Mummy ki chut chudai ki kahani:- नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम गौरव है। मेरी उम्र 21 साल है। मैं कॉलेज में पढ़ रहा हूँ। मेरी ये कहानी मम्मी के साथ हुई घटना पर है। मम्मी का नाम बबली है। उनकी उम्र 40 साल है। देखने में ठीक-ठाक, मगर उनका जिस्म पूरा भरा हुआ है। उनका फिगर 40-38-44 साइज का है। मम्मी पूरे दिन घर में रहती हैं। मम्मी और पापा की हमेशा लड़ाई होती है। जिसका कारण हमारी एक रिश्तेदार है। पापा का और उसका चक्कर चल रहा है।
मम्मी ने कई बार पापा का झूठ पकड़ा है। मगर शायद वो मेरी वजह से कुछ कहती नहीं थीं। इसलिए अब मम्मी और पापा ज्यादा बात नहीं करते थे।
Mummy ki chut chudai ki kahani
मैं हमेशा मम्मी के साथ रहता हूँ। उन्हें मार्केट लेके जाता, उन्हें उनकी पसंद की चीजें खिलाता, जिससे वो थोड़ा खुश रहती थीं।
मम्मी हमेशा साड़ी ही पहनती हैं। वो साड़ी हमेशा अपनी नाभि से थोड़ा सा नीचे पहनती हैं। जिससे उनकी नाभि साफ दिखती है।
मुझे हमेशा से डीप नाभि वाली आंटी ज्यादा पसंद हैं। मम्मी की नाभि एकदम गोल और काफी गहरी है। मम्मी जब भी मेरे साथ मार्केट जातीं, लोग हमेशा उनकी नाभि देखते हैं।
मम्मी की नाभि देखकर मेरा लंड हमेशा खड़ा रहता है। मैं मम्मी से हमेशा मजाक करता रहता हूँ।
मैं: मम्मी आप आज भी इतनी खूबसूरत हो। कि लोग आज भी आपको ही देख रहे हैं।
मम्मी: अरे बेटा ऐसा कुछ भी नहीं। वो तो हर औरत को खा जाने वाली नजरों से देखते हैं।
मम्मी और मैं हर रोज दोपहर को टीवी देखते हैं। तब मम्मी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में होती हैं। मैं उनके साथ लेटकर हमेशा उनकी नाभि से खेलता रहता हूँ।
मेरी उंगली हमेशा उनकी नाभि में घूमती रहती थी।
मम्मी: बेटा तूने उंगली कर-करके मेरी नाभि और ज्यादा गहरी कर दी है।
मैं: मम्मी मेरे करने से क्या होगा। ये तो पहले से ही इतनी गहरी है।
मम्मी: बेटा जब तू छोटा था। तब तू मेरी नाभि में कंचा डालके खेलता था।
मैं: मैं अभी भी कौनसा बड़ा हुआ हूँ। मैं तो अभी भी कंचा डालके खेलूंगा।
मैं अपने कमरे में गया और सफेद रंग का कंचा ले आया। मैंने कंचा सीधा मम्मी की नाभि में डाल दिया। मैं बार-बार कंचा निकालता और डालता। मम्मी मुझे देखकर हंस रही थीं।
मैं रोज मम्मी की नाभि से खेलता हूँ। जब कभी मम्मी-पापा की लड़ाई हो जाती, तब मम्मी मेरे कमरे में आकर सो जाती थीं।
जब भी मम्मी मेरे साथ सोती थीं, तब मैं उनके पेट पर हाथ रखकर सोता था। जब कभी भी मैं मम्मी की नाभि में उंगली करता, तब उनके निप्पल टाइट हो जाते थे।
एक दिन मैं और मम्मी दोपहर में लेटे टीवी देख रहे थे।
मम्मी: बेटा मेरे पेट में दर्द हो रहा है।
