Desi Makan malkin ki chudai kahani:- हाय, मेरा नाम सद्दाम है। मेरी उम्र 23 साल है। ये बात तब की है जब मैं लखनऊ में जॉब के लिए गया था। जॉब लग गई और एक खूबसूरत औरत मिली, जो मैरिड थी पर देखने में ऐसी थी कि किसी का भी दिल जीत ले। वो थी मेरी मकान मालकिन। उसकी एक बेटी थी।
Desi Makan malkin ki chudai kahani
मेरा रूम उसके सामने वाले घर में था, जहाँ उसके बूढ़े माँ-बाप रहते थे। और सामने वाले घर में वो, उसका हस्बैंड और बेटी रहते थे। उसके और कोई भाई या बहन नहीं थे। वही अपने माँ-बाप का ख्याल रखती थी। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी मेरा और सोना का रिश्ता इतना गहरा हो जाएगा। उसका नाम सोना है।
और हुआ ऐसे कि मैं जब काम पर जाता तो वो मुझे कुछ न कुछ सामान लाने का पैसा दे देती। कुछ दिन तो ऐसा लगा कि ये मुझे अपना सर्वेंट समझती है। फिर एक दिन मुझे सोना जी बोलीं—
सोना: सद्दाम, ये दवा मेडिकल से लेते आना शाम को। मैं पैसे बाद में दे दूँगी।
मुझे गुस्सा तो लगा पर दवा का सोचकर हाँ कहकर चला गया।
मैं शाम को 6 के बाद ही रूम पर आता था। पर उस दिन काम नहीं था तो मैं लंच में ही आ गया। रास्ते में मैंने उसकी दवाई ली और सीधा उसके घर पर ही गया दवा देने। अंदर गया तो बस मेरी हालत ही खराब हो गई उसे देखकर। सोना सिर्फ सलवार और ब्लू कलर की ब्रा पहने थीं। और शीशे में खुद को देख रही थीं। जैसे ही उन्होंने मुझे देखा जल्दी से बेड से चादर उठाकर ओढ़ लीं। फिर बोलीं—
सोना: तुम इस वक्त?
मैं: जी काम नहीं था तो चला आया। ये लीजिए अपनी दवा।
सोना: अपने पैसे ले लो।
मैं: कोई बात नहीं। शाम को दे दीजिएगा।
फिर मैं चला गया। और रूम में जाते ही बार-बार मुझे उसी का ख्याल आने लगा। उस समय वो इतनी हॉट लगीं कि मैं उसे देखता ही रह गया। उसका एक-एक बूब्स इतना बड़ा था कि मेरे दोनों हाथ में न आते।
ऊपर से ब्लू कलर की ब्रा दिल कर रहा था बस ये मुझे चूसने को मिल जाए। करीब 5 बज रहे थे। मैं टीवी देख रहा था। तभी किसी ने मेरे रूम का दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो सोना जी थीं। आज पहली बार वो मेरे रूम के दरवाजे के पास आईं।
मैं: जी बताइए क्या हुआ?
सोना: तुम्हारे पैसे।
मैंने पैसे ले लिए।
मैं: आइए बैठिए भाभी।
तो वो अंदर आईं और बैठ गईं।
मैं: भाभी आई एम सॉरी।
सोना: क्यों?
मैं: उस समय जब आप चेंज कर रही थीं।
वो कुछ नहीं बोलीं। फिर कहने लगीं—
सोना: तुम्हारी छुट्टी कब होती है?
मैं: संडे को।
सोना: मुझे जरा मार्केट जाना है। घर का सामान लाना है। तुम्हारे भैया को टाइम ही नहीं रहता।
मैं: ठीक है आप मेरे साथ चलिए जब जाना हो।
सोना: लेकिन तुम्हारी छुट्टी तो संडे को होती है। और जहाँ जाना है वो बाजार बुधवार को लगती है।
मैं: ठीक है मैं छुट्टी ले लूँगा कल। वैसे भी आजकल ज्यादा काम नहीं है। मैं भी घर जाने की सोच रहा हूँ।
सोना: ठीक है।
फिर वो चली गईं। बुधवार की मैंने छुट्टी ले ली। और 11 बजे हम बाजार निकल गए। रास्ते में जब ऑटो में बैठे तो एक मोटा आदमी और भी बैठा ऑटो में। मैं सोना से बिल्कुल चिपक कर बैठा था। उसकी जाँघ मेरी जाँघ से बिल्कुल चिपकी थी।
बहुत मजा आ रहा था। फिर बाजार पहुँचे। सामान सब खरीदा उसने। फिर हम घर के लिए आने लगे तो एक दुकान पर सब लेडीज के सामान बिक रहे थे। जहाँ मेरी नजर ब्रा पर पड़ी तो मुझे उसकी ब्रा याद आ गई। मैं ब्रा को देखता ही जा रहा था। तभी सोना भाभी बोलीं—
सोना: क्या देख रहे हो? खरीदना है क्या अपनी जीएफ के लिए?
