Padosan ne dilwayi mummy ki chut:- हाय दोस्तों, मेरा नाम रोहित है, और अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ। मेरी पड़ोसन भाभी एक गदरीले बदन की मालकिन है। उसके बूब्स और गाँड बहुत ही मस्त हैं। जब वो चलती है, तो उसके बूब्स उछलते हैं और उसकी गाँड मटकती है।
Padosan ne dilwayi mummy ki chut
मोहल्ले में उसके बहुत सारे दीवाने हैं। उसका पति खुद का बिजनेस चलाता है। इसलिए वो ज्यादा टाइम बाहर ही रहता है, और वो एक हाउसवाइफ है। अभी 4-5 साल पहले ही वो मेरे घर के साथ वाले घर में रहने आए हैं।
जब वो आई थी, तब मैं कॉलेज में था। अब मैं पास आउट हो गया हूँ। इसी बीच मेरे में काफी शारीरिक और मानसिक बदलाव भी आए हैं। माँ तो घर पर ही रहती थीं। तो जब मैं कॉलेज से बंदियों के साथ यहाँ बैठा रहता था।
तो उन्होंने मुझे काफी बार पकड़ा था। एक बार तो मैं बंदी को किस कर रहा था, और उसकी टी-शर्ट में हाथ डालकर उसके बूब्स दबा रहा था। होटल में कोने में बैठा था। तभी पता नहीं अचानक से वो और उसका पति कहाँ से आए।
वो टेबल खाली है या नहीं वो चेक करने आई थीं। उस टाइम मेरा लंड मेरी बंदी के हाथ में था, जिसे वो सहला रही थी। ये देखकर वो शर्म के मारे वहाँ से चली गईं। बाद में घर आकर वो मुझे माँ के सामने चिढ़ाती थीं।
ऐसे ही हम दोनों फ्रैंक हो गए थे। वो घर नाइट में ही रहती थीं। जब वो बाहर आती थीं तो मैं उसे ताड़ता था। वो अंदर कुछ नहीं पहनती थीं। उसे ये बात पता थी, इसलिए वो खुद कभी-कभी मेरे सामने झुककर मुझे नंगे बूब्स के दर्शन करवाती थीं।
अब मैं जरा मर्दाना हो गया था। मेरे मुँह पर मूँछें, दाढ़ी, और मेरा बदन भी मर्दों जैसा हो गया था। घर पर मैं ज्यादातर ऊपर कुछ नहीं पहनता था, और नीचे बस एक शॉर्ट ही डालता था।
या कभी अंडरवियर और लुंगी पहनता था। अब उसका मुझे देखने का नजरिया बदल गया था। वो मुझे हवस की नजरों से देखती थीं। एक दिन मेरे माँ-बाप गाँव गए हुए थे।
तो वो मेरे घर शक्कर लेने आईं, और वो अभी नहाकर ही निकली थीं। उसके बाल गीले थे, और बालों से पानी की बूँदें उसकी नाइटी पर गिर रही थीं। नाइटी ऊपर से आधी भीग गई थी।
नीचे से उसके बूब्स एकदम साफ कड़क गोल दिख रहे थे। मैंने दरवाजा खोला और उसे देखता ही रह गया। वो अंदर आईं और मुझसे पूछा कि माँ कहाँ है।
मैं: वो तो गाँव गई हैं, और वो 2 दिनों बाद ही आएंगी।
भाभी: अच्छा मुझे शक्कर चाहिए।
मैं: मुझे पता नहीं। आप खुद ही ले लो।
तो वो किचन में ढूँढ रही थीं। शक्कर का डिब्बा ऊपर था और उसका हाथ नहीं जा रहा था। तभी मैंने उसे कमर से पकड़कर ऊपर उठाया तो वो एकदम कसमसा गईं।