मैं: मम्मी चलो डॉक्टर के पास चलते हैं।
मम्मी: बेटा तू अजवाइन और लहसुन का तेल गरम कर। मैं लगा लूंगी। उससे आराम मिल जाएगा।
मैंने मम्मी को एक टैबलेट खिलाई और किचन में जाके तेल बना के ले आया।
मम्मी: ला बेटा मैं लगा लेती हूँ।
मैं: मम्मी तुम लेटी रहो। मैं लगाता हूँ। मैं तुम्हारी नाभि में उंगली करता रहता हूँ। शायद इसलिए ये दर्द हो गया। मुझे माफ कर दो मम्मी।
मम्मी: अरे बेटा ये तेरे उंगली करने से नहीं हुआ है। कभी-कभी गैस बनने से हो जाता है। अभी ठीक हो जाएगा।
मैं: ठीक है मम्मी मगर तेल मैं लगाऊंगा।
मम्मी: ठीक है बेटा तू ही लगा दे।
मम्मी सीधी लेट गईं। उन्होंने अपने पेटीकोट का नाड़ा थोड़ा सा ढीला कर दिया। मैंने सीधा ऊपर से उनकी नाभि में तेल डाल दिया।
मम्मी: तू सुधरेगा नहीं। मेरे पेट में दर्द हो रहा है। और तू अभी भी मस्ती कर रहा है।
हम दोनों हंसने लगे। मम्मी की नाभि में काफी तेल भर गया था। मैं हल्के हाथ से उनके पेट पर तेल लगाने लगा।
मम्मी के पूरे पेट पर तेल फैल गया। मैं पूरे पेट की अच्छे से मालिश कर रहा था।
मम्मी आँखें बंद किए लेटी हुई थीं।
मेरा हाथ कई बार मम्मी की झांटों में लग जाता। मगर मम्मी वैसे ही आँखें बंद किए लेटी हुई थीं। मैंने देखा मम्मी के निप्पल ब्लाउज में साफ दिख रहे थे।
मम्मी की मालिश करते-करते मेरा लंड फटने को होने लगा। थोड़ी ही देर में मम्मी सो गईं। मैं भी हाथ धोने चला गया।
वापस आकर मैंने देखा मम्मी का पेटीकोट थोड़ा उठा हुआ था। मैंने पेटीकोट के अंदर देखना चाहा मगर कुछ दिखा नहीं।
मैंने तुरंत मोबाइल की फ्लैश ऑन की। और मम्मी के पेटीकोट के अंदर रोशनी डाली।
मम्मी अंदर से बिल्कुल नंगी थीं। उनकी चूत के ऊपर काफी बाल थे।
मम्मी की चूत थोड़ी खुली हुई थी। और उनकी चूत का चमड़ा बाहर निकला हुआ था। मैं मम्मी की चूत को जी भर के चाटना चाहता था। मगर डर भी था।
मैंने मोबाइल की फ्लैश लाइट बंद की और मम्मी के बगल में लेट गया। मम्मी की सांस के साथ-साथ उनके बड़े-बड़े दूध ऊपर-नीचे हो रहे थे।
मम्मी के खड़े निप्पल साफ दिख रहे थे। मेरा बार-बार मन करता कि मैं मम्मी के दूध चूस डालूं। मगर डर की वजह से मैं ऐसा नहीं कर पा रहा था।
मम्मी ने करवट ले ली। अब उनकी बड़ी गांड मेरे सामने थी। मैंने अपना लंड निकाला और उनकी गांड पर दबाने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
कुछ देर तक मैं मम्मी की गांड पर लंड रगड़ता रहा। और जैसे ही मेरा पानी निकलने वाला था, मैंने सारा पानी अपने हाथ पर निकाल दिया।
अपना हाथ धोकर मैं मम्मी के साथ लेट गया। और सोचने लगा कि कैसे मम्मी को पटया जाए। कुछ घंटे आराम करने के बाद मम्मी उठ गईं।
मैं: मम्मी आपका दर्द तो ठीक है?