और हँसने लगीं।
मैं: जीएफ है ही नहीं तो क्या खरीदूँगा।
फिर हम उसी तरह ऑटो में घर आने के लिए निकले। अब मैं और सोना काफी खुलकर बातचीत कर रहे थे।
फ्राइडे का दिन था। मैं काम से रूम पर आया और फ्रेश होकर टीवी देखने लगा। 8 बज गए थे। मेरे दिमाग में तो सोना भाभी का ही ख्याल बार-बार आ रहा था। तो मैंने मोबाइल निकाला और ब्लू फिल्म देखने लगा। जैसे ही मैंने ब्लू फिल्म देखने लगा, वैसे ही दरवाजा खटखटाया। मुझे लगा मकान मालिक होगा। सोना का बाप शराब पीके मुझे पकाने आया होगा।
मैंने दरवाजा खोला तो ये तो सोना जी हैं।
मैं: आइए क्या हुआ भाभी?
सोना: मेरे फोन में जरा बैलेंस करा लाओ।
मैं: मेरे पास रिचार्ज कार्ड है। वोडाफोन है आपका?
सोना: हाँ।
मैंने कार्ड निकाला और उसे दे दिया। वो चली गईं। फिर मैं नीचे पानी लेने गया तो वो अपनी माँ के पास ही बैठी थीं। उनकी माँ ने बोला—
माँ: आओ बेटा।
मैं अंदर गया और पानी माँगा।
फिर वो अपनी माँ से बोलीं—
सोना: चलो मम्मी आप दवा खा लो और सो जाओ। मैं गुड्डी को ले आती हूँ। गुड्डी के पापा बोले हैं अभी 3-4 दिन बाद आएँगे।
मैं भी माँ जी से बोला—
मैं: अच्छा माँ जी मैं जाता हूँ सोने।
और रूम में आ गया।
मैं फिर से टीवी ही देखने लगा। करीब 11:30 बजे फिर दरवाजा खटखटाया। इस बार मुझे पक्का पता था कि सोना भाभी ही होंगी। क्योंकि उनके पापा बहुत शराब पीते हैं और 9 बजे के बाद तो उन्हें कुछ होश भी नहीं रहता था। मैंने दरवाजा खोला तो भाभी बोलीं—
सोना: सो गए थे क्या?
मैं: नहीं टीवी देख रहा था। नींद नहीं आ रही थी।
सोना: मुझे भी नींद नहीं आ रही है। मम्मी और गुड्डी सो रही हैं। टीवी खोलूँगी तो दोनों जाग जाएँगे।
मैं: हाँ आइए यहाँ पर देखिए टीवी।
फिर हम दोनों टीवी देखने लगे। और फिर टीवी देखते-देखते हम इधर-उधर की बात करने लगे। तभी मैंने बोला—
मैं: भैया कहीं गए हैं क्या?
सोना: हाँ। बोले हैं काम से जा रहा हूँ दोस्त के साथ।
मैं: आपको बताया नहीं किस काम से?
सोना: नहीं।
मैं: बस मेरे मुँह से निकल गया। इतनी अच्छी बीवी को छोड़कर कोई कैसे दूर चला जाता है।
तो वो हँसने लगीं और बोलीं—
सोना: अच्छा मैं अच्छी हूँ?
मैं: हाँ भाभी बहुत ज्यादा।
सोना: पर तुम्हारे भैया को तो मैं बिल्कुल अच्छी नहीं लगती?
मैं: जिसके पास होती है उसे कदर नहीं होती।
सोना: तुम्हें कदर है?
मैं: हाँ बहुत ज्यादा।
सोना: कितना ज्यादा?
मैं: बताऊँ?
सोना: बताओ।
बस मैंने जल्दी से उनका सिर पकड़ा और जोर से उनके लिप्स पर अपने लिप्स चिपका दिए। उउउउम्मममम।
करीब 15-20 सेकंड तक मैं उनके सिर को जोर से पकड़कर उनके लिप्स को चूसता रहा। उन्होंने झटके से फिर मुझे अलग किया और बोलीं—
सोना: क्या कर रहे हो पागल?
