Bhabhi ki chudai ki hindi kahani:- हे दोस्तों, क्या हाल है आप सबके? मुझे उम्मीद है कि आप सब एकदम ठीक होंगे। मैं गुरतेज सिंह पटियाला वाला आज अपनी जिंदगी की पहली चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ। मुझे पूरी उम्मीद है जितना मजा उस चुदाई में आया था, उतना ही मजा आपको इस देसी सेक्स स्टोरी को पढ़ने में आए।
Bhabhi ki chudai ki hindi kahani
मेरा नाम गुरतेज सिंह है, और मैं पटियाला से हूँ। मैं पंजाब का रहने वाला एक पंजाबी गबरू लड़का हूँ। मैं अपने घर वालों का एक ही लड़का हूँ। मैं शुरू से ही स्टडी में काफी अच्छा था। इसलिए मैंने अच्छे से स्टडी की और अपनी बी.टेक पूरी कर ली। कंपनी वालों ने मुझे रहने के लिए एक फ्लैट भी दे दिया था।
स्टडी पूरी करते ही मुझे एक टॉवर कंपनी में सीनियर हेड पोस्ट मिल गई। पर मुझे अपने पंजाब को छोड़कर गुजरात में जाना था। पहली जॉब थी इसलिए मैंने अपने दिल पर पत्थर रखकर गुजरात आ गया।
कुछ ही दिनों में मैं सारा काम अच्छे से समझ गया। अब मैं पूरा दिन अपने फ्लैट में ही रहता हूँ। सारा काम मैं अपने लैपटॉप में मेल्स से ही संभाल लेता हूँ। बहुत ही अच्छी जॉब मुझे मिल गई थी। मैं काफी खुश था और मेरे घर वाले भी।
मैं जिस फ्लैट में रहता था वो एक बहुत ही अच्छी सोसाइटी थी। मेरे फ्लैट के सामने एक गुजराती फैमिली रहती थी। मैं यहाँ पर नया था इसलिए मैं ज्यादा कुछ भी नहीं जानता था। मेरे घर के सामने वाले घर में एक छोटी सी फैमिली रहती थी। उनकी फैमिली में 32 साल के भैया और 30 साल की भाभी और उनके दो प्यारे बच्चे रहते थे। जो अभी स्कूल में जाते थे।
भैया एक कंपनी में अच्छी पोस्ट पर थे। इसलिए वो सुबह 8 बजे घर से निकल जाते थे और रात को 10 या 11 बजे घर वापस आते थे। भैया-भाभी दोनों काफी अच्छे नेचर के थे। मुझे उनसे बात करना बहुत अच्छा लगता था। मेरे फ्लैट में अभी फ्रिज नहीं था। इसलिए मैं उनके घर से आइस लेने जाता था।
मुझे कभी भी एक बार भी उन्होंने मना नहीं किया। बल्कि भैया ने मुझे पहले दिन ही कह दिया था कि अगर कोई भी जरूरत हो तो भाभी या मुझे बता देना। अब मैं जरा भाभी के बारे में आपको बता दूँ। भाभी का जवाब नहीं था। वो बहुत ही सेक्सी जिस्म की मालकिन थीं। उनके बूब्स और गाँड किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी थीं।
भाभी का नाम आरती था। वैसे तो वो 32 साल की थीं। पर दिखने में सिर्फ 26 की लगती थीं। उनका फिगर 34-30-38 होगा। उनकी गाँड उनके जिस्म में सबसे बड़ी और कमाल की थी। जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मैं उसे चोदने के सपने लेने लग गया था। सच में यारों बहुत ही कमाल की चीज है साली।
मैं उससे दोस्ती करना चाहता था। और भगवान ने मेरी जल्दी ही सुन ली। अब हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बनने लग गए थे। क्योंकि मैं सारा दिन अब घर पर ही रहता था। फिर भाभी के दोनों बच्चे अपने-अपने स्कूल निकल जाते थे। भैया तो पहले से ही सुबह निकल जाते थे। अब मैं और भाभी एकदम अकेले रहते थे।