मम्मी: हाँ बेटा मेरा दर्द ठीक हो गया।
मैं मम्मी से चिपक के लेट गया। और मम्मी मेरे बालों में उंगली घुमाने लगीं। मैंने अपनी उंगली मम्मी की नाभि में घुसा दी और खेलने लगा।
मैं: मम्मी मेरे उंगली करने से दर्द तो नहीं हो रहा है आपको?
मम्मी: नहीं बेटा मुझे कोई दर्द नहीं हो रहा है।
मैंने पास के ड्रॉअर से कंचा निकाला और उसे मम्मी की नाभि में डाल दिया। मम्मी की गहरी नाभि में कंचा बहुत अच्छा लग रहा था।
मम्मी मुझे देखकर हंस रही थीं। तभी वो हुआ जिसका उन्हें अंदाजा नहीं था। कंचा मम्मी की नाभि में था। मैंने तुरंत अपनी जीभ मम्मी की नाभि में घुसा दी।
मेरी गरम जीभ का स्पर्श मिलते ही मम्मी ने जोर से सांस ली। मैंने मम्मी का पेट जोर से पकड़ लिया। मेरी गीली जीभ मम्मी की नाभि से कंचा बाहर निकाल रही थी।
इससे पहले मम्मी कुछ समझ पातीं, मैंने कंचा उनकी नाभि से बाहर निकाल लिया। मेरी जीभ से टपकती लार मम्मी की नाभि में जा चुकी थी।
मम्मी तुरंत उठीं और किचन में चली गईं। मैं उनके पीछे गया तो मैंने देखा वो चाय बना रही थीं। मैं उनके पास गया।
मैं: मम्मी क्या हुआ? आप एकदम से उठके चली आईं यहाँ?
मम्मी: अरे नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है। मुझे चाय बनानी थी इसलिए।
मैं: नहीं आप झूठ बोल रही हैं। मैंने आपकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी इसलिए आप मुझसे नाराज हो गईं। सॉरी मम्मी आगे से नहीं करूंगा।
मम्मी: अरे बेटा ऐसा कुछ नहीं है। हाँ मुझे थोड़ा बुरा जरूर लगा। तूने एकदम से अपनी जीभ मेरी नाभि में डाल दी।
मैं: मम्मी मुझे माफ कर दो। आगे से आपसे पूछके ही अपनी जीभ डालूंगा।
मम्मी: हाहाहाहा मतलब तुम अब मुझसे पूछके मेरी नाभि में जीभ डालोगे। पता नहीं तुझे मेरी नाभि से इतना प्यार क्यों है।
मैं: मम्मी मैं तो आपसे भी बहुत प्यार करता हूँ। मगर मुझे आपकी नाभि बहुत पसंद है।
मम्मी ने चाय बना ली। और हम दोनों चाय पीने लगे। चाय पीने के बाद मम्मी साड़ी पहनने लगीं।
मैं: मम्मी साड़ी क्यों पहन रही हो? इतनी गर्मी हो रही है।
मम्मी: बेटा तेरे पापा आने वाले होंगे। उन्हें अच्छा नहीं लगेगा मुझे ऐसे देखकर।
मैं: मम्मी पापा को तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। आप इतनी सुंदर हो फिर भी वो बाहर ऐसा करते हैं।
मम्मी: बेटा अब इसमें मैं क्या कर सकती हूँ। तेरी मम्मी अब बूढ़ी हो चुकी है।
मैं: मम्मी आप बूढ़ी नहीं हुईं। पापा अंधे हो गए हैं। वरना आप जैसी बीवी तो उन्हें 7 जन्म में भी नहीं मिल सकती है। काश मैं आपका ख्याल रख पाता।
मम्मी: बेटा तू तो मेरा कितना ख्याल रखता है। मुझे तुझसे कुछ नहीं चाहिए। बस अपनी मम्मी को कभी छोड़के मत जाना।
मैं मम्मी के गले लग गया। मम्मी ने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मम्मी के बड़े-बड़े दूध मेरे सीने में दब रहे थे।
मम्मी ने साड़ी पहन ली थी। मम्मी की नाभि थोड़ी कम दिख रही थी इसलिए मैंने कहा।
मैं: मम्मी अपनी साड़ी थोड़ी नीचे करो ना। आपकी नाभि नहीं दिख रही है।
मम्मी ने अपनी साड़ी थोड़ी नीचे कर दी। मम्मी की नाभि दिखते ही मैंने उसमें उंगली कर दी। मम्मी हंसने लगीं और किचन में जाके खाना बनाने लगीं।
पापा भी आ गए। फिर रात 9 बजे हमने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं और मम्मी टेरेस पर टहलने चले गए रोज की तरह।
काफी देर बात करने के बाद मैंने अपना आइडिया लगाया।
मैं: मम्मी आप जब सोती हो तो आपको होश नहीं रहता है क्या?
