Budha chokidar aur jawan malkin:- स्नेहा एक ऐसी लड़की थी जो बहुत ही शरीफ थी। किसी को भी भाव न देने वाली। इस लड़की ने अपने पति को खोने के बाद एक प्यासी औरत बन जाती है। उसे अब सोते समय हर बार गोपीलाल का लौंडा याद आता है, न चाहते हुए भी।
एक-दो दिन बाद शारदा देवी स्नेहा को बुलाती है।
Part 3 ==> बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 3
शारदा: बहू, तुम्हें रूपनगर जाना होगा। स्टेट मैनेजर ने फोन पर बताया कि वहाँ एक जागीर का काम है। उसे निपटाकर आना होगा।
स्नेहा: ठीक है। मेरे साथ और कौन जा रहा है?
शारदा: तुम्हारे साथ और कोई नहीं। सिर्फ बिरजू चौकीदार जाएगा। क्योंकि गोपीलाल बीमार है। मैंने देखा कि वो सो रहा है, इसलिए उसे नहीं बुलाया। अब और कोई भी तो नहीं बचा। सिर्फ बिरजू ही है जो जा सकता है। तुम तैयार हो जाओ।
स्नेहा: ठीक है माँ जी।
बिरजू के बारे में सुनकर स्नेहा में थोड़ा सा घबराहट हो जाती है। उसे अपनी सहेली की बातें याद आने लगती हैं जो उसने बिरजू बूढ़े के बारे में कही थीं। बिरजू बूढ़े की नजर ठीक नहीं है। वो भी एक थरकी है। ऐसी बातें।
Budha chokidar aur jawan malkin ki sex story
स्नेहा (मन में): अब मैं क्या करूँ। उस बूढ़े के साथ जाने को मन नहीं करता, लेकिन अब तो जाना ही पड़ेगा।
स्नेहा की जाने की तैयारी हुई। हमेशा की तरह आज भी साड़ी ही पहनकर आती है। जिसमें देखकर बिरजू बूढ़े के होश उड़ जाते हैं।
बिरजू (मन में): आह्ह्ह आज तो भाई मजा ही आएगा। क्या माल है यार। आज इसी के साथ रहने को मिलेगा। आह्ह्ह क्या खूबसूरती है। कितना गोरा बदन है।
ये सब बूढ़ा बिरजू चौकीदार स्नेहा को आते देखकर बोल रहा था। घोड़े की गाड़ी तैयार थी। जब स्नेहा गाड़ी के सामने आती है तो बिरजू उसे देखता है और पाता है कि बिरजू उसे चोरी-चोरी नजरों से निहार रहा था। ऊपर से नीचे तक। उसका शरीर भी भरा हुआ जिस्म का लगता है, जिसे देखकर बिरजू बूढ़े को कुछ-कुछ होता है। आज भी लाल ट्रांसपेरेंट साड़ी में थी सेक्सी स्नेहा।
स्नेहा के साथ जब घोड़े की गाड़ी में जा रहे थे तो बार-बार बूढ़ा बिरजू उसे देखने की कोशिश कर रहा था। और ये स्नेहा भी नोटिस कर लेती है। बिरजू बूढ़े ने आँखें फाड़कर एक बार स्नेहा को घूर रहा था। स्नेहा ने तब बिरजू की उस हवस भरी नजर को पकड़ लिया था। जब पकड़ लिया तो बिरजू चौकीदार अपनी आँखें दूसरी तरफ कर लेता है।
स्नेहा: क्या है काका? कुछ बताएँगे मुझे? क्या?
स्नेहा जब उनकी हवस भरी नजर देखती है तो तब ये सवाल करती है।
बिरजू: नहीं बहुरानी, कुछ… कुछ नहीं है। घबरा कर बताते हैं।
स्नेहा: तो फिर क्यों बार-बार मुझे देख रहे हो? मेरी तरफ देखते हो बार-बार। क्या है मुझमें?
