लाती क्यों हो माँ, चले जाऊँगा ना बस थोड़ी देर तुम्हें देखने दो। (अपनी माँ के चूचों पर नजर गड़ाते हुए)
जया: (पोछा लगाते हुए बिना उसकी तरफ मुड़े) क्यों आज से पहले अपनी माँ को नहीं देखा क्या। (जया उठती है और बाल्टी में पोछा डुबोने झुकती है जिससे उसका सलवार हल्का उठता है और कुर्ते से उसकी गाँड का आकार साफ-साफ समझ में आ रहा था)
चिंटू: ऐसा नहीं है लेकिन एक बेटा अपनी माँ को नहीं देख सकता क्या।
जया: (चिंटू की तरफ मुड़ती है और उसकी गड़ी हुई नजर पकड़ती है और हल्के हिलते हुए कंबल को भी नोटिस करती है, जया एक तीखी आवाज में कहती है) चूतिये अपनी माँ को देखने में कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन आँख और हाथ सही जगह होने चाहिए।
चिंटू: (हड़बड़ाकर धीरे से अपने हल्के गीले हाथ को लंड से हटाता है और अपनी माँ के फेस को देखता है) अरे मैं क्या किया माँ, तुम भी ना।
(चिंटू उठता है और अपनी माँ को हग करता है और जया अपने बेटे का खड़ा लंड उसके पेट पर फील करती है। चिंटू को समझ में आता है कि उसकी माँ ने ब्रा नहीं पहनी है और हग को टाइट करता है उसके चूचों को फील करता है)
जया: हाँ चल चल अब जा, जाकर नहा ले चिपक मत ज्यादा, बहुत काम है मुझे। 21 का हो गया है लेकिन 15 की हरकतें हैं।
(चिंटू के हाथ पर अभी भी उसके लंड का हल्का चिपचिपा पानी था जिसे वो गले लगने के बहाने अपनी माँ की पीठ पर रगड़ देता है और वो पानी जया की सलवार पर लग जाता है)
चिंटू: (पीछे हटते हुए) जाता हूँ जाता हूँ माँ, वैसे एक बात बताओ, आज नाश्ते में क्या है।
जया: (हल्का चिल्लाते हुए) जल्दी नहाकर नाश्ता कर ले वरना चाटा खायेगा, पोहा है।
चिंटू मुँह बनाते हुए उसके बस्ती के छोटे से घर के छोटे से बाथरूम में चला जाता है।
जया फिर से झुकती है और झुकने के कारण उसकी सलवार उसकी पीठ पर घिसती है जिससे उसे अपनी पीठ पर हल्का गीला महसूस होता है। वो पीछे हाथ लगाती है और अनजाने में अपने बेटे के लंड के चिपचिपे पानी को अपनी दो उँगलियों पर इकट्ठा कर लेती है और अपने हाथ को सामने लाकर चेक करती है।
जया कन्फ्यूज होकर अपनी उँगलियों को नाक के पास लाके सूंघती है और उसे समझने में ज्यादा टाइम नहीं लगता कि ये क्या है लेकिन उसे ये समझने में बिल्कुल टाइम नहीं लगा कि ये पानी कहाँ से आया।
लेकिन वो कुछ नहीं करती और धीरे से अपनी उँगलियों को मुँह में डालकर चाट लेती है। जया अपनी उन दो उँगलियों को अपने मुँह में घुमाती है और जीभ फेरकर बार-बार अपने बेटे के चिपचिपे पानी का स्वाद लेती है और फिर अपनी उँगलियाँ मुँह से बाहर निकालकर अपनी थूक से सनी उँगलियों को सूंघने लगती है।
(जया मन में: मादरचोद कहीं का अपनी माँ को देखकर कंबल में ही लंड हिलाता है और माँ की पीठ पर ही पानी रगड़कर जाता है, एकदम अपने बाप पर गया है, औरत को देखा नहीं कि लंड खड़ा, इसके लंड की गर्मी का कुछ तो करना पड़ेगा)
तभी मेन गेट पर नॉक होता है और वो दरवाजा खोलती है। दरवाजे पर उसकी पड़ोसन सुनीता, 42, जो कि जया की तरह ही एक गदराई औरत थी जो कि उसके पतले मर्द के साथ रहती है, बस कमर पतली थी, वो मिलने आई थी।
जया: (मुस्कुराते हुए सुनीता का हाथ खींचते हुए उसे रूम में लाती है और गेट बंद करती है) अरे सुनीता, आना अंदर आ।
सुनीता: (संभालते हुए) अरे भाभी आराम से, क्या बात है आज अलग ही चमक है, कल रात को किसी से माराई हो क्या। (सुनीता हँसते हुए धीरे से कहती है)
जया: (जया के हाथ पर हल्का मारते हुए धीरे से बोलती है) हट पगली मैं क्यों माराऊँगी किसी से, मैं बैंगन और गाजर से काम चला लेती हूँ, किसी का ले लिया ना तो पूरी बस्ती अपना लंड लेके मेरे पीछे दौड़ेगी, मजे तो तेरे हैं जो हर रात को अपने मुँह में गाढ़ा माल भरती है।
सुनीता: (शर्माते हुए) भाभी आप भी ना, अब मुझे अच्छा लगता है लंड का पानी तो क्या प्रॉब्लम है उसमें, चलो छोड़ो ये सब और बताओ, वो सामने वाली चावल का झगड़ा पता चला आपको??
जया: (मुस्कुराते हुए) कौन सा झगड़ा बताना मुझे?
सुनीता: अरे भाभी कहाँ रहती हो, वो कांस्टेबल की पत्नी है ना, सुना है उसके पति ने उसे दो गली के लड़कों के साथ गली में चुदते देखा, (सुनीता अपने दाँत से होंठ दबाते हुए) कल वहीं हंगामा पूरे चावल में हुआ है।
जया: (हैरान होते हुए) इसकी माँ का, ये तो रांड निकली, मुझे अच्छे से बता क्या-क्या कैसे-कैसे हुआ है?
सुनीता: (जया को शांत करते हुए) अरे यहाँ नहीं भाभी चिंटू सुन लेगा, वैसे वो है कहाँ?
जया: (बाथरूम की तरफ इशारा करते हुए) अरे वो नहा रहा है, तू बता मुझे कल क्या हुआ।
लेकिन जया नहीं जानती थी कि जब वो सुनीता से बातें कर रही थी तो उसका बेटा चिंटू बाथरूम में नहाने के बजाय उसकी माँ की एक काली पैंटी जो बाथरूम में टंगी थी उसमें अपना लंड रगड़ रहा था।
(चिंटू मन में: आह माँ तेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने दे एक बार, बिना घुसाए तेरा पानी निकालूँगा फिर घुसाने के बाद दो बार और पानी निकालूँगा फिर मैं तेरी चूत में अपना गाढ़ा माल निकालूँगा)
5 मिनट बाद चिंटू अपना गाढ़ा माल पैंटी की चूत वाले एरिया में छोड़ देता है और पैंटी वहीं गिराकर दीवार पर टिक जाता है, क्योंकि अपनी माँ की पैंटी में वो जब भी माल निकालता था तो नॉर्मल से ज्यादा ही निकलता था।
(तभी जया बाथरूम का दरवाजा ठोकती है और इस बार चिंटू पैंटी के बारे में भूलकर गेट की तरफ देखता है)
जया: चिंटू क्या कर रहा है अंदर, नहा रहा है या हाग रहा है मुझे नहाना जल्दी बाहर आ।
चिंटू हर बार पैंटी धो देता था लेकिन इस बार हड़बड़ाहट में पैंटी को वापस टांग देता है और एक-दो मग पानी डालकर टॉवल लपेटकर बाहर आ जाता है।
चिंटू: अरे आ गया ना माँ क्यों इतना चिल्लाती हो, कम से कम बाथरूम में शांति दो।
जया: (चिंटू के भीगे शरीर को देखती है जिसमें उसका लंड का शेप दिख रहा था, वो उसके शेप को देखती है और फिर खुद को संभालते हुए बोलती है) ऐसा क्या कर रहा था कि तुझे बाथरूम में भी शांति चाहिए?