डिब्बा नीचे लिया और उसने शक्कर ली। पर अब उसके तेवर बदले-बदले से लग रहे थे। उसने वापस रखने को कहा, तो इस बार उसने जानबूझकर अपनी गाँड मेरे लंड से टच करवा दी।
मैं भी समझ गया और मैंने वैसे ही हवा में उसे उछालकर अपना लंड उसकी गाँड पर लगाकर खड़ा रहा। वो खुद भी नीचे लेने को नहीं बोल रही थीं। तभी उसके पति की आवाज आई तो मैंने उसे नीचे उतार दिया।
वो मेरी छाती के बालों में हाथ घुमाकर बोलीं—
भाभी: अब तेरी शादी करवानी पड़ेगी। अब तेरी उम्र हो गई है।
फिर वो जानबूझकर दोपहर में लिए खाना लेकर आईं। अब वो पूरी सज-धज, पूरा मेकअप करके आई थीं। मुझे खाना देकर वो मेरे साथ अंदर बैठ गईं। टीवी ऑन था। वो सीधे मेरे ऊपर बैठकर अपनी चूत को मेरे लंड पर खुजला रही थीं।
मैं वही देख रहा था। बीच में ही उसने अपनी नाइटी को अपनी जाँघों तक ऊपर उठाया। वहाँ से सहलाना शुरू कर दिया। मैं उसे ताड़ता जा रहा था। और फिर उसने मुझे कहा—
भाभी: देखा ना बच्चू मुझे बहुत खुजली हो रही है। प्लीज तू थोड़ी मसाज कर दे ना।
मैं उसकी नंगी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया। मैं ऊपर नहीं जा रहा था। उसने नाइटी अब पूरी उठा ली और उसकी चूत अब मुझे साफ-साफ दिख रही थी। उसकी चूत एकदम गुलाबी-गुलाबी थी, और उस पर छोटे-छोटे बाल भी थे।
मैं उसे देखता ही रहा। और उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया।
भाभी: हाँ यहाँ बहुत खुजली हो रही है।
मैं उसकी चूत को मसलने लग गया। मुझसे भी अब रहा नहीं गया। तो उसने खुद मेरी दो उंगलियाँ अपनी चूत के दाने पर रखवा कर जोर-जोर से दबाकर मसलवाने लग गईं। अब मैं अंदर-बाहर उंगली करने लग गया। उसने मेरी चड्डी निकाली और मेरा लंड हाथ में लेकर सहलाने लग गईं।
मैंने उसे अपना लंड चूसने को बोला, तो वो झट से राजी हो गईं। फिर हम अंदर गए, और वो मेरे ऊपर आकर बैठ गईं। उसने अपनी चूत को मेरे मुँह पर रखकर वो खुद मेरा लंड चाटने लग गईं। वो इसमें काफी अच्छी थीं। वो मेरे टट्टों को भी चाट रही थीं।
उसे वो मुँह में ले रही थीं, और मेरे मुँह में अपनी चूत रगड़वा रही थीं। फिर वो नीचे अपने पैर खोलकर लेट गईं और मैं बोला—
मैं: मेरे पास कंडोम नहीं है।
भाभी: साले इतना गरम करके क्यों मजा खराब कर रहा है? अब डाल दे ऐसे ही। मैं बाद में गोली खा लूँगी।
फिर क्या था, मैंने उसकी चूत में लंड डाल दिया। उसकी चूत काफी टाइट थी। इसलिए मैंने भाभी से पूछा—
मैं: क्या बात, भैया अब नहीं करते क्या?
भाभी: अब तेरे भैया बस पैसों के पीछे भाग रहे हैं। मुझे अब बैंगन, गाजर से काम चलाना पड़ रहा है। पर अब मैं तेरा लंड इस्तेमाल करूँगी।
मैं: कैसे? अभी माँ नहीं हैं, पर माँ के आने के बाद तो कैसे चलेगा?
