Chhoti bahan ki chudai ki kahani:- हाय फ्रेंड्स, मेरे एक फ्रेंड की स्टोरी आपके सामने, उसकी जुबानी: हाय, मेरा नाम सुनील है और मैं गुजरात के एक विलेज का रहने वाला हूँ। बहुत हिम्मत जुटा कर मैं ये कहानी लिख रहा हूँ। इसमें आपको मैं बताऊँगा कि कैसे एक छोटी सी गलती ने मेरी बहन को मेरे आगे लाकर खड़ा कर दिया। अब मैं ज्यादा वक्त न लेते हुए स्टोरी स्टार्ट करता हूँ। मेरी फैमिली में हम टोटल 6 मेंबर्स हैं।
Chhoti bahan ki chudai ki kahani
पापा जो कि टीचर हैं, मम्मी हाउसवाइफ और मेरे अलावा मेरी 3 सिस्टर्स हैं। मुझसे 3 साल बड़ी सिस्टर इंदु, मुझसे 2 साल छोटी सीमा और सबसे छोटी सिस्टर धारा।
करीबन कुछ 5 साल पहले सबसे बड़ी इंदु की शादी और मेरी शादी एक साथ हो गई। वो अपने हस्बैंड के साथ बड़ौदा शिफ्ट हो गई और मेरी भी अहमदाबाद में एक कंपनी में जॉब लग गई।
पहले तो हम किराये पर रहते थे, पर फिर लोन लेकर मैंने एक 3BHK फ्लैट ले लिया। मेरी वाइफ भाविनी को फिलहाल बच्चा नहीं चाहिए था, इसलिए उसने 2 बार बच्चा गिरा दिया फिर वो टैबलेट्स लेने लगी जिससे बच्चा न हो।
एक दिन खबर आई कि मेरी बहन सीमा ने अन्य कास्ट के लड़के के साथ भागकर शादी कर ली है और मेरे घरवालों ने उसके साथ सारे रिलेशन्स कट कर दिए थे।
अभी एक साल पहले सीमा और उसका हस्बैंड विनय भी अहमदाबाद शिफ्ट हुए जहाँ पर विनय ने पार्टनरशिप में कुछ बिजनेस चालू किया था।
उस टाइम सीमा और विनय हमें मिलने आए थे पर ये बात भाविनी को अच्छी नहीं लगी। इसलिए आइंदा से फिर सीमा और मैं कॉल/व्हाट्सएप पर ही चैट किया करते थे।
कुछ महीने पहले मुझे सीमा का कॉल आया कि उसके हस्बैंड को नया बिजनेस स्टार्ट करने के लिए कुछ पैसों की शॉर्टेज आ रही है तो उसने मुझसे 50,000 रुपये उधार चाहिए।
तो मैंने उसको वो मेरे घर आकर शाम को ले जाने को कहा। जब वो शाम को घर आई तो उसे देख के मैं हैरान हो गया। शादी के बाद मैं उसको पहली बार देखा। उसके बूब्स पहले से बड़े हो चुके थे और टाइट भी थे।
नई हेयर स्टाइल में वो अलग ही दिख रही थी। उसकी एस भी पहले से बड़ी हो गई थी। शॉर्ट में बोलूँ तो वो काली से गुलाब हो चुकी थी। कुछ देर तो सब भूल कर मेरी आँखों में लस्ट आ चुका, जिसे शायद वो भांप चुकी और मुझे एक किलर स्माइल दी उसने।
फिर वो अंदर आकर बैठी, चाय-नाश्ता किया और फिर मैंने अपनी बीवी को अंदर से पैसे लाने को कहा। भाविनी ने मुँह बनाते हुए पैसे लाकर दिए और पूछा कि कब तक लौटाओगी, तो सीमा ने मैक्सिमम 1 महीने के अंदर देने को कहा और फिर वो चली गई।
ऐसे ही 1 महीने के ऊपर 1 हफ्ता और हो गया। भाविनी मुझे रोज पैसे के बारे में पूछती और मैं उसे टाल देता।
सीमा भी मुझे व्हाट्सएप पर नेक्स्ट वीक का वादा करती रहती, और मुझे फिलहाल पैसों की जरूरत नहीं थी इसलिए मैंने उस पर कोई दबाव नहीं डाला।
ऐसे ही 2 महीने भी बीत गए। एक दिन खबर मिली कि मेरे ससुर को हार्ट अटैक आया है और हाफ बॉडी पैरालिसिस हुआ है।
तो हम फौरन गाँव चल दिए। मेरी मार्च एंडिंग होने से मैं ज्यादा छुट्टी नहीं ले सकता था, तो मैंने भाविनी को वहीं रुकने के लिए कहा जब तक उसके पापा ठीक नहीं हो जाते और मैं वापस अहमदाबाद आ गया और रूटीन जॉब चालू हो गई मेरी।
3 दिन बाद जब ऑफिस में मेरी मीटिंग चालू थी और फोन साइलेंट पर रखा था। जब दोपहर को मैंने देखा तो मोबाइल में सीमा की 5 मिस कॉल थीं।
मैंने उसे व्हाट्सएप किया:
मैं: क्या हुआ?