चिंटू: (हल्का हड़बड़ाते हुए) अरे कुछ कुछ नहीं, तुम भी ना, जाओ जाकर नहाओ, बड़ा नहाना था ना अब जाओ ना यार।
जया: (चिंटू को इग्नोर करते हुए धीरे से बाथरूम में घुसती है और दरवाजा बंद कर देती है और धीमी आवाज में खुद से कहती है) गांडू नहा रहा था या अपना लौड़ा हिला रहा था, घर में दिन भर यही करेगा।
तभी जया कपड़े धोने के लिए टंगे कपड़ों को निकालती है और अचानक से अपने हाथ पर गीलापन महसूस करती है। वो चेक करती है तो देखती है कि उसकी काली पैंटी में सफेद गाढ़ा पानी था जो कि बाथरूम की जमीन पर धीरे-धीरे टपक रहा था और बहुत सारा माल उसी में चिपक गया था।
ये देखकर जया की आँखें बड़ी हो जाती हैं और उसका मुँह गुस्से से लाल हो जाता है।
(जया मन में: मादरचोद साला इतना बड़ा हो गया कि अपनी माँ की पैंटी में पानी निकालेगा)
लेकिन तभी उसका गुस्सा शांत होता है और वो चिंटू के गाढ़े चिपके माल को देखती है और धीरे उसे अपने नाक के पास लाती है।
(जया: हम्म साले का पानी तो बड़ा क्वालिटी का लग रहा है और क्वांटिटी भी मस्त है)
ये सोचते हुए जया अपने होंठों पर जीभ फेरके उन्हें गीला करती है और अगले ही सेकंड अपनी जीभ बाहर निकालकर अपना जीभ को उस गाढ़े माल पर रगड़ती है और पूरे माल को किसी भूखी रांड की तरह चाटने लगती है।
जया अब अपने बेटे चिंटू के लंड के गरम पानी को किसी भूखी रांड की तरह चाट रही थी और फिर अपनी चाटी हुई जगह को सूंघने लगती है।
1 मिनट पूरा जीभ से अपने बेटे के गाढ़े माल को पैंटी से साफ करने के बाद
(जया मन में: आह्ह मादरचोद साला कितने सालों बाद ऐसा पानी चखा है, मादरचोद ऐसा स्वाद कितने सालों बाद मिला है, मस्त गाढ़ा और नमकीन है)
जया अब उस पैंटी को अपने मुँह पर रगड़ती है और अपने सलवार में हाथ डालकर अपनी चूत में दो उँगली घुसाकर खुद को मजे देने लगती है।
जया: (धीमी आवाज में) आह्ह मादरचोद आह्ह कुत्ते, मेरी पैंटी को अपने माल से गीला कर रहा है जबकि यहाँ माँ की चूत सूखी जा रही है।
जया अपनी उँगलियों को सलवार से निकालकर फिर से अपने मुँह में डालती है और खुद की चूत के रस का स्वाद लेने लगती है।
2 मिनट बाद जया जमीन पर पड़े प्लास्टिक के पाइप को पानी से साफ करती है और सलवार सूट उतारकर नंगी हो जाती है और फिर प्लास्टिक के पाइप को अपनी चूत में डालकर आगे-पीछे करने लगती है।
जया: (धीमे आवाज में जान-बूझकर ज्यादा अंदर पाइप डालते हुए) आह्ह आह्ह चोद मादरचोद आह्ह ऐसे ही, चोद अपनी माँ की चूत आह्ह बेटा चोद।
5 मिनट बाद जया अपने चूत के रस से भीगे प्लास्टिक का पाइप अपनी चूत से निकालती है और उसे अपनी नाक के पास लाती है और सूंघने लग जाती है और फिर उसे भी वो एक लंड की तरह चाटकर साफ कर देती है।
जया: (हाँफते हुए) इसके पानी ने तो भेनचोद पागल ही कर दिया।
30 मिनट बाद जया बाथरूम से बाहर निकलती है और पाती है कि चिंटू घर में नहीं।
जया: (मुस्कुराते हुए) जरूर बस्ती में गया होगा।
चिंटू अभी बस्ती की दूसरी तरफ की चावल में था जहाँ उसका दोस्त रवि रहता था, रवि भी एक 20 साल का आवारा लौंडा ही था जिसे भी सिर्फ चूत चोदने से मतलब था।
चावल की छत पर रवि और चिंटू बात कर रहे।
रवि: क्या रे भोसडीके, आजकल कहाँ गायब रहता है, पहले तो बहुत घूमता था, कोई मिल गई क्या।
चिंटू: नहीं गांडू, बस आजकल माँ की काली गाँड देखता रहता हूँ, कभी ध्यान नहीं दिया और जब दिया तो हट ही नहीं रहा हा।
रवि: (हैरान होते हुए) अबे तू तो सच में मादरचोद निकला।
चिंटू: (हँसते हुए) चुप साले।
रवि: तो कहाँ तक बात पहुँची।
चिंटू: अभी तक तो बस देखा ही है कपड़ों के ऊपर से और उसकी पैंटी में माल गिराया है, अरे तेरी (डरते हुए)
रवि: क्या हुआ भोसडीके।
चिंटू: अरे भेनचोद आज भी माल गिराया था लेकिन साफ नहीं किया था।
रवि: अरे बेटा तू तो गया।
चिंटू: (डरते हुए) अबे भोसडीके थोड़ा अच्छा बोल कर।
रवि: (हँसते हुए) तो लौड़े कौन सी माँ अपने बेटे के लंड का पानी अपनी पैंटी में देखकर खुश होगी।
चिंटू: (परेशान होते हुए) अरे यार, मैं जा रहा हूँ सुट्टा फूंकने चल तू भी।
रवि: तू जा मैं छोड़ रहा हूँ ये सुट्टा वुट्टा।
चिंटू: (आँख दिखाते हुए) अरे मादरचोद संत बन रहा है तू तो।
ये कहकर चिंटू छत से निकल जाता है और चावल की पीछे साइड की सीढ़ी से नीचे उतरने लगता है जिसे बहुत कम ही यूज किया जाता था, उतरते हुए उसे क्लियरली बच्चों के रोने की, लोगों के लड़ने की आवाजें आ रही थीं।
तभी 1st फ्लोर से ग्राउंड फ्लोर में उसे एक लगभग 40 की एक औरत दिखती (रेखा) है जिसका बदन का रंग हल्का भूरा था और पीली साड़ी साड़ी और ब्लाउज में बैठी थी, रेखा का बदन एकदम भरा था और टाँगें फैलाकर सीढ़ी पर बैठे-बैठे सुट्टा फूंक रही थी।
चिंटू फर्स्ट फ्लोर से झाँककर उसके चूचों को देखने की कोशिश करता है, चिंटू ध्यान से देखता है तो पता चलता है कि रेखा ने ब्रा नहीं पहनी थी, चिंटू से अब रहा नहीं जाता है और वो सीढ़ियों से नीचे आने लगता है और ठीक रेखा के पीछे वाली सीढ़ी पर बैठ जाता है, उसका दिमाग अपनी माँ की पैंटी में उसके छोड़े माल से हटकर रेखा पर आ गया था।
