Malkin ki budhe chaukidar se chudai:- अनिल की मौत के बाद स्नेहा विधवा हो गई थी। गोपीलाल और नया चौकीदार बिरजू हवेली में थे। स्नेहा की सेक्स की भूख दिन-ब-दिन बढ़ रही थी।
Part 2 ==> बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 2
Jawan Malkin ki budhe chaukidar se chudai
इस तरह कुछ और दिन बीत गए। गोपीलाल ने उस रात जो देखा था वो भूल नहीं पा रहा था। हर रात सोते वक्त अनिल-स्नेहा के बीच जो सेक्स हुआ था वो सोचकर मुठ मारता था। इस बुड्ढे पर आकर भी लगता था कि लंड को कसए हुए कोई चूत में घुसा दे। और वो सिर्फ स्नेहा के बारे में ही सोच रहा था। उस छेद से उस रात स्नेहा का नंगा रूप देख लिया था इस बुड्ढे ने और सोचा कि यही काम नहीं है इसके जीवन के लिए। लेकिन वक्त एक ऐसी मोड़ लेकर आएगा स्नेहा मजबूर हो जाएगी इस बुड्ढे से अपनी जिस्म की भूख मिटाने के लिए। इधर जग्गू हर दिन रात चौकीदारी में ही व्यस्त था। अंदर एक खूबसूरत सी चीज रहती है इसका ध्यान नहीं था।
एक दिन खबर आया कि उदयपुर की जागीरदारी संभालते समय अनिल साहब बीमार पड़ गए। दो दिन बाद पता चला डेंगू फीवर। इस डेंगू की बीमारी इतनी भारी पड़ रही थी कि अनिल साब को आईसीयू में एडमिट करना पड़ा। घर के सब लोग परेशान थे। शारदा देवी और स्नेहा रोने लगे और भगवान से प्रार्थना की। लेकिन फिर भी बहुत ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अनिल का मौत हो जाता है। इसी तरह सबके दिल दुख से भर जाते हैं। स्नेहा मानो टूटकर बिखर जाती है अनिल के बिछड़ने के गम में। स्नेहा की जिंदगी में अब सिर्फ उसकी सास माँ शारदा ही थीं। इस हवेली का मुखिया मर चुका है इसलिए शारदा स्नेहा को कहा कि तुम अब से इस हवेली और जागीरदारी को ख्याल रखो बेटा।
स्नेहा: लेकिन माँ क्या मैं इतना कारोबार संभाल पाऊँगी?
शारदा: मैं जितना दिन जिंदा हूँ तुम्हारा मदद कर लूँगी।
अनिल साब के मौत के लिए सब लोग कुछ दिन चुपचाप काम कर रहे थे। गोपीलाल भी चुप सा हो गया था। लेकिन दिन बीतते जा रहे थे और वक्त के साथ-साथ सब कुछ नॉर्मल सा लगने लगा था। इनमें से एक दिन जग्गू ने एक चोरी कर बैठा। बाहर से अंदर का दरवाजा तोड़कर शारदा देवी के कमरे में जाके कुछ पैसे लेकर भाग गया। और कभी वापस नहीं आया। फिर शारदा देवी ने एक और चौकीदार रख दिया काम के लिए। उसका नाम था बिरजू। शारदा देवी को रसोई में काम करने वाली एक आया ने उसका पता दिया था और शारदा देवी ने उसे रख लिया।
गोपीलाल के सेम एज का था। देखने में गोपीलाल जैसा उतना काला नहीं था लेकिन रंग साँवला था। देखने में बासूरत था। बाल कुछ थे सिर पर। दोस्तो हम आश्चर्य हो जाएँगे सुनके कि ये भी गोपीलाल की तरह थरकी है। हालाँकि गोपीलाल बहुत लड़कियों को वैश्या के अड्डे में जाके चुदी थी लेकिन बिरजू वैसा नहीं था। वो खूबसूरत औरतों और लड़कियों को सिर्फ देखता था और आँखों से ही मानो बलात्कार कर देता था। उसकी सोच भी गंदी है।
जब बिरजू ने शारदा देवी को नमस्ते किया तब हवेली बाहर ही खड़े थे और शारदा देवी ने कहा—
शारदा: चलो तुम अब हवेली के नए चौकीदार हो तो तुम्हें सबसे मिलवाती हूँ। चलो हवेली के अंदर। वहाँ मेरी बहू है और कुछ लोग हैं। चलो आओ।
बिरजू: चलिए रानी माँ।
हवेली के अंदर आते ही बिरजू से गोपीलाल का मुलाकात हो जाती है।
गोपीलाल: आइए काका। आपका नाम क्या है?