बिरजू बूढ़ा बहुत ही चालाक था। गोपीलाल से भी बहुत ही चतुर किस्म का था। उसने बताया—
बिरजू: एकदम साफ बता दूँ बहुरानी। आप इस हवेली के इस जमींदार परिवार के सदस्य हैं। आपको अगर मैं बताऊँ तो कहीं मेरी नौकरी न चली जाए। इसलिए रहने दीजिए।
स्नेहा: नहीं नहीं, तुम बताओ। बात यहीं खत्म ही जाए तो अच्छा था, लेकिन न जाने क्यों स्नेहा को सुनना था बिरजू के मुँह से। थोड़ा सा अंदाजा तो उसे हो गई थी कि क्या रीजन हो सकता है, लेकिन फिर भी स्नेहा के अंदर न जाने क्यों उस तरफ बार-बार देखने की वजह इस थरकी बूढ़े से सुनना था। मानो कि एक बेचैनी थी जानने की।
बिरजू: दरअसल मैंने अपनी जिंदगी में बहुत सारी लड़कियाँ देखी हैं, लेकिन आप जैसा कोई भी नहीं।
स्नेहा: क्यों? क्या है मुझमें?
बिरजू: आप एक बहुत ही खूबसूरत, प्यारी सी एक परी जैसी लगती हैं। आप विश्वास नहीं करेंगी कि आप मेरी बीवी की तरह भी लगती हैं। मेरी बीवी आपकी तरह सुंदर थी, लेकिन उसको तो भगवान को प्यारी हो गई। आज पंद्रह बरस हो गए।
स्नेहा: क्या कहते हो आप? इतना पहले ही आप अपनी बीवी खो दी थी?
बिरजू: हाँ। मेरा जीवन बहुत ही दुख से भरा है। इसलिए मैं जब भी आपको देखता हूँ तो मुझे मेरी कमला की याद आने लगती है। कमला मेरी पत्नी।
बिरजू की बातें सब ही झूठी थीं, लेकिन चतुर बिरजू ने ऐसी एक्टिंग की कि स्नेहा को उस पर तरस आने लगा।
पहली बार किसी लो-क्लास के आदमी, वो भी बूढ़े के जीवन से स्नेहा को अपनी जवान खूबसूरती के बारे में सुनकर शर्म आती है।
रूपनगर की जागीर का काम निपटाना स्नेहा के लिए एक दिन काफी नहीं था। इसलिए एक गेस्ट हाउस में स्नेहा के रहने का इंतजाम करवा दिया गया। बिरजू चौकीदार उस गेस्ट हाउस के एक कमरे में अलग रहने लगता है, लेकिन सोने से पहले स्नेहा के आसपास ही उसकी सिक्योरिटी गार्ड जैसा काम करता रहा।
आज रात एक ऐसी रात थी जो स्नेहा की एक मजबूरी की रात थी और बिरजू बूढ़े की मजे लेने की रात थी। खाना खाने के बाद बिरजू बूढ़े को बाहर गार्ड लेते वक्त स्नेहा ने उसे कहा—
स्नेहा: काका, खाना खा लिया है आपने?