रेखा चिंटू के कदम सुनती है और समझ जाती है कि उसके पीछे कोई बैठा है पर वो उसे इग्नोर करके अपना सुट्टा फूंकने पर ध्यान देती है, चिंटू पीछे से रेखा की गाँड ताड़ने लगता है और मन ही मन रेखा के मुँह को चोदने लगता है।
चिंटू: आंटी, एक शॉट देगी क्या।
रेखा: (गुस्से में अचानक से पीछे मुड़ते हुए सुट्टे को मुँह से निकालकर बोलती है) क्या बोला भोसडीके एक शॉट चाहिए, मैं क्या रांड दिखती हूँ जो एक शॉट 300-400 में देती हूँ।
चिंटू: (डरकर हड़बड़ाते हुए हल्का पीछे हो जाता है) नहीं नहीं नहीं आंटी वो शॉट नहीं सुट्टा सुट्टा, मेरे कहने का मतलब है कि एक शॉट सुट्टा मिलेगा क्या।
रेखा: (शांत होते हुए पर अभी भी गुस्सा वाला चेहरा बनाए रखते हुए) ओह अच्छा ये (अपने सुट्टे को देखते हुए बोली), तो ऐसा बोलना कि सुट्टा चाहिए, ये ले (रेखा उसे सुट्टा देती है)
चिंटू: (सुट्टा लेते हुए) थैंक यू आंटी।
रेखा: (अपने ब्लाउज में हाथ डालती है और एक और सिगरेट निकालकर लाइटर से जलाती है) कितने साल का है तू लौंडे।
चिंटू: (सुट्टा फूंकते हुए) 21 आंटी।
रेखा: (सुट्टा जलाकर फूंकते हुए दीवार पर टिक जाती है और अब वो तिरछी नजरों से चिंटू की तरफ देखती है) क्या काम करता है।
चिंटू: कुछ नहीं।
रेखा: (सुट्टा खींचते हुए) कुछ नहीं मतलब।
चिंटू: कुछ नहीं मतलब कुछ नहीं।
रेखा: क्या नाम है तेरा।
चिंटू: नाम जानकर क्या ही करोगे, चिंटू ही बोलो आप।
रेखा: (थोड़ी कड़क आवाज में) तो बेरोजगार है तू।
चिंटू: अरे आंटी क्यों मूड खराब कर रही हो, घर पर माँ भी यही बोलती है और बाहर आप सुना रहे हो।
रेखा: (हल्के गुस्से में हँसते हुए) अरे अरे चल ठीक है, नहीं पूछ रही उस बारे में कुछ, बचा गुस्सा हो गया।
चिंटू: आंटी आपका नाम क्या है।
रेखा: मेरा नाम रेखा है।
चिंटू: (अपना सुट्टा जमीन पर रगड़ते हुए) यहीं रहती हो क्या इसी चावल में।
रेखा: हाँ क्यों।
चिंटू: ऐसे ही, और बताओ कैसी चल रही है जिंदगी।
रेखा: (सुट्टा खींचते हुए) क्या ही चलेगी, दोनों जवान लड़के फैक्ट्री में गए हैं और बूढ़ा पति खर्राटे मारके सो रहा है।
चिंटू: (हल्का हैरान होते हुए) दो लड़के, आप उतनी उम्र की नहीं लगती।
रेखा: (दीवार पर टिककर थोड़ा खुलकर बोलते हुए) हाँ जल्दी शादी हो गई थी मेरी।
चिंटू: बढ़िया है फिर तो, बच्चे कमा रहे हैं साथ में पति है।
रेखा: (चिंटू की बात काटते हुए) अरे कहाँ, साले दोनों कमाकर रांडी चोदते हैं और मेरा पति, सूख गया है साला, मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी।
चिंटू: (हैरान होते हुए थोड़ा डर जाता है कि वो इतनी कैसे खुल गई उसके साथ) उम्म अच्छा, ठीक है मैं चलता हूँ।
रेखा: (तिरछी नजरों से घूरते हुए) अरे क्या हुआ, कभी ऐसी भाषा में बात नहीं की क्या बस्ती में रहकर।
चिंटू: अरे नहीं आंटी बस थोड़ा आप अचानक से ऐसा बोली तो मैं सोचा कि गुस्सा हो गई।
रेखा: (हल्का हँसते हुए) अरे नहीं रे चूतिये मैं क्यों गुस्सा हूँगी, इतने दिनों बाद तो किसी से ऐसे शांति से बात कर रही हूँ, वरना जो लड़का या मर्द देखता है मुझे सीधा मुझे चोदने का सोचता है, सालों को अच्छा सुनाती हूँ तब भी मादरचोद नहीं समझते।
चिंटू अंदर ही डर रहा था क्योंकि वो भी यही सोचकर आया था लेकिन वो इस बात से खुश था कि रेखा उसे बाकियों की तरह नहीं देख रही।
चिंटू: अच्छा तो एक चीज पूछ सकता हूँ आपसे।
रेखा: (अपना सुट्टा खत्म करते हुए) हाँ पूछना और ये जो शरीफ लड़का बन रहा है तू ये सब हटा, ठीक से बात कर।
चिंटू: (थोड़ा खुलते हुए) अच्छा तो आंटी मैं ये बोल रहा था कि आपको कब पता चला कि आपके दोनों बेटे रांडी चोदते हैं।
रेखा: (चिंटू को घूरते हुए लेकिन शांति से बोलती है) अरे वो साले चूत के पुजारी हैं, साले दोनों कल किसी कांस्टेबल की बीवी चोद रहे थे और पकड़े गए।
चिंटू: ओह फिर क्या।
रेखा: फिर क्या, साले ने अंदर किया उन्हें लेकिन खुद की बीवी की गलती भी थी तो मामला न बढ़े इसलिए परसों तक छोड़ देगा दोनों को, (रेखा धीमी आवाज में होंठ दबाते हुए: साला यहाँ माँ सूखी है और बच्चे यहाँ चूत मार रहे हैं)
चिंटू: (चिंटू रेखा की बात को सुन लेता है पर अनजान बनता है) अच्छा ऐसा, वैसे एक बात और पूछनी थी गुस्सा मत करना, आपने कहा आपका पति सूखा है मतलब, अब आपका खेत नहीं खेत में पानी नहीं डालता क्या वो।
रेखा: (चिंटू की तरफ देखती है और साँसें तेज करके बोलती है) पानी ही तो डालता है भोसडीका वो, 2 मिनट में पानी निकल जाता है हिजड़े का नपुंसक साला।
ये सुनकर चिंटू का खड़ा हो जाता है उसके सामने अब ऐसी गदराई औरत बैठी थी जो लंड की प्यासी थी और कड़क चुदाई के लिए अंदर ही अंदर तड़प रही थी।
चिंटू: छी छी, आपकी चु (संभालते हुए) मेरा मतलब क्या ही चूतियापा है, इतनी भरी जवानी आपकी खाली जा रही है।
ये सुनकर रेखा उसकी तरफ देखती है।
चैप्टर 3 चढ़ती हवस
रेखा हल्का शर्माते हुए दीवार पर वापस टिक जाती है जिससे उसके दूध ब्लाउज में चिपक कर अपना पूरा साइज दिखाते हैं और अब वो चिंटू से थोड़ा और खुलकर बोलती है।
रेखा: कहाँ रे जवान, अब तो 45 की बूढ़ी हूँ मैं।
चिंटू: (मस्का मारते हुए) कौन चूतिया बोला, आप 45 साल की बूढ़ी औरत नहीं 45 साल के तजुर्बे वाली गदराई (संभालते हुए) मैं मेरा मतलब जवान औरत हो।