मैं: प्यारrrr।
और उन्हें अपनी तरफ खींचा और उन्हें गले से लगाकर उनकी पीठ, कमर और गर्दन को जोर से मसलने और चूमने लगा।
सोना: बस रुक जाओ सद्दाम प्लीज रुक जाओ।
और फिर भाभी ने मुझे धक्का देकर अलग किया और उठकर जाने लगीं।
मैंने उनका हाथ पकड़कर खींच लिया और बोला—
मैं: भाभी आई लव यू। मैं आपको बहुत चाहता हूँ।
सोना: पागल हो क्या? ये किसी को पता चल गया तो मेरा क्या होगा सोचा है?
मैं: कभी किसी को भी पता नहीं चलेगा। भरोसा कीजिए।
सोना: मुझे डर लग रहा है।
मैं: कुछ नहीं होगा। डरिए मत।
फिर मैंने उनकी कमर में हाथ डाला और उनको बाहों में कस लिया। और उनकी पीठ को सहलाने लगा। फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उन्होंने उठने की कोशिश की पर मैं जल्दी से उनके ऊपर चढ़ गया।
मैंने प्यार से भाभी के गाल को सहलाया और कहा—
मैं: भाभी डरिए मत। बस आज प्यार के लिए सोचिए। फिर कभी डर नहीं लगेगा।
सोना: लेकिन सद्दाम…
और मैं फिर उन्हें किस करने लगा। उउउउउमम कभी गाल पर, कभी नाक पर, होंठ पर, गले पर। और भाभी की चूत पर अपने लंड को दबा रहा था।
सोना: ह्ह्ह्ह्ममम ह्ह्मम नह्ह्ह्ही रुक जाओ।
और मैं चालू ही रहा।
अब मैं भाभी के ऊपर लेटकर ही बोला—
मैं: कैसा है मेरा कदर?
तो भाभी बस मुस्कुराईं और अब उन्होंने अपने दोनों हाथों से मुझे अपनी बाहों में कस लिया और हम किसिंग फिर से करने लगे। अब तो भाभी जोश में आ रही थीं। उन्होंने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर चढ़ गईं। और जोर-जोर से अपनी चूत मेरे लंड पर दबा-दबा कर लिप्स पर लिप्स रगड़ने लगीं।
हम दोनों की हाइट तो सेम थी लेकिन वो मुझसे मोटी थीं।
मैं: भाभी आप बहुत भारी हो।
और फिर उसे धकेलकर मैं उसके ऊपर फिर चढ़ गया। और अब मैं उसे बूब्स के बीच में किस कर रहा था।
सोना: ह्ममम उफ्फ्फ ह्ममम।
करीब 30-35 मिनट तक हम एक-दूसरे को जमकर चूमते-चाटते रहे।
फिर मैं उठा और अपनी टी-शर्ट और जींस उतारी। फिर मैंने उसकी जंपल उतारी तो वही ब्लू कलर की ब्रा उसने पहन रखी थी।
मैं: भाभी जिस दिन से आपको इस ब्रा में देखा है, बस आपके बारे में ही सोचता रहता था।
सोना: अच्छा, तो ये बात है।
फिर वो बोलीं—
सोना: मैंने भी कई बार ये बात नोटिस किया है कि तू मुझे किस नजर से देखता है।
बस मैं फिर से भाभी के ऊपर कूद पड़ा और उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही जोर-जोर से चाटने लगा।
सोना: कमीने नोच डालेगा क्या?
मैं: नहीं भाभी बस अब देखती जाओ।
और फिर मैंने भाभी को बैठाया। और उन्हें बाहों में कसकर झकड़ा और लिप्स चूसते-चूसते उनके ब्रा के हुक खोल दिए और ब्रा को उनके बूब्स से अलग कर दिया। अब उन्हें लिटाकर मैं उनके ऊपर चढ़ गया और दोनों बूब्स को हाथ में पकड़कर दबाने और चूसने लगा।
अब भाभी सीधी लेटी हुई हैं और मैं बैठ गया उनकी जाँघों के बीच। फिर मैंने उनके सलवार की डोरी खींची तो उन्होंने डोरी पकड़ ली।
मैं: खोलने दो ना।
फिर मैंने डोरी खींची और सलवार नीचे किया। तो देखा उसने सिल्वर कलर की पैंटी पहनी थी, जो गीली थी। मैंने उसकी पूरी सलवार निकाल दी और उसकी जाँघों को चूमने लगा।
फिर मैं पैंटी के पास अपना मुँह ले गया और जैसे ही उसकी पैंटी पर मुँह रखा—
सोना: उफ्फ्फ्फ्फ सद्दाम।
मैंने एक-दो किस पैंटी के ऊपर से किए। फिर उसकी पैंटी नीचे की। तो उसकी चूत पूरी गीली-गीली थी और उसने चूत के बाल भी नहीं साफ किए थे। मैंने एक कपड़ा लिया और उसकी चूत का पानी साफ किया।
मैं: ये बाल नहीं बनाती हो क्या भाभी?