मैं करीब 11 बजे उनके घर पानी और आइस लेने के लिए चला जाता था। भाभी मुझे अपने घर में ही बैठा लेती थीं। फिर हम दोनों काफी देर बातें करते रहते थे। जब तक उनके बच्चे नहीं आते थे, तब तक मैं उनके घर पर ही रहता था। भाभी मुझे रोज-रोज गुजराती डिशेज बनाकर खिलाती थीं।
मेरा ध्यान उनके मोटे-मोटे बूब्स पर ही होता था। सच में साली दोनों के दोनों बहुत ही मस्त थे। मेरा मन काफी बार करता था कि अभी जाकर उनके बूब्स को मैं अपने मुँह में भर लूँ और चूसता ही जाऊँ। गोरे रंग की भाभी ने मेरे ऊपर अपना जादू सा चला दिया था।
दिन-रात मैं उनके बारे में ही सोचता रहता था। एक दिन की बात है मुझे ऑफिस के काफी काम थे। इसलिए मैं उनके घर नहीं जा सका। करीब 12 बजे से पहले भाभी खुद ही मेरे घर आ गईं और मेरे लिए लंच और ठंडा पानी टेबल पर रख दिया। जब उन्होंने देखा कि मैं लैपटॉप पर काम कर रहा हूँ।
तब उन्होंने मुझे कहा कि उनके घर पर भी उनके हस्बैंड का पुराना कंप्यूटर पड़ा है। और उन्हें जवानी से ही कंप्यूटर चलाने और सीखने की इच्छा थी। उन्होंने मेरे आगे एक रिक्वेस्ट की कि मैं उन्हें कंप्यूटर सिखा दूँ। मैंने झट से हाँ कर दी और उन्हें कह दिया कि अपना कंप्यूटर निकालकर रखें, हम कल से क्लास शुरू करते हैं।
मेरी ये बात सुनकर भाभी खुश हो गईं। और फिर वो वहाँ से हँसते हुए खुशी-खुशी निकल गईं। मैं भी मन ही मन खुश था। अगले दिन जब मैं भाभी के घर में गया तो भाभी कंप्यूटर ऑन करके पहले से ही रेडी थीं। मैं उनके पास जाकर उन्हें सिखाने लग गया।
काफी मजा आ रहा था, क्योंकि इसी बहाने मुझे भाभी को टच करने का बहुत अच्छा मौका मिल रहा था। मैं उनके कोमल हाथों के ऊपर अपना हाथ रखकर उन्हें माउस चलाना सिखा रहा था। ऐसा लग रहा था मानो अब जल्दी ही मैं इन हाथों में अपना लंड दे दूँगा।
ऐसे ही कुछ दिन निकल गए। कंप्यूटर सिखाने की वजह से अब हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे। हम दोनों में टच होना अब बहुत ही आम सी बात थी। एक दिन काम खत्म करने के बाद मैं उसके पास बैठा हुआ था। मैंने उसे कहा कि मुझे आपकी आँखें बहुत पसंद हैं।
आरती: हाँ ये तो है।
फिर मैंने धीरे-धीरे उनके पूरे चेहरे की तारीफ करना शुरू कर दिया। हम दोनों एक-दूसरे के बहुत पास रह रहे थे। हम दोनों को अपनी-अपनी गरम साँसें साफ-साफ महसूस हो रही थीं।
फिर भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रखकर धीरे-धीरे उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। करीब 15 मिनट तक हम दोनों का ये किसिंग सीन चला। फिर अचानक से भाभी को होश आया और उन्होंने मुझे धक्का देकर खुद से मुझे अलग कर दिया। उनकी आँखों में गुस्सा और प्यार दोनों थे।
मैं बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया। फिर मैंने कुछ देर बाद उनका घर देखा तो वो आज बंद था, जो दिन में हमेशा खुला रहता था। मैं अपना काम करने लग गया। फिर शाम को मैं बाहर से वापस घर आ रहा था। तब मैंने देखा कि वो अपने बच्चों को स्टडी करवा रही थीं। उन्होंने मुझे देखकर प्यारी सी स्माइल दी। और मैंने भी उन्हें स्माइल दे दी।