रेखा ये सुनकर हल्का शर्मा जाती है क्योंकि बहुत दिनों बाद उसे किसी ने उसकी भरी जवानी के दिन याद दिला दिए थे।
चिंटू धीरे से अपनी नजर रेखा के ब्लाउज की गहराई में गड़ाता है जिसे रेखा देख लेती है लेकिन कुछ नहीं कहती और अपने होंठ को दाँतों से दबा लेती है।
रेखा: (नकली खाँसते हुए) कहाँ से सीखा ये जुबान चलाना, बड़ी मीठी-मीठी बातें करता है तू।
चिंटू: बस थोड़ी रगड़ी थी इस जुबान को, कहीं मीठी जगह पर तो कहीं नमकीन जगह पर।
(रेखा मन में: अरे मादरचोद ये तो चूत का स्वाद ले चुका है, चाट वालू क्या इसी से (ये सोचते हुए रेखा की टाँगों के बीच में गर्मी बढ़ने लगती है और वो अपने पैरों को चिपका लेती है)
रेखा: मीठी और नमकीन, ये जगह कहाँ मिली तुझे, तेरी माँ ने तो नहीं सिखाया होगा ये सब तो क्या बंदी से सीखा ये सब।
चिंटू: अरे बंदी नहीं है पर हाँ एक-दो बार मजे ले चुका हूँ, रही बात माँ की तो वो तो अकेले रहती है मेरे साथ, शायद होगी वो भी सूखी।
रेखा: (हल्की हैरान हो जाती है फिर हल्का हँसते हुए कहती है) अच्छा, तो अपनी माँ की चूत के बारे में काफी पता है तुझे।
चिंटू: (हल्का हैरान होकर मजाक में) अरे नहीं आंटी बस ऐसे ही, लेकिन मौका मिले तो वहाँ भी अपनी गीली जुबान रगड़ ही दूँगा।
ये सुनकर रेखा का हल्का पानी बहना शुरू हो जाता है और अब उसकी अंदर की हवस जागने लगती है।
रेखा: (होंठ दबाते हुए) अच्छा तो अपनी माँ की चूत भी चाटनी है क्या।
चिंटू: (हल्का शर्माते हुए) अब क्या करूँ, जब भी देखता हूँ उनकी गाँड को तो खड़ा हो ही जाता है।
रेखा: अरे वाह अपनी माँ की गाँड को देखकर हिलाता है?
चिंटू: हाँ, जब भी उनको सोचकर हिलाता हूँ तो बहुत ज्यादा निकलता है।
रेखा ये सुनकर अपनी टाँगें हल्की से घिसने लगती है।
चिंटू: आंटी आप किसी को बताना मत ना।
रेखा: अरे तू चिंता मत कर, मैं किसको ही बताऊँगी।
चिंटू को अचानक से अपनी माँ की पैंटी में छोड़ा हुआ माल याद आता है।
चिंटू: अरे तेरी।
रेखा: क्या हुआ सब ठीक?
चिंटू: अरे आज मैं नहाने के टाइम बाथरूम में मेरी माँ की पैंटी में माल निकाला था लेकिन आज उसे धोना भूल गया था, माँ वो देख ली होगी।
रेखा: (हँसते हुए) अरे बेटे, तू तो गया, कितना माल था वैसे।
चिंटू: अच्छा खासा था यार पक्का देख लिया होगा उन्होंने।
रेखा: अच्छा, चल अपनी माँ के बारे में बता, तूने कहा वो अकेली रहती है?
चिंटू: अरे उसने मेरे बाप को एक रांडी चोदते पकड़ लिया था।
रेखा: (हँसते हुए) सही है, बाप रांडी चोद और बेटा मादरचोद।
ये सुनकर चिंटू का 7 इंच का लौड़ा लोअर में ही खड़े होने लगता है और रेखा ये सब देख लेती है और उसके लंड को घूरते हुए बोलती है।
रेखा: अरे ये कैसे खड़ा हो गया, क्या देख लिया तूने।
चिंटू: (अपनी किस्मत आजमाते हुए) लंड है आंटी, गदराए बदन को देखकर ही खड़ा होता है।
रेखा: (होंठ दबाते हुए) ऐसी बात है क्या।
रेखा धीरे से हर तरफ देखती है और फिर चिंटू के लोअर में खड़े लंड को अपने हाथ से दबाने लगती है, उसके दबाते ही चिंटू के शरीर में करंट दौड़ गया और रेखा भी उसके साइज को देखकर मन ही मन उससे चुदने का मन बना चुकी थी, वो अपने रस को निकलते हुए महसूस कर पा रही थी।
चिंटू: आह्ह्ह आंटी, करते रहो अच्छा लग रहा है।
रेखा: (मजे लेते हुए) क्यों कैसा लग रहा है मेरा हाथ, तेरा साइज तो सही है।
चिंटू अपनी सीढ़ी पर से उठकर रेखा की सीढ़ी पर उसके बाजू बैठ जाता है और उसके दूध पकड़ लेता है।
चिंटू: आंटी अंदर हाथ डालो ना, तब मजा आएगा और गीला हाथ ना प्लीज, सूखे में दर्द होता है।
रेखा को मजा आ रहा था कि वो ऐसे खुले चावल की सीढ़ियों में कोने में किसी अनजान लड़के जो उसे 10 मिनट पहले मिला उसका लंड हिला रही है।
(रेखा मन में: अरे साला इसको गोदी में क्या लिया ये तो मुँह में मूतने लग गया पर जो भी हो ऐसा 7 इंच का लौड़ा हाथ आया है जाने नहीं दूँगी, बेटा तू बस मेरा खेल देख कैसे तड़पा-तड़पा के मजे लूँगी और मजे दूँगी)
रेखा: अरे चिंटू रहा नहीं जा रहा क्या।
रेखा अपना हाथ उसके लोअर के ऊपर से हटाती है और अपने मुँह के पास ले जाकर सूंघती है और आँखें बंद करके उसका मजा लेती है फिर कुछ सेकंड बाद एक गाढ़ा थूक अपने हाथ में थूकती है और फिर चिंटू के लोअर के अंदर हाथ डालकर उसके नंगे लंड को गीला करके हिलाने लगती है।
रेखा का गीला हाथ महसूस करते ही चिंटू तो जैसे स्वर्ग चला गया था लेकिन फिर अगले सेकंड वापस आ गया और मजे लेने लगा।
चिंटू: (मजे में) आआह्ह आंटी, क्या मस्त मक्खन वाले मुलायम हाथ हैं।
रेखा: हम्म तेरा लंड भी सही है।
रेखा चिंटू के लंड को तेजी से हिलाने लगती है जिसके कारण उसका हाथ चिंटू के लंड से निकल रहे चिपचिपे पानी से भीगने लगता है और उसके थूक के साथ मिलकर और चिपचिपा बन जाता है जिससे चिंटू आँख बंद करके पीछे वाली सीढ़ी पर मजे में टिक जाता है, ये देखकर रेखा धीरे से अपने दूसरे हाथ से अपनी साड़ी के अंदर बिना अंडरवियर के चूत में उँगली करने लगती है और सीढ़ियों पर नजर भी घुमाने लगती है कि कोई आ न जाए।
चिंटू: (हल्का हाँफते हुए) आंटी आह्ह यहाँ नहीं आपके घर पर करते हैं ना।
रेखा: (मुस्कुराते हुए) अरे घर पर मेरा बूढ़ा पति सो रहा है।