बिरजू: हाँ बहुरानी।
बाहर से स्नेहा की आवाज सुनके जवाब देते हैं।
स्नेहा को अकेलापन महसूस हुआ क्योंकि इस गाँव में नेटवर्क बहुत ही खराब है। मोबाइल यूज नहीं कर पा रही है स्नेहा। इसलिए बिरजू काका से बातें करने के लिए उनको बुलाती है अंदर कमरे में।
जब बुला रही थी तब अंदर बहुत ही जल्दी घुस जाते हैं बिरजू।
स्नेहा अपने आप को थोड़ा संभाल लेती है। साड़ी भी ठीक करके पहन लेती है और बिरजू चौकीदार को बैठ जाने को कहती है। इन दोनों के बीच ज्यादा दूरी नहीं थी।
अंदर जाके बिरजू बूढ़े ने स्नेहा को देखकर मन ही मन खुश हो जाता है।
बिरजू: क्या है बेटी… ओह माफ करना आप बहुरानी। मैं आपको बेटी कह दिया। भूल हुई है मुझसे।
स्नेहा: ठीक है, इट्स ओके। मुझे नींद नहीं आ रही थी। सोचा आपसे बात कर लूँ। कुछ आपने जो बताया था कि आप इस जिंदगी में अकेले हैं, ये सोचकर मुझे बहुत अफसोस हुआ। लेकिन आप ये भी बताया कि आपकी बीवी न होने से आपको एक बीमारी सता रही है। वो कौनसी बीमारी है काका? मुझे बताइए।
मैं इलाज कर दूँगी। कोई दिक्कत नहीं। आप हमारे पापा की तरह हैं। भले ही आप चौकीदार हैं, लेकिन आप मेरे बाप की तरह बुजुर्ग हैं। इसलिए मुझे आपकी मदद करनी चाहिए।
बिरजू बहुत चालाकी से सोचता है कि अब एक मौका है इसकी इमोशनली ब्लैकमेल करने का फायदा उठाने का। और बिरजू ने वही सोचा कि इसके सामने लाचार-बेबस होकर ही इसकी दिल जीतना होगा और फिर इसके करीब आऊँगा धीरे-धीरे।
बिरजू: जी बहुरानी, कैसे बताऊँ आपको वो मेरी बीमारी के बारे में। मुझे शर्म आती है।
स्नेहा: बताइए ना। मैं सुनना चाहती हूँ।
बिरजू: नहीं नहीं। मुझे बताने से समस्या हो रही है। आप बुरा भी मान लो।
स्नेहा: नहीं नहीं, बताइए। मैं कुछ नहीं कहूँगी और समझूँगी। आपसे प्रतिज्ञा करती हूँ।
बिरजू: कुछ पल चुप रहकर बिरजू स्नेहा की आँखों में आँखें डालकर बोलता है। मुझे आपसे प्यार हो गई है। दरअसल आपसे नहीं, मेरी बीवी से जो आपकी तरह दिखती थी।
मैं आपसे माफी चाहता हूँ, लेकिन ये सच है। आज मैं आपको सब कुछ बताता हूँ। जबसे आपको पहली बार देखा था तभी से आपको सोचकर मैं अपना लंड सहलाता हूँ। क्योंकि मैं अपनी बीवी से हर रात सेक्स करता था, लेकिन आज मेरी बीवी न होने से मैं आपके बारे में सोचता हूँ और आपसे मन ही मन मिलन करता हूँ। और मेरी बीमारी ये है कि मेरे लौंडे में दर्द होता है। क्योंकि इससे पहले मिलन होते समय बहुत सारा सफेद पानी जो निकलता था, अब नहीं निकल पा रहा है तो इससे मुझे दर्द है। मैं जानता हूँ आप अब मुझसे नाराज होंगी ये सब सुनके। लेकिन मैं क्या करूँ। मैं तो मजबूर हूँ।
स्नेहा: लेकिन काका आप तो मेरे बुजुर्ग हैं और मैं आपकी बेटी जैसी।
बिरजू ने चतुर था। उसने अपनी कहने की मायाजाल में फँसा लिया था स्नेहा को। और एक प्रकार मजबूर हो गई स्नेहा। और ये था कि—
बिरजू: बहुरानी आप मेरे बेटी जैसी हैं, ठीक है। लेकिन एक बेबस हूँ मैं। अपनी जिंदगी का मजा ठीक से नहीं ले सका। बहुत जल्दी मेरी पत्नी दुनिया से चल बसी। अब मैं क्या करूँ। आप ही मुझे बचा सकती हो। मुझ पर दया कीजिए बहुरानी। मुझ पर दया कीजिए। आप ही मुझे बचा सकती हैं इस उलझन से।
स्नेहा: मैं कैसे?