फिर उन्होंने मुझे इशारे से बुलाया। तो मैं उनके पास गया। उन्होंने मुझे बताया कि क्या बात, आज तुम पानी लेने नहीं आए। उनकी ये बात सुनकर मैं खुश हो गया। फिर मैंने कहा कि मैं जल्दी ही वापस आता हूँ। कुछ देर बाद मैं उनके घर पर गया। मुझे देखकर वो किचन में चली गईं। दोनों बच्चे स्टडी में बिजी थे।
मैं भी उनके पीछे किचन में चला गया। उनकी कमर ब्लाउज में से चमक रही थी। मैं पागल सा हो गया। मैंने पीछे से भाभी को पकड़कर अपनी बाहों में भर लिया। फिर मैंने उन्हें गले पर किस करने लग गया। भाभी एकदम गरम हो गईं। कुछ सेकंड के लिए वो मदहोश सी हो गई थीं। पर कुछ ही देर में वो फिर से होश में आईं और मुझे धक्का देकर उन्होंने पीछे कर दिया।
मैंने उसे सीधा करके बड़े प्यार से अपनी बाहों में भरकर उससे बोला कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। फिर भाभी बोलीं—
आरती: ऐसे भी कोई प्रपोज करता है क्या?
उसकी ये बात मेरे दिल पर लगी। मैंने उसे उसी समय कहा कि अगर ऐसी बात है तो कल 11 बजे तुम मेरे फ्लैट में आओ।
फिर मैं अपने फ्लैट में आ गया। पूरी रात मैं भाभी के सपने देखता रहा। वो इतनी सेक्सी थीं कि उसको चोदने के बारे में सोचने से ही मेरा लंड पूरा खड़ा था। पूरी रात मेरा लंड खड़ा रहा और मैं भी भाभी की चूत की चुदाई के सपनों में खोया रहा।
आखिर सुबह मेरी आँख 4 बजे लगी और मैं 9 बजे उठकर अपने रूम में सजाने लग गया। मैं मार्केट से गुलाब का फूल और गुलाब जामुन भी लेकर आया।
भाभी 10:20 पर ही मेरे घर आ गईं। आज उन्होंने ब्लैक कलर की साड़ी डाली हुई थी। सच में कयामत लग रही थीं। बिल्कुल जैसे हम चुदाई की कहानी में इमेजिन करते हैं। मैंने उनका वेलकम बहुत अच्छे से किया। डोर क्लोज करके मैं अपने घुटनों पर भाभी के सामने बैठ गया।
फिर मैंने उनको गुलाब का फूल देकर बहुत ही रोमांटिक वे से प्रपोज किया। उन्होंने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट तो कर लिया। पर साथ ही वो बोलीं—
आरती: मैं कैसे तुम्हारी हो सकती हूँ? मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और ऊपर से मेरे दो बच्चे भी हैं।
मैंने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा—
मैं: देखो मुझे सिर्फ तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ। और थोड़ा सा तुम्हारा प्यार भी पाना चाहता हूँ। प्लीज मुझे ना मत कहो क्योंकि मैं पहले दिन से तुम्हारा दीवाना हूँ।
भाभी मेरी बातें सुनकर थोड़ी सी पिघल गईं। उन्होंने मुझे खड़ा किया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरे होंठ उसके होंठों के पास आ गए। और फिर मैंने अपने होंठों को बड़े प्यार और धीरे से उसके होंठों पर रख दिया। मैं जब अपने होंठों से उनके होंठों का रस पी रहा था। सच में दोनों होंठों में रस बह रहा था।
मैं करीब 10 मिनट से ज्यादा ही उनके होंठों को किस किया। और बाद में अपनी जीभ धीरे से उनके मुँह में डाल दी। कमाल की बात ये थी कि उन्होंने मेरी जीभ को अपने मुँह में पाते ही उसे चूसना शुरू कर दिया। सच में वो काफी जोर-जोर से मेरी जीभ को चूस रही थीं।