चिंटू: तो सो रहा है ना, हमें उससे क्या।
रेखा के दिमाग में खुराफात मचने लगती है, वो अपना गीला चिपचिपा हाथ चिंटू के लोअर में से निकालती है।
रेखा: ठीक है मेरे पीछे आ (और ये कहते हुए वो अपने हाथ पर लगे गीले चिपचिपे पानी को जीभ से चाट लेती है)
रेखा जल्दी से अपनी साड़ी ठीक करती है और ऊपर की सीढ़ी चढ़ने लगती है और चिंटू उसके पीछे चलने लगता है।
रेखा उसे अपनी चावल के 3rd फ्लोर पर ले जाती है जहाँ कोने में उसका रूम था।
रूम में घुसते ही एक छोटा लिविंग रूम था जिसमें एक बेड था जिसपर उसका बूढ़ा पति दारू पीकर सोया था, लगभग 60 का था वो, रेखा उसके पति की तरफ देखती है और मुँह बनाती है फिर चिंटू को धीरे से आने का इशारा करती है और उसे शांति से किचन में लेकर जाती है।
रेखा और चिंटू अब उसके चावल के रूम के किचन के एक कोने में खड़े थे।
रेखा: (धीमी आवाज में) चल निकाल अपना लौडा।
चिंटू अपना लोअर नीचे करके अपना चिपचिपा गीला लंड निकालता है।
चिंटू: (धीमी आवाज में) आंटी इसे मुँह में लो ना।
(रेखा मन में: अरे मन तो बहुत है भोसडी के पर इतनी आसानी नहीं वरना तू मुझे लंड के लिए प्यासी रांड समझेगा)
रेखा: (लंड के पास अपना मुँह लाते हुए) अबे तुझे हाथ क्या दिया तू तो मुँह चोदना चाहता अभी जितना मजे दे रही हूँ उतने मजे ले (और ये कहकर उसके लंड पर अपना गाढ़ा थूक उसके लंड के टोपे पर थूक देती है और उस थूक को पूरे लंड पर रगड़ने लगती है)
रेखा उस लंड को देखकर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और अपनी साड़ी में ही घुटनों पर बैठकर नाक को उस लंड के पास ले जाकर उसके थूक और लंड के चिपचिपे पानी को सूंघती है जिससे उसके मुँह में फिर पानी आने लगता है।
रेखा दो मिनट तक चिंटू का लंड हिलाते रहती है और चिंटू आँख बंद करके स्वर्ग की सैर कर रहा था।
रेखा: (अपने मुँह के थूक को अपने सूखे गले में गटकते) अबे भड़वे जल्दी निकाल अपना पानी मेरा हाथ दुख रहा है।
चिंटू: चिंता नहीं आंटी बस निकलने वाला है।
रेखा मुस्कुराते हुए उसके टोपे को एक हाथ से कवर कर लेती है और दूसरे से तेजी से लंड हिलाती है।
रेखा: चल चल जल्दी निकाल अपना पानी।
चिंटू: (लंबी साँसें लेते हुए) हुह्ह्ह आंटी आंटी हो गया बस।
तभी रेखा महसूस करती है कि चिंटू का लंड हल्का तड़क रहा है और उसका पानी निकलने वाला।
तभी एक गहरी साँस के साथ चिंटू की आँखें खुल जाती हैं और उसका सारा गाढ़ा माल अब रेखा के हाथ पर निकलने लगता है और रेखा मुस्कुराते हुए उसका सारा माल अपना हाथ पर गिरवा लेती है और कुछ माल उसके हाथ से रिसते हुए उसकी साड़ी पर गिर जाता है।
रेखा: हम्म बड़ा गरम और गाढ़ा माल है तेरा।
जैसे ही लंड से पानी निकलना बंद होता है रेखा चिंटू के लंड को अच्छे से दबाती है जैसे वो उसे निचोड़ रही हो और उसके दूसरे हाथ से जिससे वो लंड रगड़ रही थी उससे लंड साफ कर देती है।
चैप्टर 4 चढ़ती हवस
चिंटू: (हल्का हाँफते हुए) हुह्ह्ह्ह मस्त हिलाती हो आप आंटी, कैसा है मेरा माल।
रेखा: हम्म ठीक ही है चल अब घर जा अपने, आज के लिए इतना काफी है, आज ही मिला और लंड हिला दिया, और कुछ मत सोचना (और आँख मार देती है)
चिंटू को पता था कि बूढ़ा पति और गदराई औरत, ऐसा हो ही नहीं सकता कि रेखा की चूत में आग न लगी हो लेकिन चिंटू समझ गया था कि वो या तो मुश्किल से देगी या लंबा गेम खेलना चाहती है लेकिन चूत देगी ही देगी इसलिए चिंटू भी इस खेल को खेलने की ठान लेता है।
चिंटू: (झूठ बोलते हुए) ठीक है आंटी मैं कल आता हूँ ना वहीं सीढ़ी पर, कल मैं सुट्टा पिलाऊँगा और आप कहो तो आपकी चाट भी लूँगा।
रेखा: (सिहरते हुए) अरे साले बेशर्म, अपनी माँ की उम्र की औरत की चूत चाटना है तुझे, चल जा कल फिर मिलते हैं।
चिंटू: (धीरे से हँसते हुए) अच्छा मैं बेशर्म और आप अपने बेटे की उम्र के लड़के के लंड से निकले पानी का क्या करोगी।
रेखा अपने दोनों हाथों के जो चिंटू के लंड के गाढ़े माल से भीगे हुए थे उन्हें देखती है।
रेखा: क्या करूँगी क्या धोऊँगी इसे, चल जा इससे पहले मेरा बूढ़ा पति जाग जाए।
चिंटू ये बात सुनते ही खुश हो जाता है कि आज उसने गदराई औरत फँसा लिया है और वो अपने कपड़े ठीक करके धीरे से उसके रूम से निकलकर चावल से चला जाता है और यहाँ रेखा अपने दोनों हाथों को थोड़ी देर के लिए देखती है, वो बहुत दिनों बाद इतना सारा गाढ़ा चिपचिपा सफेद माल देख रही थी, उसके हाथ में चिंटू का गाढ़ा माल और उसका खुद का थूक था।
रेखा अपने दोनों हाथों को अपने मुँह के पास लाती है और एक गहरी साँस लेती है और अपने दोनों हाथों को अपने मुँह पर रगड़ने लगती है और जीभ निकालकर चाटने लग जाती है।
(रेखा मन में: म्मम्म मादरचोद क्या पानी है पूरी जवानी याद दिला दी)
रेखा के मन में उसके जवानी के दिन के कारनामे याद आने लगते हैं कि कब कैसे वो आधी रात को बस्ती की अँधेरी गली में कभी कचरे के डब्बों के पीछे किसी का माल गटकती थी तो कैसे कभी मजदूरी के दौरान ठेकेदारों का मूत पीती थी।
2 मिनट तक रेखा वहीं घुटनों पर बैठी-बैठी रेखा अपने मुँह पर माल को रगड़ती है और उन उँगलियों को भी चाटने लगती है।