सीमा: भाभी की कॉल आई थी और वो पैसों के बारे में पूछ रही थी।
मैं: मुझे इसका कुछ नहीं पता।
सीमा: वो बोल रही थी कि पैसे लौटाने का विचार है कि नहीं।
मैं: उसकी बातों को दिल पे मत ले, मुझे फिलहाल पैसों की जरूरत नहीं है।
सीमा: पर भाभी…?
मैं: उसको मैं समझा लूँगा।
सीमा: हम्मम
मैं: तुम पैसे देने की टेंशन मत लो। विनय को वो लगेंगे पैसे बिजनेस में। अगर ज्यादा पैसे चाहिए तो मैं तेरी भाभी से छुपाके तुझे दे दूँगा।
सीमा: थैंक्स भैया।
मैं: यू आर वेलकम।
सीमा: 🙂
मैं: और तुम चाहो तो ये पैसा मुझे बाद में पे कर सकती हो। 😉
सीमा: भैया, ये आप क्या कह रहे हैं?
मैं: ठीक ही तो कह रहा हूँ। अगर कहीं और से लेती तो उसका ब्याज कितना देना पड़ता। इसलिए मैं कहता हूँ वैसा कर। मुझे फिलहाल पैसों की कोई जरूरत नहीं है।
कुछ देर के लिए सीमा का रिप्लाई नहीं आया, जैसे कि वो कुछ सोच रही हो।
मैं: सीमा।
मैं: आर यू देयर..?
मैं: हेलो।
मैं: क्या हुआ, रिप्लाई क्यों नहीं दे रही…
मैं: हेलो।
सीमा: जी भैया।
मैं: क्या हुआ, कहाँ गई थी।
सीमा: कुछ नहीं भैया।
सीमा: भाभी घर पे नहीं हैं क्या…?
मैं: नहीं। वो अपने मायके गई हैं 10 दिनों के लिए।
सीमा: हम्मम
मैं: वो नहीं हैं, इसलिए तो तुमसे ये बात कर रहा हूँ। 10 दिन घर पे अकेला ही हूँ।
सीमा: ओके
सीमा: ठीक है भैया, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ। बाय।
मैं: बाय। टेक केयर।
फिर जब मैं शाम को ऑफिस से घर जाने की तैयारी कर रहा था तब सीमा की कॉल आई।
सीमा: हेलो भैया, कहाँ पे हो?
मैं: बस अब ऑफिस से निकल रहा हूँ।
सीमा: वो एक्चुअली क्या है कि, विनय को बिजनेस के सिलसिले में आउट ऑफ स्टेशन जाना पड़ा, और मुझे अकेले में डर लगता है तो क्या आज की नाइट आपके घर पे सो सकती हूँ।
मैं: ओके। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
सीमा: थैंक्स भैया। तो फिर आप घर जाते वक्त मुझे मेरे अपार्टमेंट के बाहर वाले बस स्टॉप से पिक कर लेना।
मैं: ओके, मैं वहाँ आधे घंटे में पहुँच जाऊँगा।
सीमा: ठीक है। मैं रेडी रहूँगी।
मैंने सोचा अच्छा है, बहुत दिन बाद अपनी सिस्टर की कंपनी मिलेगी।
मैंने सीमा को पिक अप किया। उसने उस टाइम सिंपल सी साड़ी पहनी हुई थी। उसने बीच में अपना बैग रखा और हम घर आ गए। घर में एंटर होते ही उसने एक जोर सी चैन की साँस ली।
मैं: क्यों, क्या हुआ…?