बिरजू: बिरजू है।
गोपीलाल: ओ तो फिर हम सब आपको बिरजू काका कहकर पुकारेंगे।
बिरजू: कोई बात नहीं। आप भी तो मेरे उम्र की ही हैं। आपको मैं गोपी काका कहूँगा।
गोपीलाल: ठीक है तो फिर हम भाई हैं एक-दूसरे के।
ये कहते ही दोनों ने मुस्कुराने लगा।
अचानक सीढ़ियों से धीरे-धीरे लाल रंग की साड़ी में एक अप्सरा नीचे आने लगी और शारदा देवी से बात करने लगी। तभी भी बिरजू बुड्ढे ने नोटिस नहीं की स्नेहा को। जब शारदा देवी ने सामने को पुकारा तब बिरजू ने स्नेहा के सामने आया।
स्नेहा: नमस्ते काका। आपको इस हवेली में स्वागत है। मैं इस हवेली की छोटी बहू।
बिरजू: अरे ये तो बहुत खूबसूरत है। वाह्ह्ह वाह्ह्ह क्या रंग है क्या जिस्म है एकदम भरा हुआ है। क्या माल है रे आआआआ ये चिंता करने लगा और दौरान नमस्ते किया स्नेहा को।
बिरजू ने जब स्नेहा बात करने लगा उसके साथ तब एक झलक स्नेहा को गौर से देख लिया। इस बुड्ढे पर आकर भी उसे ऐसी खूबसूरत चीज करीब से देखने का मौका मिला है और वो भी कितना सेक्सी लग रही लाल साड़ी में। कुछ पल के लिए बिरजू बुड्ढे ने उसके ट्रांसपेरेंट साड़ी के अंदर से उसके पेट और गहरी नाभि को देख लिया था। और गंदे सोच में पड़ गए।
स्नेहा: क्या हुआ? कहाँ खो गए काका? वैसे आपका नाम क्या बताया था?
बिरजू: जी मेरा नाम बिरजू है।
स्नेहा: तो फिर मैं आपको बिरजू काका बुलाऊँ यही ठीक है।
बिरजू: ठीक है बहुरानी।
कहकर एक शैतानी मुस्कान दिखाया।
जब इन दोनों से बातचीत हो रही थी तब गोपीलाल नहीं थे सामने। शारदा देवी ने उसे ऊपर काम करने भेज दिया था। बिरजू चौकीदारी का काम कर रहा था और उनके लिए भी सेपरेट रूम ठीक हो चुका था। जिस रूम में गोपीलाल रहता था उसी कमरे में। दिन ऐसे ही बीतता जा रहा था। अनिल के खोने का गम अब बहुत ही कम हो चुका था सबके मन में। लेकिन स्नेहा की जो उम्र थी उसके लिए जीना काफी कठिन हो गया। एक मैच्योर सेक्सी वाइफ की अगर शादी के दो बरसों के बाद पति मर जाता है तो कैसा बीतता है वो तो सिर्फ स्नेहा ही जानती थी। लेकिन इस राजवंशी जागीरदार परिवार में एक ट्रेडिशन कायम थी कि कोई जवान विधवा औरत दूसरी शादी नहीं कर सकती।
और ये शादी से पहले स्नेहा और उसके परिवार को भी मालूम था। क्योंकि अगर दूसरा कोई आ जाए तो इस परिवार बिखर जा सकता है इसलिए ये नियम जारी थी। स्नेहा भी कुछ कहती नहीं थी। उसकी अंदर दिन-ब-दिन जो कामाग्नि की ज्वालामुखी चर रही थी वो सिर्फ चुपचाप सहती रही। लेकिन शारदा देवी कुछ अंदाजा कर ली थी। आखिर वो भी तो एक औरत है।
स्नेहा की दो सहेलियाँ थीं जो काफी क्लोज्ड थीं। एक का नाम था गुंजन और दूसरे का नाम था शालू। एक कॉलेज का और दूसरे कॉलेज का फ्रेंड। इन दो सहेलियों का आना-जाना था हवेली में। एक दिन स्नेहा का बर्थडे था तो वो दोनों अचानक ही उसे सरप्राइज करती हैं हवेली में आकर।
स्नेहा: अरे तुम दोनों कब आए?