बिरजू: सिर्फ एक बार मैं आपका नंगा बदन देख लूँ तो मुझे और कुछ नहीं चाहिए। फिर मैं वही सोचकर अपनी मुठ मार लूँगा। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं आपसे वादा करता हूँ जिंदगी भर आपका गुलाम बनकर रह जाऊँगा।
स्नेहा… ये सब बातें स्नेहा सुनती रही कुछ देर से। फिर वो चुप हो गई। स्नेहा बहुत ही हार्ड टाइप की लड़की थी, लेकिन बूढ़ा बीमार है और बूढ़ा बुजुर्ग आदमी वो भी तो रहा है। ये देखके उसे तरस आने लगा और कहने को कोई शब्द नहीं पाती है स्नेहा। स्नेहा को उस समय बिरजू की नजर में नजर डालके बातें करने का साहस नहीं हो पाता है। स्नेहा को गुस्सा आया था, लेकिन पल में ही बिरजू के ऊपर न जाने क्यों कोई आक्रोश न जा पाए। कुछ पल बाद स्नेहा बताती है—
स्नेहा: अब क्या बताऊँ आपको बिरजू काका। मैं… क्या… उम्म… ठीक है।
बिरजू ने इतनी बार रिक्वेस्ट की थी। आखिरकार स्नेहा सोचने के बाद राजी हो गई। उसे भी एक एक्साइटमेंट होने लगा था। एक बूढ़े जैसा आदमी जो उसके बदन को देखने वाला है। उसके सेक्सी बदन को देखकर एक लो-क्लास आदमी की हालत बुरी हो जाएगी और वो दृश्य देखने के लिए न जाने क्यों स्नेहा को भी मजा आएगा। यही सोचती है स्नेहा। स्नेहा एक घोर में आ गई। दिमागी घोर जो उसे अंदर ही अंदर मदहोशी में ले आए।
स्नेहा (मन में): ये कैसी मुसीबत है। आपको तो मुझे बहुत बुरा भी लगेगा अगर मैं उनको मना कर दूँ तो। मैं क्या करूँ।
थोड़ी देर बाद स्नेहा ठान लेती है। शर्मा कर कहती है—
स्नेहा: मैं ये सब नहीं करती हूँ। ये बहुत ही खराब काम है। लेकिन आप मेरे बुजुर्ग हैं। इसलिए आपकी तकलीफों को नजरअंदाज करते हुए मैं कर रही हूँ। लेकिन मेरा एक शर्त है। मैं आपके दो पैर बाँध कर रखूँगी। आप बैठे रहना और मेरे पास आने की कोशिश मत करना। ठीक है? मैं सोफे के सामने खड़ी रहूँगी। आप यहाँ बिस्तर पर।
ये कहकर एक रोमांचक आकर्षक दृश्य देखने को मिलेगा। यही सोचकर बूढ़ा बिरजू भी बिस्तर पर जाता है और तभी स्नेहा उसकी पैर बाँधकर उसे सोने को कहती है।
स्नेहा: अब आप लेट जाइए। मैं वहाँ जाती हूँ। शायद मैं उतना नहीं कर पाऊँगी, लेकिन जो करूँगी जितना भी करूँगी आपके लिए। उससे आप अपना काम करते रहना और मुझे बोलना अगर आपको हो जाती है तो।
यानी इनडायरेक्टली स्नेहा ने बिरजू को बताया कि पूरा नंगी नहीं हो सकती। जो करने वाली है वो काफी होगा।
स्नेहा सोफे पर जाके खड़ी हो जाती है और एक-एक करके धीरे-धीरे अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार देती है। जमीन पर पेटीकोट और साड़ी पड़े थे। वो नजारा बिरजू के लिए सिर्फ एक दृश्य ही नहीं, आकर्षक की आग थी जो बिरजू काका को पागल किए जा रहे थे। अंत में स्नेहा सब कुछ उतार देती है सिवाय ब्रा और पैंटी के। अब धीरे-धीरे पैंटी भी उतार देती है।