मम्मी: बेटा तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?
मैं: मम्मी ये मैंने कई बार देखा है। मगर आपको कहना सही नहीं लगा। इसलिए मैंने आज तक नहीं कहा।
मम्मी: बेटा क्या बात है साफ-साफ कहो।
मैं: वो मम्मी ऐसा हुआ कि… वो मम्मी, मैं बार-बार सिर्फ आधी ही बात बोल रहा था।
मम्मी: बेटा बताओ ना क्या बात है?
तभी नीचे से पापा की आवाज आ गई। मैंने मम्मी से कहा कल दोपहर को बताऊंगा। हम दोनों नीचे आ गए। मम्मी शायद पूरी रात इस बात से परेशान रही होंगी।
सुबह मम्मी ने मुझे जगाया। मैंने जल्दी से तैयार हो गया। और नाश्ता करके मम्मी के गाल पर किस करके कॉलेज चला गया।
जब मैं कॉलेज में था, तब मम्मी का कॉल आया कि बेटा मैं अपनी सहेली के घर हूँ। घर जाते हुए मुझे ले जाना।
कॉलेज से आते टाइम मैं मम्मी को लेने गया। उस दिन मम्मी ने कॉफी कलर की साड़ी पहनी हुई थी। मम्मी बहुत अच्छी लग रही थीं। मगर मेरी नजर तो उनकी नाभि पर ही थी।
मम्मी ने मुझे उनकी नाभि घूरते देख लिया था। मम्मी मेरी बाइक पर बैठ गईं।
मैं: मम्मी ये साड़ी तो आप पर बहुत अच्छी लग रही है। आप बहुत सुंदर लग रही हो।
मम्मी: अच्छा जी तभी तुम मेरी सहेली के सामने मेरी नाभि घूर रहे थे।
मैं: मम्मी आपको कैसे मालूम चला कि मैं आपकी नाभि देख रहा हूँ?
मम्मी: बेटा हम लेडीज की 4 आँखें होती हैं। हम सब देख लेते हैं कौन क्या देख रहा है। बेटा कम से कम बाहर तो ध्यान से रहा करो। दुनिया वाले क्या कहेंगे कैसा लड़का है अपनी मम्मी की नाभि देखा है।
मैं: सॉरी मम्मी मगर मैं जब भी आपकी नाभि देखता हूँ। मुझे बहुत अच्छा लगता है।
पूरी बाइक पर मम्मी के दूध मेरी पीठ से चिपके हुए थे। जिससे मेरा लंड फटने को हो रहा था।
घर पहुँचते ही मम्मी बोलीं—
मम्मी: जा नहा ले। मैं तेरे लिए रोटी बनाती हूँ। फिर मैं भी नहा लूंगी। गर्मी बहुत हो रही है।
मैं जल्दी से नहा के आ गया। मैंने बॉक्सर और बनियान पहनी और सीधा किचन में गया। मम्मी रोटी बना रही थीं। गर्मी की वजह से मम्मी को पसीना बहुत आ रहा था।
मम्मी का पसीना गले से होता हुआ उनके बड़े-बड़े दूध में जा रहा था। मम्मी की कमर पर भी बहुत पसीना था। मेरा तो मन कर रहा था सारा पसीना चाट लूँ।
मैं जल्दी से एक टॉवल लेके आया। और मम्मी का बहता पसीना उनकी गर्दन और उनके दूध से साफ करने लगा।
मम्मी: अरे यहाँ क्या कर रहा है? बाहर जा। यहाँ गर्मी है। मैं खाना निकाल के देती हूँ तू खा ले।