सोफे में बैठी थीं दोनों।
गुंजन: हम लोग तो अभी-अभी आए। मेनी मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे।
शालू: हैप्पी बर्थडे स्नेहा। भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे। जियो हजार साल।
स्नेहा: (मन में) हजार साल जियो कैसे? मेरे लिए तो अब एक-एक दिन जीना मुश्किल हो रहा है। कैसे बताऊँ तुम लोगों को।
शालू: तुम कुछ कहा?
गुंजन: तुझे देख लगता है तू किसी चीज से परेशान है। क्या हुआ?
स्नेहा: नहीं तो मैं ठीक हूँ। कोई परेशानी नहीं। चलो गार्डन में जाते हैं।
गुंजन: ओके।
गार्डन में जाकर देखती हैं एक कोने पर गोपीलाल खड़ा है छोटे-छोटे पेड़ों पे पानी डाल रहा है। तीनों ने एक बार गोपीलाल की तरफ देखा। गोपीलाल भी तीनों की तरफ देखा। इन लोगों के बीच दूरी थी।
गोपीलाल तीनों को देखकर एक झलक स्नेहा को ऊपर से लेकर नीचे तक आँखें फाड़के देख रहा था। पता नहीं गोपीलाल को क्या हो जाता है स्नेहा को अगर एक बार देख ले तो नजर हटा नहीं पाता। आखिर गोपीलाल एक ही पराया मर्द था जो स्नेहा की जवान रस भरी गोरी नंगी बदन को देख लिया था। और ये बात किसी को भी नहीं मालूम था इसलिए जब भी स्नेहा को देखता था वो अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पाता।
ये ही सब ने नोटिस किया उस समय।
गुंजन: स्नेहा ये तेरा नौकर है ना? क्या नाम बताया था?
स्नेहा: इसका नाम है गोपीलाल। पहले चौकीदार थे। अब माँ जी ने उनको गार्डन की और अंदर घर की नौकरों को देखभाल करने को कहा।
शालू: देख देख कैसे देख रहा है हमें।
गुंजन: हमें नहीं। इस बुड्ढे की नजर अब सिर्फ स्नेहा पर अटकी हुई है।
स्नेहा ने जब नोटिस किया तो गुस्से से देखा गोपीलाल को। तभी गोपीलाल अपनी नजर हटाई।
स्नेहा: ये बुड्ढा पहले से ही ऐसा है। पता नहीं क्यों मुझे घूरता रहता है जब भी इनके सामने आती हूँ।
शालू: तो तुमने माँ जी को बताया क्यों नहीं?