तभी रेखा खड़ी होती है और लिविंग रूम में आकर चेक करती है कि उसका पति अभी भी सोया ही है कि नहीं, रेखा झाँकती है तो उसका पति अभी भी खर्राटे मारकर सो रहा था।
रेखा मुँह बनाते हुए किचन में जाती है और बेलन को पानी से धोती है फिर बेलन के एक साइड पर अपने मुँह से थूक निकालकर उस बेलन पर रगड़ने लगती है और फिर उसे धीरे से अपनी चूत में डालकर आगे-पीछे करने लगती है।
रेखा: (बहुत धीमी आवाज में) आआह्ह आआह्ह साले चिंटू चोद आआह्ह आआह्ह माँ माँ आआह्ह।
सीन शिफ्ट
इधर चिंटू मस्त होकर अपनी चावल में घुसता है और सीढ़ियों से ऊपर जाने लगता है और अपने रूम में जाने वाला था तभी उसे सुनीता देख लेती है।
सुनीता: अरे चिंटू कहाँ से आ रहा है।
चिंटू: (सुनीता की तरफ मुड़ता है और उसके पास जाता है) अरे ऐसे ही आंटी, बस्ती में घूम रहा था।
सुनीता: (मुस्कुराते हुए) घूम रहा था या कुछ कर रहा था इतना पसीना कैसे निकला हुआ है तेरा।
एक सेकंड के लिए चिंटू का शरीर ठंडा पड़ जाता है और वो जल्दी से अपना पसीना पोंछकर बात घुमाता है।
चिंटू: अरे कुछ नहीं आंटी थोड़ा दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था तो उसी में थक गया।
सुनीता: (हल्का हँसते हुए) अरे पागल दिन भर घूमते रहता है, (थोड़ा पास आते हुए) कभी अपनी माँ के साथ भी वक्त गुजारा कर बिचारी अकेली रहती है जबसे तेरा बाप गया है।
चिंटू: (हल्का इरिटेट होते हुए) अरे मत बोलो आंटी मैं तो खुद रहना चाहता हूँ लेकिन माँ बार-बार बेरोजगार बोलती रहती है।
सुनीता: हाँ तो तेरी माँ सिलाई करके अकेले घर चलाती है, उसको भी किसी सहारे की जरूरत है, एकदम सूखी-सूखी लगती है वो, इससे पहले कि कोई वो कोई नया लुंड में मेरा मतलब सहारा ढूँढे तू उसका सहारा बन जा बेटा।
चिंटू समझ जाता है वो क्या वो कहना चाह रही है और साथ में वो क्या बोलने वाली थी।
(चिंटू मन में: अरे झाँट सूखी है साला लगभग हर दिन तो बाथरूम में उँगली करने की आवाज सुनता हूँ चुप-चुप कर और कब से तरस रहा हूँ उस चूत को भरने के लिए मैं खैर छोड़ो आज तो रेखा आंटी ने तो मजे ही करा दिए)
चिंटू: अरे आंटी आप चिंता मत करो, मैं सब संभाल लूँगा, मेरी माँ को किसी और की जरूरत नहीं पड़ने दूँगा मैं।
सुनीता: (मुस्कुराते हुए उसके बालों में हाथ फेरती है) बहुत बढ़िया चिंटू, वैसे एक बात बता इतना बड़ा हो गया है तू, तो कोई पत्नी की नहीं।
चिंटू: (हल्का संभालते हुए) देखो आपके मेरे बीच की बात ना, (रेखा हाँ में सर हिलाती है) अरे मैं नहीं पटाता, साला आज बोलेगी मैं तेरी हूँ कल किसी और के लंड पर (संभालते हुए) मेरा मतलब किसी और के साथ चिपकेंगी, बस्ती में कहाँ किसी से कितना उम्मीद करोगे आप आंटी।
सुनीता: (हल्का शर्माते हुए मुस्कुराती है) हम्म बात तो सही है फिर भी, कुछ जरूरतें अकेले पूरी नहीं की जा सकती हैं बेटा।
चिंटू: (हल्का मस्का मारते हुए) अरे आंटी जरूरी नहीं कि कुछ जरूरत पूरी करने के लिए लड़की पटाना जरूरी है, बस बात करनी आनी चाहिए और हथियार बड़ा होना चाहिए।
सुनीता: (हल्का हँसते हुए उसके कंधे पर हल्का हाथ मारती है) हट बेशर्म, चल जा बहुत काम है मुझे तू भी जाकर अपनी माँ की मदद कर।
चिंटू: (हँसते हुए) हाँ आंटी वैसे आप बताओ आपका क्या हाल है, आप तो एकदम मस्त रहती हो खिले फूल की तरह।
सुनीता: (शर्माते हुए) चुप बदमाश बहुत बोलने लगा है, अच्छी चल रही है मेरी भी बस सूखे कपड़े रस्सी पर से हटाने आई थी।
तभी चिंटू को कपड़े सुनकर फिर से अपनी माँ की पैंटी याद आती है और फिर से उसका चेहरा फीका पड़ जाता है।
सुनीता: क्या हुआ बेटा, अचानक से तेरा चेहरा पीला क्यों हो रहा है।
चिंटू: (हड़बड़ाते हुए) अरे नहीं आंटी बस वो थोड़ी गर्मी है ना, मैं चलता हूँ आंटी कल मिलते हैं।
चिंटू अब डरते-डरते अपनी चावल की खोली की तरफ बढ़ रहा था क्योंकि उसे पता था कि उसने सुबह इतना सारा माल अपनी माँ की पैंटी में छोड़ा है वो उसने जरूर देख लिया होगा और अब वो पीटने वाला है लेकिन उसे ये नहीं पता था कि उसकी माँ भी एक भूखी रांड है।
चिंटू धीरे से अपनी खोली का दरवाजा खोलता है और देखता है कि लिविंग रूम में कोई नहीं है, वो धीरे से अंदर बढ़ता है और किचन की तरफ जाता है और कुछ ऐसा देखता है जिससे उसकी गाँड फट जाती है।
जया किचन में चिंटू की तरफ पीठ घुमाकर खाना बना रही थी, उसने सिर्फ एक कॉटन की साड़ी लाल रंग की और काले रंग का ब्लाउज पहना था और पीठ पीछे से पूरी पसीने से भीगी थी और गाँड का उभार देखकर समझ आ रहा था कि जया ने पैंटी नहीं पहनी है।
चिंटू: (डरते हुए) मैं आ गया।
जया पीछे पलटती है और चिंटू की गाँड फट के 64 हो जाती है, जया ने एक डीप क्लीवेज वाला ब्लाउज पहना था जिसमें उसके चूचे लगभग उछल के बाहर आने वाले थे और चिंटू वहीं देखता रह गया, उन चूचों के बीच में जया की गर्मी से निकलने वाला पसीना रिस रहा था और ब्लाउज भी हल्का गीला हो गया था।
जया ने उसकी नजर पकड़ ली और समझ गई कि उसका निशाना सही जगह लगा है, आज उसने अपनी पैंटी में अपने बच्चे का नहीं एक मर्द का गाढ़ा माल चाटा था इसलिए अब वो भी उसके लंड को पाने के लिए खेल खेलने वाली थी।
जया: (धीमी आवाज में) अरे आ गया चल जा हाथ मुँह धो ले, खाना खा लेते हैं, बाहर कुछ खाया??