बिरजू: वाह्ह्ह क्या किस्मत मिली है मुझे। ऐसा रात हो जाएगा आज की रात। मालूम ही नहीं था। वाह्ह्ह मजा आ गया। आह्ह्ह क्या माल है यार। कितना बड़ा गांड है। ऐसा गांड आज तक नहीं देखा रे। आह्ह्ह।
स्नेहा ने बहुत ही शर्म से ये सब कर रही थी, लेकिन उसे भी एक अलग मजा आने लगता है। इसलिए वो भी देखना चाहती है मुड़के कि बिरजू काका क्या कर रहे हैं। वो मुड़कर देखती है कि बिरजू काका लेटे-लेटे लंड को सहला रहे हैं। धोती के ऊपर से। लंड अपनी आकार ले चुका है। लगता है ये भी बहुत बड़ा है गोपीलाल की तरह। ये सोचके स्नेहा भी एक्साइटेड हो जाती है और पैंटी उतार देकर अपनी मोटी मदमस्त नरम गांड को सीधा बिरजू बूढ़े की आँखों के बराबर करती है। अब बिरजू बूढ़ा उसकी गांड को देखकर पागल हो जाता है।
बिरजू: आआआह्ह्ह्ह क्या गांड है… आआआह्ह्ह।
बिरजू ने गांड को देखकर पागल इतना होता है कि बिस्तर से उठकर उसके पास जाके गांड के दो गोले को दो हाथों से मसल दे और मन भर चूसे और चाटे, लेकिन उनके पैर बंधे थे तो उठ नहीं पाया।
स्नेहा जब बिरजू को इस हालत में पाती है तो उसे और भी मदहोशी चढ़ जाती है और वो एक्साइटेड होने लगती है। उसे अच्छा लगने लगता है। एक बंदा है जो उसके शरीर को पाने के लिए तड़प रहा है। उसे मजा आने लगता है ये सोचके।
स्नेहा अपनी बेनी को गांड से हटा देती है और गांड अच्छी तरह से उन्मुक्त कर देती है।
बिरजू बस देखता ही रह जाता है और लंड को जोर-जोर से सहलाने लगता है।
बिरजू: आआआह्ह्ह क्या गांड है रे… हाय मैं तो मर जाऊँ…
मन ही मन कहता है।
बिरजू: आआआह्ह्ह आआआह्ह्ह क्या चूत है रे… एकदम साफ गुलाबी जैसा… उम्मम्म एक बार मिल जाती तो चूम-चूम के चाट-चाट कर भर देता… हाय मर डाला रे तूने…
ये बात बिरजू थोड़ा लाउडली बोल देता है जो स्नेहा को सुनाई देती है और उसे बहुत शर्म भी आने लगती है। स्नेहा धीरे-धीरे और भी खुल जाती है बिरजू बूढ़े की नजरों के सामने।
दोस्तों, इसी तरह बिरजू बूढ़े की कब्जे में आ जाती है स्नेहा। दरअसल करे भी तो क्या करे। स्नेहा भी तो अकेली हो चुकी थी। हवेली के नियम के अनुसार वो शादी नहीं कर पाएगी तो उसके अंदर जो सेक्स की प्यास थी उसे थोड़ा सा बुझाने की कोशिश करती है। स्नेहा। उसे भी बहुत अच्छा लगने लगा है जब बिरजू थरकी बूढ़ा उसके शरीर को पाने के लिए आने की कोशिश करता है, लेकिन आ नहीं पाता उसके सामने। यही उसको बहुत मजा देता है। शर्म से मुस्कुरा देती है स्नेहा।
आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।