गुंजन: जैसे देख रहा था लगता है खा जाएगा। देखने में भी काला और बदसूरत।
शालू: एक और चीज बोलना भूल गई। गेट पर देखा एक नया चौकीदार रखा है। इसकी नजर भी कुछ ठीक नहीं लगता। तो हम दोनों को ऐसी ही देख रहा था।
गुंजन: मुझे ये समझ नहीं आती है कि ये लोग हम लोगों को ऐसी देखते क्यों हैं। ये तो बुजुर्ग हैं हमारे पिता समान हैं।
स्नेहा: क्या कहती हो तुम। वो बुड्ढा चौकीदार की नजर भी गंदी है… हे राम… मैं कहाँ जाऊँ। तुम लोग क्या कह रहे हो। मैं क्या कंप्लेंट कर दूँ माँ जी से?
शालू: कंप्लेंट करने की जरूरत नहीं है। हमें अफसोस है कि ये लोग ऐसे देख रहे थे। लेकिन ये तो तुम्हें और हम लोगों को रिस्पेक्ट भी करते हैं। हो सकता है बुड्ढापे में इन लोगों को राइट-रॉन्ग समझने का दिमाग नहीं है।
गुंजन: हाँ तुम छोड़ दो। अगर देखेगा तो देखने तो बंद थोड़ी करेगा तुम्हें। बुजुर्ग आदमी लाचार और गरीब हैं ये लोग।
स्नेहा: हम्म ठीक है। लेकिन बिरजू काका के बारे में कुछ और ही सोचा था। सोचा था कि ये बुड्ढे बहुत ही शांत और अच्छे हैं। गोपीलाल की तरह नहीं हैं। लेकिन तुम लोगों के साथ ऐसा किया लेकिन मेरे साथ तो नहीं किया कभी भी।
शालू: क्या नहीं किया?
स्नेहा: यही कि गंदे नजर से देखा। कभी भी नहीं देखा।
गुंजन: हमारे साथ अगर ऐसा हुआ है तो तुम्हारे साथ तो होना चाहिए था क्योंकि तुम तो बहुत खूबसूरत हो हमसे।
स्नेहा: अरे धत्त… क्या बकती हो।
शालू: हाँ ठीक ही तो कह रही है। तुझे मालूम नहीं तू इतनी खूबसूरत पहले से ही थी कि कॉलेज में भी जितने मेल टीचर थे तुझको घूरते रहते थे। मुझे अभी भी याद है सिर्फ लड़के ही नहीं बुड्ढे आदमी भी।
स्नेहा: चुप कर। क्या बुड्ढे-बुड्ढे लगा रखा है।
गुंजन: आजकल तो ऐसे खबर भी न्यूज पे आने लगा है सास के साथ बहू का कामलीला। बुड्ढे बॉस के साथ भी अफेयर हो रहा है।
स्नेहा: लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है?
शालू: किसी को पैसे की जरूरत होती है। किसी को काम में तरक्की करनी पड़ती है। और ऐसा भी हो सकता है कुछ औरतें अपनी जिंदगी में सुखी नहीं हैं सेक्सुअली इसलिए मजबूरी में आकर अपने आपको सौंप देती हैं।
स्नेहा: छी ऐसा सोचना भी घिन आता है बुड्ढे उम्र के साथ।
गुंजन: वैसे तुम्हारा पति मर चुका है। 4 महीने बीत गए। तुम ठीक तो हो ना। मैं जानती हूँ इस उम्र में सुहाग के बिना कैसा लगता है।
स्नेहा: नहीं नहीं मुझे कोई परेशानी नहीं है। ठीक हूँ मैं।