फिर मेरी जीभ ने उनके मुँह को अंदर से चूसना और चाटना शुरू कर दिया। भाभी भी अपनी जीभ से मेरी जीभ को चाट रही थीं और फिर अपनी जीभ को मेरे मुँह में डालकर उसे अच्छे से चटवा रही थीं। चुमा-चाटी के बाद मैं भाभी को गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया।
वहाँ आते ही मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और उनका ब्लाउज उतार दिया। फिर ब्रा और अब मेरे सामने गोरे-गोरे दो मोटे बूब्स थे। जिन्हें देखकर मेरे मुँह में पानी आ रहा था। मैंने झट से दोनों बूब्स पर टूट पड़ा और दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसने लग गया।
मैंने दोनों बूब्स के निप्पल्स को अपने दाँतों से काट-काट कर उन्हें खड़ा कर दिया। भाभी के मुँह से आाह्ह आाह्ह की आवाजें आ रही थीं। जिसे सुनकर मैं भी मस्त हो रहा था। फिर मैंने झट से उनकी साड़ी को उतार दिया। अब मेरे सामने गोरे रंग में एक चिकनी औरत थी। मैंने उनकी दोनों टाँगें खोलीं तो मेरे सामने गोरी और चिकनी चूत थी। वो चूत के पानी से भीगी हुई थी।
मैंने साइड रखे हुए गुलाब जामुन उठाए और उसका रस भाभी की चूत के ऊपर गिरा दिया। सच में उस रस से चूत और भी सुंदर लग रही थी। मैंने अपनी जीभ अब बाहर निकाली और जोर-जोर से उनकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ अच्छे से उनकी चूत को चाट रही थी। गुलाब जामुन की चाशनी और चूत के पानी का स्वाद दोनों मिक्स होकर एक लाजवाब रस में बदल चुका था।
तभी भाभी ने मुझे ऊपर आने का इशारा किया। मैंने अपने सारे कपड़े निकाले और उनके ऊपर 69 की पोजीशन में आ गया। मेरा पहले उन्होंने कुछ देर अपनी जीभ से चाटा। फिर उन्होंने अचानक ही मेरा लंड पूरा अपने मुँह में डाल लिया। ये मेरा पहला एक्सपीरियंस था।
इसलिए मैं एकदम से जन्नत में आ गया था। वो जोर-जोर से मेरे लंड को चूसने लग गईं। मैं भी मस्ती में आकर अब छोटे-छोटे धक्कों से उनका मुँह चोदने लग गया। सच में इसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था। इधर जहाँ मेरे मुँह पर उनकी चूत थी।
भाभी ने अपनी दोनों टाँगों से मुझे लॉक कर दिया और नीचे से अपनी गाँड को उठा-उठा कर मुझसे अपनी चूत चटवाने लग गईं। कुछ ही देर में मेरे लंड ने अपना सारा पानी उनके मुँह में डाल दिया। कमाल की बात थी वो मेरे लंड का पानी सारा पी गईं और मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ करने लग गईं।
फिर उनका पूरा जिस्म मानो अकड़ गया। और मेरे मुँह पर उन्होंने अपना सारा पानी निकाल दिया। मैं भी सारा पानी अपनी जीभ से चाट कर पी गया। फिर हम दोनों ने कुछ देर एक-दूसरे की बाहों में रेस्ट किया। कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने अब उनकी दोनों टाँगें खोलीं और अपना लंड उनकी चूत में डालकर जोर-जोर से उनकी चूत को चोदने लग गया।
उस दिन मैंने भाभी का फेशियल और कम ड्रिंकिंग दोनों 4 बार करवाईं। वो दिन और आज का दिन हम दोनों डेली चुदाई के खेल कर मस्ती करते हैं।
आपको चुदाई की स्टोरी अच्छी लगी हो तो प्लीज मुझे कमेंट्स में जरूर बताना।