मैं: मम्मी आप रोटी बना लो। फिर साथ में खा लेंगे।
मम्मी: ठीक है बेटा। वैसे भी मुझे तुझसे वो रात वाली बात पूछनी है।
मम्मी ने रोटी बनाई और नहाने चली गईं। मैं टीवी देखने लगा। थोड़ी देर में मम्मी सिर्फ पेटीकोट में बाहर आ गईं। उनका पेटीकोट उनके दूध पर बंधा था।
ये नजारा मेरे लिए बहुत आम बात है। मम्मी हमेशा ब्लाउज बाहर आकर ही पहनती हैं। मगर जब भी वो ऐसे ब्लाउज पहनती हैं, तब मुझे उनके दूध के दर्शन हो जाते हैं।
मम्मी ने ब्लाउज और पेटीकोट पहन लिया। फिर हम दोनों ने खाना खाया और बेड पर लेटकर टीवी देखने लगे।
मम्मी: बेटा अब मुझे बता क्या बात हुई थी। तुझे मेरी कसम है।
मैं: मम्मी जब आप सोती हैं तब आपका पेटीकोट बिल्कुल ऊपर आ जाता है। जिससे आपका सब कुछ दिखने लगता है। और तो और मुझे तो आपका ब्लाउज देखकर लगता है कहीं ये फट न जाए।
मम्मी मेरी बात सुनके एकदम शॉक्ड हो गईं। उनके चेहरे पर शर्मिंदा होने वाले भाव साफ दिख रहे थे।
मम्मी: बेटा तू सच कह रहा है? तूने मुझे क्यों नहीं बताई ये बात?
मैं: सॉरी मम्मी मुझे लगा आप नाराज हो जाएंगी। मैंने आपका पेटीकोट कई बार नीचे किया है।
मम्मी: बेटा ये गलत बात है। तुझे मुझे ऐसे नहीं देखना चाहिए। आगे से ध्यान रखना।
मैं: मम्मी मैंने सिर्फ आपका पेटीकोट नीचे किया है। ताकि आप शर्मिंदा न हो जाएं। वैसे भी मैंने किसी बाहर वाली को तो नहीं छेड़ा है।
मम्मी: बेटा तुझसे जितना मेरे बस की बात नहीं है। तेरे पास तो हर सवाल का जवाब है।
मैं: मम्मी आप शर्मिंदा मत हो। मैंने तो बचपन में कई बार आपको ऐसे देखा है।
मम्मी: बेटा तब तो छोटा था। मेरे साथ नहा लेता था। मगर अब तू बड़ा हो गया है। थोड़ा ध्यान रखा कर इन सब बातों का।
मैं: मम्मी इसलिए मैंने आपको नहीं बताया। मैंने सोचा मैं खुद आपका पेटीकोट सही कर देता हूँ। मम्मी आप ब्लाउज भी थोड़ा ढीला पहना करो। मुझे तो लगता कहीं ये फट न जाए।
मम्मी: चल हट बदमाश। अब तू ये सब भी देखने लगा है। वैसे तूने सही कहा। आगे से ढीला ब्लाउज पहना करूंगी। ताकि हवा भी लगती रहे।
मैं: वैसे मम्मी ये पहली बार तो नहीं है। मैं तो कई बार आपके दूध देख चुका हूँ। जब आप नहा के आती हैं तब। वैसे सच कहूँ आपके दूध देखकर मुझे अपना बचपन याद आ जाता है।
मेरी बात सुनके मम्मी हंसने लगीं। मैंने अपनी उंगली मम्मी की नाभि में डाल दी। और उनकी नाभि से खेलने लगा।