सोना: हाँ बनाती हूँ, पर जल्दी नहीं।
फिर मैंने उसकी चूत में एक उंगली डाली तो उन्होंने आँखें बंद कर लीं।
फिर थोड़ी देर उंगली चूत में घुमाने के बाद मैंने उसकी चूत पर अपने लिप्स को रख दिया तो उनके मुँह से एक लंबी आआआह्ह्ह्ह निकली और हल्की सी मुस्कान। मैंने किस किया चूत पर और पूछा—
मैं: भाभी कैसा लगा?
सोना: बहुत अच्छा लग रहा है। गुड्डी के पापा ऐसा नहीं करते।
तो मैंने फिर से चूत पर किस किया और चूत में अपनी जीभ घुसाकर चाटने लगा।
सोना: आआआह्ह्ह्ह उउउह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ।
और वो उठकर बैठ गईं और मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगीं।
फिर थोड़ी देर में उनका पानी निकल गया और वो लेट गईं। अब मैं उठा और अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड भी गीला हो गया था। फिर मैं उसके ऊपर लेट गया और अपने गीले लंड को उसकी गीली चूत पर मसलने लगा।
सोना: ह्मममम आआआह्ह्ह।
और फिर मैंने लंड को चूत के छेद पर सेट किया और एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर हो गया। उनके मुँह से एक बार आआआह्ह्ह्ह निकला।
मैं: आप तो पहले भी कर चुकी हो फिर क्यों चीखीं?
सोना: कमीने, साइज का भी तो फर्क होता है।
और मैंने उसकी चूत में लंड अंदर-बाहर करने लगा। और हम दोनों एक-दूसरे को कसकर बाहों में झकड़े रहे और किस करते-करते कभी मैं तो कभी वो मेरे होंठ में दाँत काटतीं।
चुदाई करते-करते वो दो बार झड़ीं। फिर मेरा भी माल उसकी चूत में ही निकल गया। हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे। फिर हमने टीवी ऑन किया और देखने लगे। उस दिन भाभी ने मुझे बताया कि उनके पति उनको सच में पसंद नहीं करते।
सोना: कभी-कभी मैं बहुत रोती हूँ। उनका पति उन्हें अक्सर ऐसे अकेला छोड़कर चला जाता था।
उस दिन मैंने और भाभी ने सुबह 5 बजे तक चुदाई की। और फिर उस दिन मैं जॉब पर भी नहीं जा पाया क्योंकि मेरी नींद नहीं खुली। पर रात हुई और हमने फिर से चुदाई की। और दूसरी रात को मैंने भाभी की चूत के बाल खुद साफ किए और फिर काफी देर तक उनकी चूत को चाटा।
इस बार भाभी अपनी चूत मेरे मुँह पर रखकर बैठ गईं और मजे से अपना पानी मेरे मुँह में निकालतीं। और भाभी ने लंड भी चूसा जो उन्होंने कभी नहीं किया था।
5 दिन तक उनके पति नहीं आए और हमने बेहद चुदाई की। कभी बेड पर तो कभी फर्श पर। और जब उनके पति आ गए तो हम पूरी रात के लिए नहीं मिल पा रहे थे। फिर भाभी ने मुझे एक पर्चा दिया।
सोना: ये दवा ले आना।
मैंने लाकर दी। और उस रात भाभी फिर से पूरी रात के लिए मेरे पास आईं।
मैं: कैसे आज पूरी रात?
सोना: वो नींद की दवा थी। मैंने गुड्डी के पापा को खाने में खिला दी।
वो दिन और आज का दिन हम दोनों डेली चुदाई के खेल कर मस्ती करते हैं।
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वॉव अब मजा ही मजा था हम दोनों का। और उस दिन हम दोनों ने एक-दूसरे की पूरी बॉडी में ऑयल लगाकर चुदाई की। और ऐसा कई महीनों तक चलता रहा।
प्यारे दोस्तों अगर आपको मेरी देसी सेक्स स्टोरी पसंद आई हो तो मुझे जरूर मेल करें।