ऐसी ही कुछ और ढेर सारी बातें करने के बाद बर्थडे केक काटकर खाना खाने के बाद स्नेहा की सहेलियाँ चली गईं। स्नेहा अपनी बेडरूम में जब उस दिन रात में सो रही थी तो उसने अपने सुहाग के साथ सेक्स की मोमेंट को याद करने लगी। करते-करते कब उसका हाथ अपनी चूत पर जा चुका था उसकी खबर ही नहीं थी स्नेहा को। ऐसा भरा हुआ बदन, दो बड़े-बड़े बूब्स, रसीले होंठ, गोरी गठीली गर्दन, गोरा थोड़ा सा फैटी पेट, गहरी नशीली नाभि, गुलाबी क्लीन चूत और तरबूज जैसा खिलती हुई फैटी दो गाँड की हिस्सा, क्लियर आर्मपिट, बड़े-बड़े निप्पल जो बूब्स को और भी सेक्सी किए हैं और पैर और मदमास्त कमर जिस औरत को कामदेवी की तरह बनाके रखा है। उस कामदेवी ने तो कामरस के बिना दिन-ब-दिन रात और रात अंदर से सेक्स करने के लिए तड़प रही थी। ये कोई भी नहीं जान पाया था।
कुछ दिन बाद की घटना—
शारदा: स्नेहा तुम जाओगे मेरे साथ पूजा के लिए? मंदिर जा रही हूँ। सभी लोग जा रहे हैं।
स्नेहा: माँ जी मुझे बुखार है शायद। नहीं जा पाऊँगी। सर में भी दर्द है।
शारदा: अरे हाँ। स्नेहा का सर छूके बोलती है बहुत बुखार है। जाओ तुम रेस्ट करो। अपनी कमरे में जाओ।
स्नेहा: तो सब लोग जा रहे हैं माँ जी?
शारदा: हाँ। बाहर चौकीदार है बिरजू और अंदर सिर्फ कमला है और गोपीलाल है। तुम फिकर मत करो। ठीक है।
स्नेहा: ठीक है माँ जी।
दो घंटे बाद ऊपर से बीमार पड़ी स्नेहा ने कमला को जोर-जोर से पुकारा था लेकिन कोई आवाज नहीं आई। कमला रसोई में काम करने वाला एक सर्वेंट था। शारदा देवी ने बताया था कि स्नेहा को जब किसी चीज की जरूरत हो तो उसे दे देना। उसके आसपास रहना। लेकिन कमला नीचे टीवी देखते-देखते नींद में गुम होकर सो गया। स्नेहा अपनी बिस्तर से उठती है और धीरे-धीरे कमजोर शरीर लेकर नीचे जाकर देखती है कमला सोफे में माथा टिकाकर सो रही है और टीवी जोर से ऑन है। इसलिए स्नेहा की कमजोर आवाज ऊपर से नीचे तक कमला को सुनाई नहीं दी।
दरअसल स्नेहा की दवाई वो सोफे पर ही भूल गई थी। जब शारदा देवी के साथ बात कर रही थी तब। अब जब नीचे आ ही गई तो उसने सोचा खुद ही अपना मेडिसिन टैबलेट पी ले। तो कमला को नहीं जगाया। सोचा कि कुछ पल के बेचारा सो रहा है तो सोने दो। वैसे घर में काम भी नहीं है। जब दवाई खाने के लिए पानी पीने डाइनिंग टेबल पहुँची तो देखा तीन जार में से एक जार में भी पानी नहीं है। सब के सब खाली हैं।
स्नेहा: देखो तो सब के सब बेकार हैं। अरे नौकरो कुछ तो ख्याल रखा करो इन चीजों का।
कहती ही रसोई के अंदर से पानी लाने का मन स्थिर करती है स्नेहा। रसोई की जो घर था वो बड़ा था। उसी के एक कोने में एक कमरा गोपीलाल को रहने के लिए दिया गया था। पहले तो बाहर बिरजू जो सर्वे में रहता था उस घर में रहता था लेकिन रसोई में काम करने वाले कुछ लोग आगे चला गया था ये मैं बताया था पहले अपडेट में। जब चला गया था तब से गोपीलाल इस कमरे में रहा। अंदर जब रसोई में आकर घुसी स्नेहा को गोपीलाल के कमरे से जोर-जोर से नाक खर्राटे की आवाज आ रही थी अपने कानों में।
स्नेहा: अरे गोपीलाल इस समय सो रहा है क्या? इस समय तो वो कभी भी नहीं सोता। उसे तो गार्डन में होना चाहिए था।