चिंटू: नहीं खाया।
जया: (आँख उठाते हुए) क्या कर रहा था बस्ती में।
चिंटू: घूम रहा था।
जया उसे हाथ से इशारा करके पास बुलाती है।
जया: इधर आ।
चिंटू उसके पास जाता है और जया उसे गले लगा लेती है।
जया: बेटा ऐसे रोज-रोज खाली घूमने से क्या होगा, जा जाकर नौकरी देख ठीक है (और ये कहकर उसका मुँह अपने सीने में दबा लेती है)
चिंटू को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका मुँह अभी उसकी माँ के सीने में लगा था और उसके मुँह पर उसकी माँ के सीने का पसीना लग रहा है।
चिंटू: (अपना मुँह सीने में गढ़ाए हुए ही) हाँ माँ।
जया उसके मुँह दबे होने के कारण उसकी आवाज के वाइब्रेशन से सिहर जाती है और उसका सिर पीछे कर देती है।
जया: (धीमी आवाज में) जा जाकर मुँह हाथ धो ले।
5 मिनट बाद चिंटू जमीन पर बैठकर खाना खाने लगता है और जया जस्ट उसके बाजू में बैठ जाती है और अपना पल्लू हटाकर कमर में फँसा लेती है, अब उसके चूचे और चिंटू के बीच में सिर्फ उसका पतला काला ब्लाउज था।
जया अब अपने बेटे के साथ एक मस्ती भरा और लंबा गेम खेलने वाली थी।
चैप्टर 5 चढ़ती हवस
जया: (चिंटू को तिरछी नजरों से देखते हुए) तो किससे मिला आज तू बस्ती में।
चिंटू: (खाते हुए) रवि से माँ।
जया: उस बेरोजगार के साथ ही घूमता रहेगा तो काम कैसे ढूँढेगा।
चिंटू: अरे मैं संभाल लूँगा माँ आप चिंता मत करो।
जया: हम्म आज पता चल ही गया मुझे मेरा लड़का कितना बड़ा हो गया है।
चिंटू खाना चबाना बंद कर देता है और उसकी आँखें बड़ी हो जाती हैं पर जल्दी से संभालते हुए वो खाना जारी रखता है और ये सब होते हुए जया देख लेती है और उसे ये खेल खेलने में मजा आ रहा था।
जया: (मस्ती भरी आवाज में) इतना बड़ा हो गया है कि सब संभाल लेगा, देख बेटा मैं जानती हूँ तू बड़ा हो गया है और सब संभाल लेगा लेकिन कुछ चीजों पर काबू भी करना सीख।
चिंटू: (खाते हुए) हम्म हम्म।
जया: (हल्का चिंटू की तरफ झुकते हुए) वरना मुझे हर हफ्ते नई पैंटी खरीदना पड़ेगा।
चिंटू (फिर से सेम हालत हो जाती है लेकिन हिम्मत करके जया की तरफ देखता है) मतलब माँ।
जया: (हल्का हँसते हुए) अब समझ भी जा गांडू, देख बेटा तू बड़ा हो गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तू मेरी पैंटी में अपना माल (संभालते हुए) मैं मेरा मतलब अपने लंड का पा (हड़बड़ाते हुए) अरे यार, सुन मेरी बात मैं ये कहना चाहती हूँ कि तू बड़ा मैं मेरा मतलब उम्र में बड़ा हो गया है और तुझे भी अपनी गर्मी निकालनी रहती है।
चिंटू को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले क्योंकि उसे लग रहा था कि उसकी माँ समझाना चाहती है शांति से कि उसकी क्या गलती है जहाँ पर उसने अगर कुछ ज्यादा बोला तो पीटेगा लेकिन उसे ये नहीं पता था कि उसके जाने के बाद उसकी माँ ने उसके लंड का पानी अपनी पैंटी से धोने के बजाय जीभ से चाटकर साफ किया था।
चिंटू: (हल्का डरते हुए और शर्माते हुए) हम्म हम्म।
जया: अरे हम्म हम्म सुन, तुझे भी अपनी गर्मी निकालनी है मैं समझती हूँ लेकिन मेरी पैंटी पर क्यों निकालना, तुझे मेरी पैंटी में क्या मिलता है।
चिंटू: (हड़बड़ाते हुए धीरे से) माँ वो मैं बाथरूम में कर रहा था लेकिन शायद गलती से आपकी पैंटी पर निकल गया, निकलते वक्त मैंने आँख बंद कर ली थी।
चिंटू झूठ बोलता है ताकि जया से बच जाए और जया भी समझ जाती है कि चिंटू झूठ बोलता है।
जया: (मस्ती में) कोई बात नहीं बेटा, अगली बार से ध्यान रखना, क्या ही की आज मैंने देखा तो बहुत सारा पानी था, एकदम गंदा चिपचिपा सा, धोने में बहुत मुश्किल हुई पर निकल गया, वैसे किसके बारे में सोच रहा था हिलाते वक्त।
ये सुनकर चिंटू की गाँड फट जाती है क्योंकि इतना खुलकर बात उसकी माँ ने उससे कभी नहीं की थी उससे पर अब वो भी थोड़ा खुलकर जवाब देने लगता है।
चिंटू: थी कोई।
जया: (हल्का मुस्कुराते हुए) कौन थी अपनी माँ को नहीं बताएगा।
चिंटू: (थोड़ा खुलते हुए) माँ क्या पूछ रही हो तुम भी।
जया: (हल्का हँसते हुए) क्यों नहीं पूछ सकती, पानी तो मेरी ही पैंटी में निकला मतलब गिरा है ना।
चिंटू: (हड़बड़ाते हुए झूठ बोलता है) सा सुनीता आंटी।
जया चुप हो जाती है, उसे ये पता था कि उसके बेटे की लुल्ली अब बड़ी हो गई है और आज उसने अपनी माँ की पैंटी में गलती से नहीं जान-बूझकर रगड़कर अपना लंड का गाढ़ा पानी निकाला है लेकिन उसे ये नहीं पता था कि सुनीता का नाम उसने अपनी ही माँ का नाम छुपाने के लिए लिया था क्योंकि चिंटू के हिसाब से उसकी माँ उसे वहीं पेल देती।