सीमा: कुछ नहीं, बस ऐसा लग रहा है जैसे आज आजादी मिली है।
मैं: क्यों…. लव मैरिज तो तूने खुद की है ना।
सीमा: वो तो है भैया। विनय भी अच्छे हैं, मेरा ख्याल भी रखते हैं लेकिन… (सीमा कुछ सोच में पड़ गई)
मैं: लेकिन क्या, कोई लड़की का चक्कर है क्या?
सीमा: अरे नहीं। वैसा कुछ नहीं। नए बिजनेस के चक्कर में उनको अब पहले जितना टाइम नहीं मिलता। (ये बोलकर, वो थोड़ा उदास हो गई, मैंने उसके गाल पे चिमटी काटते हुए कहा:)
मैं: तू टेंशन मत ले। सब अच्छा हो जाएगा। बोल तो आज तेरी आजादी तुझे कैसे एंजॉय करनी है?
सीमा: (हँसते हुए) आज फुल धमाल। पहले खाना खाएँगे और बाद में अच्छी मूवी, बहुत टाइम से मैं थिएटर नहीं गई।
मैं: ठीक है फिर। पहले फ्रेश हो जाते हैं, फिर चलते हैं।
सीमा: थैंक्स भैया।
और सीमा मेरे गले में लिपट गई। उसके ऐसे टच ने तो मानो मेरे अरमान हिला दिए। उसके बड़े बूब्स के पॉइंटेड निप्पल मेरी चेस्ट में चुभ रहे थे।
थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और फ्रेश होने चले गए। मैं रेडी होकर गेट पे इंतजार कर रहा था और जब सीमा बाहर आई तो मैं तो देखता ही रह गया।
उसने टाइट ब्लैक जींस और ऊपर रेड टी-शर्ट डाला हुआ था। बिल्कुल पटाखा लग रही थी। मुझे उसे ऐसे घूरते हुए देख उसने पूछा—
सीमा: क्या हुआ भैया?
मैं: कुछ नहीं। वो तो तुम्हें देख के ख्याल आया कि, आते वक्त तो तुम सावित्री थी और अब तो सनी लग रही हो।
वो हँसने लगी, मुझे लगा उसे शायद सनी से कंपेयर किया तो उसे बुरा लगा होगा।
बाइक पे वो पीछे बैठी तब मैंने उसे सॉरी बोला।
सीमा: सॉरी किसलिए?
मैं: वो तुम्हें सनी जैसा बोलने के लिए।
सीमा: डोंट बी सॉरी भैया। मेरी कॉलेज में सनी जैसा दिखना एक कॉम्प्लिमेंट था। लगता है आप सनी के फैन हैं। (और वो हँसने लगी)
मैं: वो तो सभी लड़के होंगे। तेरा विनय भी होगा शायद।
सीमा: पहले का पता नहीं, पर अब तो वो सिर्फ मेरा फैन है। और मैं सिर्फ सनी जैसी लगती हूँगी, बाकी सब।
मैं: (चिढ़ाते हुए) चुप क्यों हो गई….? बाकी सब क्या….?
सीमा: (मुझे हल्के से धक्का मारते हुए) आप भी ना भैया। वो सब छोड़िए, आप समझ लीजिए कि बाइक पे आज पीछे मैं नहीं, सनी बैठी है।
और सीमा ने मेरे पेट के ऊपर हाथ बाँध दिए और मुझसे चिपक कर बैठ गई, अपना सिर मेरे कंधों पे टिका दिया। मेरा तो पैंट में तंबू बनाने लगा।
फिर हमने होटल में खाना खाया, एक मूवी देखी। थिएटर में भी सीमा मुझसे सट कर बैठी थी। उसके दिमाग में क्या चल रहा है, मुझे पता नहीं था। पर उसके ऐसे व्यवहार से मैं एक्साइट हो गया था। फिर करीबन 11:45 को हम वापस घर आ गए।
आगे क्या हुआ, ये अगले पार्ट में बताऊँगा। जल्द ही मैं लेकर आऊँगा अगला पार्ट। मेरी ये स्टोरी कैसे लगी….? लाइक कीजिए और कमेंट्स कीजिए। धन्यवाद।