भाभी: देखते हैं। अभी तू मुझे शांत कर।
फिर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया और मैं उसे चोदने लग गया। भाभी ने मुझे उसके बाल पकड़कर चोदने को कहा। मैं एक हाथ से नीचे से उसके बूब्स को पकड़कर दबा रहा था।
सच कहता हूँ, डॉगी स्टाइल में असली मजा आता है। वो अपनी गाँड हिला-हिला कर मेरा लंड अंदर ले रही थीं। अब मेरा निकलने वाला था, तो मैंने लंड निकालकर अपनी उंगलियाँ चलानी शुरू कर दीं।
अब वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं, और भाभी बोलीं—
भाभी: ऐसे ही करते रहो आाह्ह आाह्ह आाह्ह।
फिर वो मूतने लग गईं, और उसने पूरा बेड गीला कर दिया। अब मैं उसको फिर से बाहर सोफे पर ले गया। मेरा लंड फिर से छोटा हो गया था, तो उसने उसे चूसकर खड़ा कर दिया।
फिर वो बैठ गईं, और दूसरे दिन दोपहर को भी ये ही हुआ और मस्त चुदाई चालू थी। वो मेरा लंड चूस रही थीं और मैं उसकी चूत चाट रहा था। मुझे पता ही नहीं चला कि कब माँ अंदर आ गई हैं।
अब वो उठकर मेरे लंड पर बैठकर उछल रही थीं। अचानक उसकी नजर सामने गई और वो चिल्ला उठीं—
भाभी: दीदी आप!
मैं कुछ समझता इससे पहले वो उठकर नाइटी डालने लग गईं। मेरा लंड अभी भी माँ के सामने खड़ा हुआ था, और माँ को देखकर मेरी फट गई। माँ उसे डाँटने लग गईं, और मैं अपने कपड़े पहनकर बाहर आ गया।
मेरी भी फटी पड़ी थी। पता नहीं चल रहा था कि अब मैं क्या करूँ। तभी आंटी का फोन आया और उन्होंने घर मुझे बुलाया। मैं उनके घर गया तो उन्होंने दरवाजा लगाया और नाइटी उतारकर मेरी गोद में बैठकर वो चालू हो गईं।
मैं: ये क्या कर रही हो यार? मेरी यहाँ फटी पड़ी है।
भाभी: कुछ नहीं हुआ। मैं सब कुछ सॉल्व कर दिया है बच्चू।
मैं: कैसे?
भाभी: पहले तू मुझे शांत कर फिर मैं तुझे बताऊँगी।
अब मैं उसकी चूत चाटने लग गया, और वो सिसकियाँ लेने लग गईं। पर अभी वो नहीं बता रही थीं। मैं अब उसे चोदने लग गया और मैं तेज-तेज धक्के मारने लग गया।
भाभी: तेरी माँ भी अब तुझसे चुदना चाहती है।
ये सुनते ही मैं रुक गया और मैं बोला—
मैं: ये तू क्या कह रही है?
तो वो मेरे ऊपर आकर बोलीं—
भाभी: तेरी माँ को भी अपनी खुजली मिटानी है। उसे भी तेरा लंड खाना है। अब तू बता मैं उसे बाहर किसी और का लंड खिलाऊँ या तू ही उसे चोदेगा।
और ऐसे ही धक्कों के चलते वो चरम सीमा पर पहुँच गईं और बोलीं—
भाभी: तेरे जितना मस्त लंड पूरे मोहल्ले में किसी का नहीं मिलेगा। चोद डाल अपनी माँ को। हम दोनों को भी आजादी मिल जाएगी। तुझे क्या करना है, तू मजे ले दो चूत का।
फिर वो झड़ गईं और उसका गरम पानी लंड को लगा, तो मैं भी झट से झड़ गया। अब हम दोनों एक-दूसरे के ऊपर पड़े हुए थे और मैं बोला—
मैं: यार अब कैसे होगा आगे?
भाभी: अभी तू मुझे और चोद। और 2 दिन बाद मैं जैसे कहूँगी बस वैसा ही करियो।
आगे की कहानी नेक्स्ट पार्ट में।