(जया मन में: साला एक यहाँ मैं इतनी गदराई माँ हूँ जिसकी चूत में सालों से सिर्फ खीरा और गाजर डालकर काम चल रहा और एक वो सुनीता जो रोज अपने पति का लंड मुँह में लेती है और अब मेरा बेटा भी उसके पीछे पड़ गया है, साली बड़ी किस्मत वाली है)
जया: अच्छा सुनीता, क्यों ऐसा क्या है उसमें।
चिंटू: बस ऐसे ही।
जया: हम्म, वैसे कितना इंच है तेरा।
चिंटू: (हल्का हकलाते हुए) बहुत पहले नापा था, लगभग 7 इंच।
ये सुनकर जया की गाँड फट जाती है कि उसके बेटे की टाँगों के बीच में 7 इंच का लंड है जो कि उसके सालों की भूख मिटा सकता है और ये सुनकर अब उसकी चूत भी गरम होने लगी थी।
जया खाने के दौरान अपना पल्लू सरकाकर अपने चूचों का पूरा प्रदर्शन करती है लेकिन शांति से ऐसे बैठती है जैसे संस्कारी हो, खाने के बाद चिंटू बेडरूम में आ जाता है जहाँ जया और चिंटू साथ में सोते थे, बेड उतना था कि दोनों आराम से साथ में सो जाएँ और दोनों साथ में ही सोते थे, लेकिन आज माहौल अलग था।
जया की चूत में आज खीरे या गाजर की नहीं उसके बेटे के लंड की आग थी और चिंटू सुबह ही रेखा के हाथ की उसके लंड पर मसाज से मस्त था और अगले दिन का सोच रहा था कि अगले दिन रेखा के साथ वो क्या-क्या कर पाएगा।
चिंटू यही सोचकर अपने बिस्तर में चादर ओढ़कर उसकी खोली की छत की तरफ देख रहा था।
5 मिनट जया रूम में आती है और खिड़की खोल देती है जिससे चाँद की हल्की रोशनी बस अंदर आ रही थी और लाइट ऑफ कर देती है, जया का बदन साफ-साफ चिंटू को नजर आ रहा था और अँधेरे में हल्की रोशनी में वो उसका हल्का पसीने से चमकने वाला बदन देख पा रहा था।
जया: (अपनी साड़ी के पल्लू से गले का पसीना पोंछते हुए) आज गर्मी बहुत है ना बेटा।
चिंटू: (लेटे-लेटे ही जया को देखकर बोलता है) हाँ माँ, आज तो पंखा भी फेल है।
जया: (हल्का मुस्कुराते हुए) बिल्कुल बेटा, आज तो गर्मी सही ही नहीं जा रही है।
ये कहकर जया चिंटू के बाजू में लेट जाती है और अपना साड़ी का पल्लू अपने घुटनों पर फेंक देती है और फिर अपने ब्लाउज के 2 बटन खोल देती है जिससे उसके निप्पल लगभग बाहर आ ही गए थे, चिंटू अँधेले लेकिन चाँद की हल्की रोशनी से उसके माँ का हल्के पसीने से भीगे चमकते बदन को देख रहा था और उसके बदन की गर्मी को भी महसूस कर पा रहा था लेकिन वो शांत रहता है और कोशिश करता है अपने चादर के नीचे अपने खड़े लंड को छुपाने की।
चिंटू अपना हाथ अपने लंड पर रखता है और हल्का दबाता है नीचे की तरफ ताकि लंड का उभार चादर से ना समझ में आए लेकिन जया चाँद की हल्की रोशनी में समझ जाती है कि चादर के नीचे उसका बेटा अपने 7 इंच के लंड को छुपाने की कोशिश कर रहा है।
जया: क्या हुआ बेटा, गर्मी लग रही है क्या।
चिंटू: हाँ माँ, बस वहीं पसीना पोंछ रहा था।
तभी अचानक से एक झटके में जया चिंटू का चादर हटा देती है जिससे उसका हाथ जो उसके लंड को दबा रहा था वो साफ-साफ हल्की रोशनी में समझ में आ जाता है जया को, लेकिन वो कुछ नहीं करती जैसे उसने देखा ही ना हो।
जया: तो क्यों चूतियों की तरह गर्मी में चादर ओढ़कर रखा है, चल सो जा अब।
और जया अपना ब्लाउज का आखिरी बटन खोलकर एक आलसी लेटी है जिससे उसका ब्लाउज अब खुलकर उसके चूचे दिखा रहा था और चिंटू साफ उसके निप्पल को देख पा रहा था, चिंटू का लंड अब पूरा खड़ा हो गया था और अब चिंटू भी उसे छुपा नहीं पा रहा था।
जया ये सब धीरे से आँख खोलकर देख रही थी और सोने का बहाना कर रही थी और मन ही मन खुश हो रही थी कि उसका बेटा उसे एक माँ के साथ-साथ एक औरत की तरह भी देख रहा था।
लगभग 15 मिनट बाद भी चिंटू जया के निप्पल्स को घूरे जा रहा था और अब उससे रहा नहीं जा रहा था, उसने हल्का सा जया के कंधे को हिलाया ताकि जान सके कि वो सो रही है कि नहीं।
चिंटू: (जया का कंधा हिलाते हुए धीमी आवाज में) माँ? माँ??
उसने धीरे से अपना लंड लोअर से बाहर निकाला और अब उसका 7 इंच का लंड हवा में झूल रहा था लेकिन उसे ये नहीं पता था कि जया अभी सोई नहीं थी, वो बस सोने का नाटक कर रही थी।
(जया मन में: मैं अपने बेटे को भले नहीं जानती अच्छे से लेकिन एक 7 इंच के लौड़े को अच्छे से समझती हूँ, मैं जानती थी कि ये मेरे सोने के बाद कुछ करेगा, कर बेटा मैं तो चाहती हूँ कि तू कुछ करे, मन करे तो मुझे नींद में समझकर चोद दे बेटा आ जा)
चिंटू धीरे से अपने हाथ में थूकता है और अपने लंड के टोपे पर उस थूक को रगड़कर धीरे-धीरे मुठ मारने लगता है, उसके हाथ के धीरे-धीरे हिलने की वजह से भी उसके कपड़े और थूक के मसले जाने की आवाज लगातार आ रही थी जिसे रेखा सुनकर समझ गई थी कि उसका बेटा क्या कर रहा है और धीरे से अपनी आँखें हल्की सी खोलकर देखती है।