पता नहीं क्यों स्नेहा ने उसके कमरे के कुछ करीब खड़ी हुई और देखा दरवाजा खुला है थोड़ा सा। अंदर की सीन दिखाई दे रहा है। स्नेहा को ना जाने क्यों गोपीलाल पर गुस्सा आया और उनको डाँटने के लिए उसे जगाने का मन स्थिर किया। ऐसा करने के लिए वो दरवाजे के करीब आकर दरवाजे को धीरे से और भी खोलना चाहा और खुलकर स्नेहा अंदर जो देखा वो चीज उसे हैरान करके रख दिया।
स्नेहा ने जो दरवाजा थोड़ा सा खुला था उसे और भी खोलकर देखा कि दरवाजे के बराबर गोपीलाल के दो पैर हैं और उसने सिर्फ धोती में सोए हुए हैं। धोती काला शरीर एकदम नंगा ही था। एक हाथ सीने में और दूसरा हाथ उनके बड़े से लौड़े को पकड़ रखा था जो सफेद धोती से बाहर आ चुके थे। सिर्फ इतना ही नहीं इतना बड़ा काला लंड था कि इस बुड्ढे सो रहे हैं फिर भी अपनी सीधी आकार की रूप धारण कर चुका है यानी लंड एकदम स्ट्रेट होकर खड़ा था। ऐसा लगता है कि एक डंडा दो पैरों के बीच खड़ा है।
स्नेहा: ओह!! ये क्या है?
ये बोलते ही स्नेहा की आँखें बड़ी हो जाती हैं। वो चीज देखकर बिल्कुल शॉक्ड। स्नेहा बाहर निकल पड़ती है। अंदर जाने की हिम्मत स्नेहा को नहीं हुई। लेकिन फिर भी गोपीलाल का वो चीज उसे एक फैसिनेशन की दुनिया में डूबाकर रख दी। इसलिए वो दरवाजे को थोड़ा सा बंद करने ही वाली थी लेकिन उसकी एक और दिल थी जो कमजोर थी। ऐसी चीज उसने पहले कभी भी नहीं देखा। किसी आदमी का लंड इतना बड़ा कैसे और इस उम्र में ऐसा कैसे? हे राम!! ये सोच रही थी और बाहर जाने ही वाली थी कि एक बार उस कमजोर दिल ने कहा स्नेहा एक बार फिर देख तो ले चीज को।
स्नेहा दूसरी बार जब लंड की तरफ देखा तो देखते ही रह गई। एक काला लंड जो बड़ा भी था और मोटा भी। स्नेहा अब चली जाती है वहाँ से। और अपनी बेडरूम में जाकर सोचने लगती है। हालाँकि उसकी बीमार शरीर थी लेकिन जो चीज उसने आज देखा उसकी बीमारी को हटा दी।
स्नेहा (मन में): सोते-सोते… हे राम… ये मैंने क्या देख लिया किसी पराए मर्द की गुप्त अंग। वो भी एक बुजुर्ग एक बुड्ढे उम्र का जो मेरे पिता समान है। लेकिन इतना सख्त वो चीज कैसे हुआ? मेरे पति का तो इसकी आशा की भी बराबरी नहीं थी। उफ्फ ऐसा क्या हो रहा है। मुझे अब सोना चाहिए।
ऐसा कहकर सोने की कोशिश की स्नेहा लेकिन बार-बार उसके आँखों में गोपीलाल का काला लंड आने लगता है। उसे पता चलता है स्नेहा अब ऐसी जिंदगी गुजार रही है कि उसे एक लंड चाहिए। ऐसा लंड जिसे देखकर वो हैरान हो और उससे चुदाई भी हो एकदम धमादार कड़ी से कड़ी चुदाई। स्नेहा की प्यासी चूत को अब ऐसा ही लंड ठंडा कर सकता है। स्नेहा ये फील तो कर सकती है लेकिन ऐसा हो ये सोचना नहीं चाहती।
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